ये सट्टेबाजी नहीं, विशुद्ध जुएबाजी है

संसद में छाया राजनीतिक गतिरोध सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को रिटेल में एफडीआई या सिविल एविएशन को विदेशी एयरलाइंस के लिए खोलने जैसे बड़े फैसले नहीं लेने देगा। अभी तक इस सेटलमेंट में इन दोनों ही सेक्टरों के स्टॉक्स काफी ज्यादा खरीदे जा चुके हैं। अब वे कैश सेटलमेंट के नए शिकार हैं। इसलिए इनमें खरीद करते वक्त काफी सावधान रहने की जरूरत है। पिछले सेटलमेंट में मैंने आपको डिश टीवी के बारे में जो बताया था, वो सही साबित हो गया। खबर के जोश में यह 70 रुपए तक चढ़ तो गया। लेकिन खटाक से टूटकर 58 रुपए पर आ गया। अब इसमें जो लोग 70 रुपए पर लांग हुए पड़े थे, उनसे इस सेटलमेंट में 12 रुपए का अंतर कैश वसूल लिया गया। अब यह फिर से 70 रुपए के करीब 68.10 रुपए तक जा चुका है।

जैसा कि मैंने कल ही कहा था कि कल का उछाल तकनीकी उछाल था और उसके पीछे बहुत कम वोल्यूम था। आज भी संकेत यही हैं कि पहले की गई केंद्रित खरीद को फैलाया जा रहा है। बाजार प्री-ओपन सत्र में कमजोरी के साथ खुला तो ट्रेडर शॉर्ट हो गए। फिर दोपहर होते-होते यह कल के बंद स्तर के पार चला गया तो ट्रेडरों को अपने शॉर्ट सौदे काटने पड़े और वे लांग हो गए। लेकिन तभी दे दनादन उनकी ठुकाई चालू हो गई। और, खल्लास! ट्रेडरों को भाई लोगों ने बड़ी बेरहमी से खल्लास कर डाला। आखिकार निफ्टी 0.95 फीसदी गिरकर 4805.10 और सेंसेक्स 0.98 फीसदी गिरकर 16,008.34 पर बंद हुआ।

यह हमारे कैश सेटलमेंट सिस्टम सबसे बड़ी खामी है। इसमें किसी को ठोंकने के लिए आपको शेयरों की नहीं, सिर्फ और सिर्फ नोटों की ताकत, धनबल की जरूरत होती है। यह सट्टेबाजी नहीं, शुद्ध जुएबाजी है। सट्टेबाजी में फैसले लेने के लिए हुनर, प्रतिभा और जानकारी की जरूरत होती है, जबकि जुएबाजी में ज्यादा से ज्यादा ऐसे मूर्खों की दरकार है जो खुद को जुएबाज मानने का गुरूर पाले रहते हैं। दिक्कत यह है जो तंत्र व नियामक सुधारों की बात करता है, रिटेल निवेशकों को वापस बाजार में लाने की बात करता है, भविष्य निधि व कर्मचारी राज्य बीमा निगम का धन पूंजी बाजार की तरफ मोड़ने की बात कहता है, वही उस व्यवस्था का समर्थन कर रहा है जहां सट्टेबाजी को नहीं, जुएबाजी को प्राथमिकता दी जाती है। यकीनन, एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशक) हमारे बाजार के सबसे बड़े जुएबाज हैं क्योंकि उनके पास नोटों का जखीरा है और वे बाजार को अपने हिसाब से नचा सकते हैं। इसलिए वे सट्टेबाजी के पक्ष में नहीं हैं।

ये पूरी तरह मेरे निजी विचार हैं और मैं किसी पर तोहमत नहीं मढ़ना चाहता। मेरा मकसद सिर्फ यह है कि आपको बाजार की अतिशय सन्निपाती अवस्था या वोलैटिलिटी से बचाया जा सके जो मेरे ख्याल से ऊपर गिनाए कारकों से पैदा होती है। जब हमने निवेशकों से कल घोषित होनेवाले जुलाई-सितंबर के जीडीपी के कमजोर आंकड़े की संभावना के बारे में बात की कि बड़े मजे में उन्होंने जवाब दिया कि बाजार इसके असर को पूरी तरह जज्ब कर चुका है। लेकिन यूरोप व अमेरिका के हालात का असर भी बाजार समेट चुका है। फिर भी इनका इस्तेमाल तूफान मचाने के लिए किया जाता है। इसलिए मेरा कहना है कि हाल-फिलहाल जहां तक संभव हो, ट्रेडिंग से बचें। अगर ऐसा संभव नहीं है तो हर मजबूत लांग पोजिशन को कमजोर शॉर्ट पोजिशन के साथ हेज करते हुए चलें।

खैर, मेरा मानना है कि कल जीडीपी के आंकड़े बाजार को पलीता लगा सकते हैं। इसलिए निफ्टी के फिर से 4650 तक जाने के लिए तैयार रहें। अगर यह 4620 का स्तर तोड़ देता है तो फिर 4550 की नई तलहटी पकड़ सकता है। लेकिन खुदा-न-खास्ता जीडीपी का आंकड़ा अगर 7.30 फीसदी के ऊपर चला गया तो अपनी सारी शॉर्ट पोजिशन काट डालिएगा क्योंकि तब निफ्टी फौरन 5000 के ऊपर जा सकता है।

मेटल सेक्टर, चुनिंदा ऑटो शेयरों (खबर आधारित) व हिंद ऑयल जैसे स्टॉक्स में लांग बने रहें क्योंकि ब्याज दरों में कटौती होने जा रही है। वहीं, सिविल एविएशन, रिटेल, एफएमसीजी फार्मा व कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में शॉर्ट रहना इस समय ज्यादा मुनासिब होगा।

हम अक्सर भूल जाया करते हैं कि खुशी उन चीजों को पाने से नहीं आती जो हमारे पास नहीं हैं, बल्कि उन चीजों की अहमियत समझने से आती है जो हमारे पास पहले से हैं।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं पड़ना चाहता। इसलिए अनाम है। वह अंदर की बातें आपके सामने रखता है। लेकिन उसमें बड़बोलापन हो सकता है। आपके निवेश फैसलों के लिए अर्थकाम किसी भी हाल में जिम्मेदार नहीं होगा। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का कॉलम है, जिसे हम यहां आपकी शिक्षा के लिए पेश कर रहे हैं)

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