कल क्या होगा, इसे ठीक-ठीक न आप बता सकते हैं, न मैं और न ही कोई और। हम कल के बारे में इतना ही जानते हैं जितना आज तक की योजनाएं हमें बताती हैं। अगर योजनाएं दुरुस्त हैं, उनमें दम है तो कल सुनहरा हो सकता है। नहीं तो कल आज से भी बदतर हो सकता है। कंपनियों पर भी यह बात लागू होती है। देश में निजी क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी मरकेटर लाइंसऔरऔर भी

अनिश्चितताओं का क्रम जारी है। बहुत से अनुत्तरित सवाल बाजार को डोलायमान किए हुए हैं। पिछले सेटलमेंट में सेंसेक्स 17,770 तक गिरने के बाद सुधरकर 18,600 पर आया ही था कि कुछ नई बुरी खबरों ने पटरा कर दिया। यकीनन, कच्चा तेल, मुद्रास्फीति और ब्याज दरों का बढ़ना जैसे पुराने मुद्दे बरकरार हैं। लेकिन इधर ग्रीस में फिर से उभरे ऋण संकट और अमेरिका में आई सुस्ती ने बाजार की मानसिकता को चोट पहुंचाई है। यहां तकऔरऔर भी

बाजार लोगों का झुंड नहीं होता, भीड़ नहीं होता। वह आगा-पीछा, भूत-भविष्य देख अपना फायदा सोचकर चलनेवालों का सामूहिक विवेक होता है। ठीक उसी तरह जैसे चुनावों में अवाम का फैसला भीड़ का नहीं, बल्कि सामूहिक विवेक का फैसला होता है। हां, पहले बूथ कैप्चरिंग वगैरह चलती थी तो अवाम की सही चाहत सामने नहीं आ पाती थी। ईवीएम मशीनें आने व चुनिंदा चुनाव सुधारों के बाद हालात पहले से बेहतर हुए हैं। इसी तरह हमारे बाजारऔरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज की 37वीं सालाना आमसभा (एजीएम) में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने उसकी तारीफ के पुल बांध दिए। सब बता डाला कि कितनी बड़ी कंपनी है, बराबर किस शानदार रफ्तार से हर मोर्चे पर बढ़ी है, वर्तमान कितना दमदार है और भविष्य कितना शानदार होगा। मुंबई के न्यू मरीन लाइंस के बिड़ला सभागार में जुटे शेयरधारकों ने तालियां भी बजाईं। लेकिन बाजार को मुकेश अंबानी के वाग्जाल में कुछ दम नहीं नजर आया। कंपनी का शेयर गुरुवारऔरऔर भी

साल के साथ साल का संयोग देखने में बना मजा आता है। ठीक साल भर पहले 3 जून 2010 को बैद ग्लोबल वेंचर्स का शेयर 45.70 रुपए पर 52 हफ्ते की तलहटी पकड़े हुए था। अब 186.85 रुपए पर है। इस साल भर के दौरान कंपनी में बहुत कुछ बदल चुका है। पहले इसका मालिक कोई और था, अब कोई और है। पहले इसका नाम लिविंग रूम लाइफस्टाइल लिमिटेड था, फिर चिसेल एंड हैमर (मोबेल) लिमिटेड हुआऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने चेयरमैन यू के सिन्हा का कहना है कि शेयर बाजार को सट्टेबाजों का बाजार नहीं समझा जाना चाहिए। लेकिन उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि भारतीय शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की भागीदारी मात्र आठ फीसदी पर अटकी हुई है, जबकि चीन तक में यह 30 फीसदी के आसपास पहुंच चुकी है। श्री सिन्हा ने मुंबई में वित्तीय समावेश पर स्कॉच द्वारा आयोजित एक सम्मेलनऔरऔर भी

हमारे शेयर बाजार में वेलस्पन नाम की पांच कंपनियां लिस्टेड हैं – वेलस्पन कॉर्प, वेलस्पन इंडिया, वेलस्पन इनवेस्टमेंट्स, वेलस्पन प्रोजेक्ट्स और वेलस्पन सिन्टेक्स। ये सारी की सारी एक ही समूह की कंपनियां है और इनके सामूहिक चेयरमैन बाल कृष्ण गोयनका हैं। आज यहां हम बात कर रहे हैं वेलस्पन कॉर्प की। यह बड़े व्यास की लंबी-लंबी पाइप बनानेवाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार है। भारत ही नहीं, दुनिया भर की तमाम पाइपलाइन परियोजनाओं को इसनेऔरऔर भी

महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज या छोटे में कहें तो महिंद्रा फाइनेंस का फोकस ग्रामीण व अर्धशहरी इलाकों पर है। वह बैंकों और माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं के बीच की चीज है। नई-पुरानी ट्रक, जीप, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल व कार के लिए लोन से लेकर घर बनाने और शादी, इलाज व बच्चों की पढ़ाई के लिए भी कर्ज देती है। गावों के करीब 10 लाख लोगों को अपना ग्राहक बना चुकी है। कंपनी की कई सब्सिडियरी इकाइयां भी हैं।औरऔर भी

हम कोई सामान खरीदने जाते हैं, पूरी तहकीकात करते हैं। कई दुकानों पर पूछते हैं। रिश्तेदारों व पड़ोसियों तक से पूछ डालते हैं। लेकिन शेयरों में निवेश हम झोंक में करते हैं। टिप्स की तलाश में लगे रहते हैं। हमारी इसी मानसिकता का फायदा उठाने के लिए इन दिनों तमाम वेबसाइटों से लेकर एसएमएस तक से टिप्स भेजे जाने लगे हैं। इधर फंडामेंटल्स मजबूती की बात उठने लगी तो कुछ एसएमएस फंडामेंटल बताकर ही निवेश की सलाहऔरऔर भी

मास्टेक लिमिटेड के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक और सीईओ भी सुधाकर राम हैं। मैं तो उनके विचारों का मुरीद हूं। आप भी पढेंगे तो कायल हो जाएंगे। करीब डेढ़ साल पहले शिक्षा पर मैंने उनका लेख पढ़ा था जिसमें उन्होंने एक अनुसंधान का जिक्र करते हुए लिखा था कि चार साल की उम्र तक लगभग हर बच्चा जीनियस होता है। फिर मैंने मास्टेक फाउंडेशन की तरफ से चलाई जानेवाली वेबसाइट पर उनके कई लेख पढ़े और इस शख्सऔरऔर भी