बाजार में शुरुआती भाव बढ़त की उम्मीद का रहा क्योंकि पिछले दो सत्रों में भारी गिरावट हो चुकी थी। सूचकांक बढ़कर खुले। लेकिन फिर शॉर्ट सौदों की मार शुरू हो गई। बहुत सारे धुर जुआरियों में ट्रेडिंग के दम पर रातोंरात लाखों कमाने की चाहत अब भी जोर मार रही है। इनमें से कुछ लोग बाजार में सुधार आने की उम्मीद में ट्रेड कर रहे हैं तो बहुत से लोग गिरावट पर ही खेलना चाहते हैं। और,औरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था ने कमजोरी दिखाई है। जीडीपी की विकास दर सुस्त पड़ी है। कॉरपोरेट क्षेत्र के लाभार्जन के अनुमान घटा दिए गए हैं। दुनिया से नकारात्मक खबरें आ रही हैं। और, बाजार में फौरन सुधार की कोई आशा नहीं है। इन सारी बातों के मद्देनज़र अगर मंदड़िए हर बढ़त पर बेच रहे हैं तो उनका ऐसा करना जायज है। मंदड़ियों की यह ताजातरीन उम्मीद भी गलत नहीं कही जा सकती है कि निफ्टी 2700 तक जा सकताऔरऔर भी

बाजार में कोई दिशा नहीं नज़र आती। तेजड़िए और मंदड़िए अपने-अपने तीर-कमान और तर्क लेकर भिड़े हुए हैं। मंदड़ियों के पास शॉर्ट सौदे करने की तमाम वजहें हैं। जैसे, अर्थव्यवस्था का कामकाज ठीक नहीं है, जीडीपी घट रहा है, राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है, कंपनियों का लाभार्जन दबाव में है और बराबर डाउनग्रेड हो रहे हैं। इन सबसे ऊपर उनकी पक्की राय है कि निफ्टी 4000 तक गिर सकता है और अगले छह महीनों में बाजार मेंऔरऔर भी

बाजार के पहले आधे घंटे में आया उछाल दमदार नहीं दिखा। बल्कि, लगता है कि यह मंदड़ियों को 5110 पर स्टॉप लॉस का डर दिखाने की कसरत थी। फिर बाजार ने शुरुआती बढ़त छोड़ दी और 5096.55 तक पहुंचने के बाद गिरने लगा। मंदड़ियों ने 5040 के लक्ष्य के साथ 5090 पर फिर से शॉर्ट सौदे करने शुरू कर दिए। दोपहर दो बजे के आसपास बाजार ने फिर पेंग भरी और निफ्टी 5099.25 तक पहुंच गया। लेकिनऔरऔर भी

बाजार 5400 से गिरकर 4750 तक पहुंच गया। फिर अचानक उठकर 5050 के ऊपर। महीने भर में गोते और छलांग का यह खेल बखूबी चला। क्यों, कैसे? समझ में नहीं आता। एफआईआई ने तो पूरे नवंबर माह में 80 करोड़ डॉलर ही निकाले। इतनी रकम तो एक दिन में निकल जाया करती है। फिर ऐसी डुबकी क्यों? सवाल यह भी है कि क्या निफ्टी के पलटकर 5050 के ऊपर पहुंचने को नई तेजी का आगाज़ मान लियाऔरऔर भी

बाजार अचानक कुछ ज्यादा ही उत्साह में है। कल मैंने कहा था कि रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती की घोषणा कर सकता है। आज वही बात कुछ बिजनेल चैनलों व समाचार एजेंसियों ने चला दी। फिर इसे कुछ फंड मैनेजरों ने हवा दे दी। बाजार में चर्चा चल पड़ी कि आज ही बाजार बंद होने के बाद रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती की घोषणा कर सकता है। फिर क्या था! बाजार बढ़ा तो बढ़ता हीऔरऔर भी

आर्थिक रफ्तार के थमने ने कम से कम चीन को इतनी सद्बुद्धि तो दे दी कि उसने बैंकों के लिए निर्धारित कैश रिजर्व अनुपात में कमी कर दी है, जबकि इसकी अपेक्षा भारत में की जा रही थी। अपने यहां तो लगता है कि राजनीति देश और देशवासियों से ज्यादा बड़ी हो गई है। देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) महज 6.9 फीसदी बढ़ा, जो 2009 के न्यूनतम स्तर 5.5 फीसदी के काफी करीब है। ऐसे मेंऔरऔर भी

संसद में छाया राजनीतिक गतिरोध सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को रिटेल में एफडीआई या सिविल एविएशन को विदेशी एयरलाइंस के लिए खोलने जैसे बड़े फैसले नहीं लेने देगा। अभी तक इस सेटलमेंट में इन दोनों ही सेक्टरों के स्टॉक्स काफी ज्यादा खरीदे जा चुके हैं। अब वे कैश सेटलमेंट के नए शिकार हैं। इसलिए इनमें खरीद करते वक्त काफी सावधान रहने की जरूरत है। पिछले सेटलमेंट में मैंने आपको डिश टीवी के बारे में जो बताया था, वोऔरऔर भी

शुक्रवार को डर था कि आज कहीं काला सोमवार न हो जाए। लेकिन आज तो पूरा परिदृश्य ही बदला हुआ था क्योंकि इटली के अखबार में छपी एक खबर के मुताबिक आईएफएम ने कह दिया कि इटली को संकट से निकालने के लिए वो वित्तीय मदद देने को तैयार है। हालांकि बाद में आईएमएफ के प्रवक्ता ने इसका खंडन कर दिया। खैर, इस दरम्यान हमारे उस्ताद लोग इसे यूरोप के संकट में राहत बताकर बाजार को चढ़ानेऔरऔर भी

सेटलमेट का पहला दिन और इससे ज्यादा सन्निपात से भरा कोई और दिन हो ही नहीं सकता था। वोलैटिलिटी को दिखानेवाला इंडिया वीआईएक्स 4.18 फीसदी बढ़कर 29.12 पर जा पहुंचा। निफ्टी ऊपर में 4767.30 तक तो नीचे में 4693.10 तक। सांसें इतनी ऊपर-नीचे! हालांकि बाजार में थोड़ी-बहुत खरीद चालू हो चुकी है। फिर भी बाजार के उस्तादों ने बीते सेटलमेंट में जो गोटें सेट की हैं, उनके हिसाब से दिसंबर तक की लंबी अवधि के पचड़े मेंऔरऔर भी