बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने हिमाचल फ्यूचरिस्टिक कम्युनिकेशंस (एचएफसीएल) को बीएसई-500 और बीएसई स्मॉल-कैप सूचकांक से निकाल बाहर किया है। लेकिन खुद को ज्यादा तेजतर्रार व प्रोफेशनल बतानेवाले नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने इस कंपनी को अब भी एस एंड पी सीएनएक्स-500 जैसे सम्मानित सूचकांक में शामिल कर रखा है, जबकि करीब दो हफ्ते पहले उसे उसकी इस ‘लापरवाही’ की सूचना मीडिया की तरफ से दी जा चुकी है। हालांकि एनएसई ने तब इस बाबत पूछे गए सवालऔरऔर भी

बाजार जब तलहटी पर पहुंचा हो तब अच्छे स्टॉक्स के चयन के लिए ज्यादा मगजमारी या रिसर्च की जरूरत नहीं होती। नजर डालें कि कौन-कौन से शेयर अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंचे हैं। देखें कि वह कंपनी कितनी जानी पहचानी है, थोड़ा-सा उसका धंधा-पानी देख लें और दांव लगा दें। कल अनिल अंबानी समूह की दो प्रमुख कंपनियां रिलायंस कैपिटल और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर 52 हफ्ते के न्यूनतर स्तर पर पहुंच गईं। इनमें से रिलायंस कैपिटल में निवेशऔरऔर भी

जब हर तरफ कोहराम मचा हो, सेंसेक्स 18,000 के अंक के नीचे तक डुबकी लगा रहा हो, तब भी कोई स्टॉक चमक जाए तो समझिए कि उसमें दमखम जरूर होगा। नाल्को (नेशनल एल्यूमीनियम कंपनी लिमिटेड) का शेयर कल बीएसई (कोड – 532234) में 2.09 फीसदी और एनएसई में (कोड – NATIONALUM) में 2.28 फीसदी बढ़ा है। नाल्को बीएसई-100 सूचकांक में शामिल है। वैसे, कल सेंसेक्स के 30 शेयरों में से जो तीन शेयर बढ़े हैं, उनमें सेऔरऔर भी

आखिरकार सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा अभियान चलाती हुई दिख रही है। आदर्श सोसायटी घोटाले से जुड़े लोगों पर छापे मारे जा रहे हैं। पीडीएस में धांधली करनेवालों, कर अपवंचकों और मंत्रालयों को रिश्वत देकर काम करानेवाली कंपनियों के खिलाफ कड़ाई बरती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट और सीएजी भी बहुत सारे मसलों पर साफ-सफाई के लिए आगे बढ़कर पहल कर रहे हैं। खबरों के मुताबिक सीएजी ने रिलायंस व मुरली देवड़ा तक पर उंगली उठा दीऔरऔर भी

कितनी अजीब बात है कि हम आम डिस्काउंट सेल में तो सपरिवार दौड़े चले जाते हैं। लेकिन जब शेयर बाजार में डिस्काउंट पर माल मिल रहा हो तो उसकी तरफ झांकते ही नहीं। उलटे डरे रहते हैं कि गिरा हुआ स्टॉक है, जरूर कोई गड़बड़ होगी। हां, वही शेयर जब बढ़ जाता है तो जरूर पछताते हैं कि यह लड्डू हमसे छूट क्यों गया। ऐसा ही एक लड्डू है एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड। रेटिंग एजेंसी केयर कीऔरऔर भी

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने आज 1 फरवरी से स्टॉक फ्यूचर्स व ऑप्शंस में डिलीवरी आधारित ट्रेडिंग शुरू करने का फैसला किया है। इसका सीधा-सा मतलब है कि एक्सचेंज ने स्टॉक्स डेरिवेटिव सौदों में फिजिकल सेटलमेंट की व्यवस्था लागू कर दी है। बता दें कि पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने 15 जुलाई 2010 को ही एक सर्कुलर जारी कर स्टॉक एक्सचेंजों को डेरिवेटिव सौदों में फिजिकल सेटलमेंट की व्यवस्था लागू करने की इजाजत दे रखी है।औरऔर भी

ज़ेनसार टेक्नोलॉजीज आरपीजी समूह की आईटी सलाह व सॉफ्टवेयर और बीपीओ सेवाओं से जुड़ी कंपनी है। कंपनी के चेयरमैन हर्ष गोयनका हैं। लेकिन उसका प्रबंधन वाइस चेयरमैन व सीईओ गणेश नटराजन के नेतृत्व में बनी बारह सदस्यों की टीम देखती है। इसके नीचे ग्यारह सदस्यों की प्रबंधन परिषद है। कंपनी ने अलग-अलग उद्योगों को दी जा रही सेवाओं के मुताबिक अपने कामकाज को पांच वर्टिकल सेगमेंट में बांटा है। नए वर्टिकल अप्रैल 2011 से काम करना शुरूऔरऔर भी

यूटीवी सॉफ्टवेयर कम्युनिकेशंस में कल अचानक बीएसई (कोड – 532619) में औसत से छह गुना ज्यादा 49,699 शेयरों का कारोबार हुआ। हालांकि इसमें से 16.99 फीसदी ही डिलीवरी के लिए थे। इसी तरह एनएसई (कोड – UTVSOF) में हुआ कारोबार 1,39,994 शेयरों का रहा जिसमें से 21.56 फीसदी डिलीवरी के लिए थे। हालांकि कंपनी ने कल ही दिसंबर 2010 तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं। लेकिन शेयरों में बढ़े वोल्यूम से एक बात साफ होती है किऔरऔर भी

बायोकॉन लिमिटेड दवा व्यवसाय से ज्यादा अपनी चेयरमैन व प्रबंध निदेशक किरण मजुमदार शॉ के नाम से जानी जाती है। बीते शुक्रवार, 21 जनवरी को उन्होंने बैंगलोर में कंपनी के दिसंबर 2010 तिमाही के नतीजे पेश करते हुए कहा था, “बायोकॉन ने अब तक का सबसे ज्यादा कर-बाद लाभ घोषित किया है और यह 100 करोड़ के पार चला गया है। कंपनी का परिचालन लाभ मार्जिन भी इस तिमाही में 24 फीसदी बढ़ गया है। यह हमारेऔरऔर भी

कोई भी कंपनी आज क्या है, निवेश के लिए इससे ज्यादा अहम होता है कि उसके भावी विकास का ग्राफ कहां जाता दिख रहा है। जब तक आपको कंपनी समझ में नहीं आ जाती, उसकी मजबूती और भावी विकास के बारे में आप आश्वस्त नहीं हो जाते, तब तक कतई निवेश न करे। आखिर आपकी गाढ़ी कमाई कहीं भागी तो नहीं जा रही। बस यह है कि अभी बैंक उसका फायदा उठा रहा है। आप समझदार होऔरऔर भी