अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भरोसा जताया है कि भारत के आर्थिक हालात जल्दी ही बेहतर हो सकते हैं। उसने भारत की संप्रभु रेटिंग को बीएए3 पर कायम रखते हुए कहा है कि इस साल भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर सात फीसदी से नीचे आ सकती है। फिर भी यह बीएए3 की साख वाले देशों के औसत से अधिक रहेगी। मूडीज का यह रवैया काफी उत्साहजनक है। खासकर तब, जबकि स्टैंडर्ड एंड पुअर्स अमेरिका की रेटिंगऔरऔर भी

बाजार व विशेषज्ञ उम्मीद कर रहे हैं कि नवंबर में मुद्रास्फीति की दर 9.04 फीसदी रहेगी। कुछ लोग तो इसके 8.4 फीसदी तक आने का कयास लगा रहे थे। लेकिन इसका असल आंकड़ा 9.11 फीसदी का निकला है। इसे देखते हुए अब नहीं लगता कि शुक्रवार को रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कोई कमी करेगा। रिजर्व बैंक शुक्रवार, 16 दिसंबर को दोपहर 12 बजे मौद्रिक नीति की मध्य-तिमाही समीक्षा पेश करनेवाला है। शुक्र है कि यह पिछलेऔरऔर भी

वित्त मंत्रालय की तरफ से मिल रहे संकेत कतई अच्छे नहीं है। उसका साफ कहना है कि वह रुपए की गिरावट को रोकने के लिए हस्तक्षेप नहीं कर सकता। मतलब यह कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का नुकसान जारी रहेगा और बाजार से भागने की फिराक में लगे रहेंगे। इसलिए बाजार में फिलहाल स्थायित्व आने की गुंजाइश नहीं दिखती है। इस बीच हमारे वाणिज्य सचिव स्वीकार कर चुके है कि निर्यात के आंकड़ों में 9 अरब डॉलरऔरऔर भी

सरकार ने अपने अनुमानों को जमीनी हकीकत से मिलाने की कोशिश की है। उसने अर्थव्यवस्था की छमाही समीक्षा में चालू वित्त वर्ष 2011-12 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के बढ़ने का अनुमान 7.25 फीसदी से 7.50 फीसदी कर दिया है। फरवरी में बजट पेश करते वक्त इसके 9 फीसदी बढ़ने का अनुमान लगाया गया था। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को संसद में देश के आर्थिक हालात की मध्य-वार्षिक समीक्षा पेश की। इस समीक्षा रिपोर्ट मेंऔरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था ने कमजोरी दिखाई है। जीडीपी की विकास दर सुस्त पड़ी है। कॉरपोरेट क्षेत्र के लाभार्जन के अनुमान घटा दिए गए हैं। दुनिया से नकारात्मक खबरें आ रही हैं। और, बाजार में फौरन सुधार की कोई आशा नहीं है। इन सारी बातों के मद्देनज़र अगर मंदड़िए हर बढ़त पर बेच रहे हैं तो उनका ऐसा करना जायज है। मंदड़ियों की यह ताजातरीन उम्मीद भी गलत नहीं कही जा सकती है कि निफ्टी 2700 तक जा सकताऔरऔर भी

रिजर्व बैंक देश के बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त तरलता सुनिश्चित करने के लिए सारे उपाय करेगा। रिजर्व बैंक के गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव ने यह दावा किया है। लेकिन उन्होंने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कटौती की संभावना के बारे में कोई भी टिप्पणी करने के इनकार कर दिया। सुब्बाराव गुरुवार को कोलकाता में रिजर्व बैंक के निदेशक बोर्ड की बैठक के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, “सिस्टम में या कुछ बैंकों के साथऔरऔर भी

भारत में अटकलें चल ही रही हैं कि रिजर्व बैंक सिस्टम में तरलता बढ़ाने की खातिर बैंकों के लिए तय नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कटौती कर सकता है कि चीन के केंद्रीय बैंक ने इससे पहले ही अचानक इस रिजर्व अनुपात (आरआरआर) में कमी कर सारी दुनिया को चौंका दिया। चीन ने दिसंबर 2008 के बाद पहली बार रिजर्व अनुपात में 0.50 फीसदी की कमी की है। बता दें कि चीन भी कम आर्थिक विकास दरऔरऔर भी

देश की आर्थिक विकास दर जून से सितंबर 2011 तक की तिमाही में 6.9 फीसदी रही है। यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में दो सालों से ज्यादा वक्त में किसी भी तिमाही में हुई सबसे कम विकास दर है और लगातार तीसरी तिमाही में 8 फीसदी से नीचे रही है। चिंता की बात यह है कि इस दौरान मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर मात्र 2.7 फीसदी रही है, जबकि खनन क्षेत्र बढ़ने के बजाय 2.9 फीसदी घटऔरऔर भी

आर्थिक हालात पर नजर रखनेवाली देश की निष्पक्ष संस्था, सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) ने चालू वित्त वर्ष 2011-12 के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर का अनुमान घटा दिया है। सीएमआईई के मुताबिक इस साल जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 7.8 फीसदी वृद्धि का अनुमान है। इससे पहले उसने 7.9 फीसदी वृद्धि दर का अनुमान लगाया था। अपनी मासिक रिपोर्ट में सीएमआईई ने कहा है कि विभिन्न सेक्टरों की वृद्धि दर में भारी गिरावट केऔरऔर भी