बैक्टीरिया व वायरस हर तरफ फैले रहते हैं। लेकिन जिनके शरीर का एम्यून सिस्टम या प्रतिरोध तंत्र मजूबत रहता है, उनका ये कुछ नहीं बिगाड़ पाते। हां, उनके भी शरीर को बैक्टीरिया व वायरस से बराबर युद्धरत रहना पड़ता है। इसी तरह कंपनियों को भी बराबर बदलते हालात व समस्याओं से दो-चार होना ही पड़ता है। प्रबंधन तंत्र दुरुस्त हो, नेतृत्व दक्ष हो तो कंपनी हर समस्या के बाद और निखरकर सामने आती है, जबकि प्रबंधन तंत्रऔरऔर भी

एक्जिट पोल बता रहे हैं कि उत्तर प्रदेश चुनाव में बाजी समाजवादी पार्टी के हाथ लगेगी। एशियाई बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है। इन दोनों ही घटनाओं का बाजार पर थोड़ा असर हुआ। यूं तो समाजवादी पार्टी ने कहा है कि उसे कांग्रेस के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन यह सब राजनीतिक शोशेबाज़ी है। अगर वो 200 सीटों तक नहीं पहुंच पाती तो उसका काम कांग्रेस के बगैर नहीं चल सकता। वैसे भी एक्जिट पोलऔरऔर भी

चक्र का चक्कर प्रकृति में ही नहीं, शेयर बाजार में भी चलता है। बाजार सीधे नहीं भागता, बल्कि चक्रों में चलता है। जो उठा है, वो और उठने से पहले गिरेगा जरूर। इसे ही करेक्शन कहते हैं। इसी तरह कंपनी अगर मजबूत है और बढ़ रही है तो उसका गिरा हुआ शेयर जरूर बढ़ता है। हां, कंपनी ही अगर डूब रही है तो उसके शेयर को अंततः डूब जाने से ऑपरेटर भी नहीं बचा सकते। इसीलिए जिसऔरऔर भी

नहीं पता क्यों, बाजार शनिवार को भी 11 बजे से 1 बजे तक दो घंटे के लिए खोला गया। यह ट्रेडिंग क्यों हुई? इसका कोई स्पष्ट कारण पता नही लग सका। हां, निवेशक संस्थाओं के अभाव में बाजार एकदम लस्त-पस्त रहा। एफआईआई ने 13.87 करोड़ की खरीद की तो 23.37 करोड़ रुपए की बिकवाली। वहीं डीआईआई की खरीद 5.46 करोड़ और बिक्री 10.33 करोड़ रुपए की रही। निफ्टी फ्यूचर्स का आखिरी भाव 5399 का रहा है, जबऔरऔर भी

ओएनजीसी का इश्यू भले ही पूरा सब्सक्राइब हो गया हो, लेकिन यह साफ तौर पर कई मोर्चों पर नाकाम रहा है। एक यह कि जिन एफआईआई को सरकार भारतीय शेयर बाजार का खुदा मानती है, उन्होंने 290 रुपए पर ओएनजीसी के प्रति कोई भरोसा नहीं जताया। वही एफआईआई, अगर सेंसेक्स 20,000 के ऊपर पहुंच जाए तो ओएनजीसी को 350 रुपए के मूल्य पर भी हाथोंहाथ ले लेंगे। लेकिन सच यही है कि उन्होंने सरकार की पेशकश परऔरऔर भी

जैसी कि उम्मीद थी, निफ्टी फ्यूचर्स गिरते-गिरते 5341 तक चला गया जो सोमवार की भारी गिरावट की तलहटी, 5326 से बस थोड़ा ही ऊपर है। आज का न्यूनतम स्तर उससे ऊंचा 5341 का रहा और यहां से 5277 अब भी काफी दूर है। इसने आज 5400 तक लोगों को शॉर्ट करने के लिए भी उकसाया और बंद हुआ 5381.65 पर। अगर कल यह 5427 को पार कर लेता है तो निश्चित रूप से 5500 के पार जानेऔरऔर भी

बात एकदम सीधी है। जो भी शेयर बाजार में निवेश नहीं करते, वे भारत की विकासगाथा के लाभ से वंचित है। लेकिन आश्चर्यजनक, किंतु सत्य यह है कि देश की 121 करोड़ की आबादी में से कम से कम 120 करोड़ लोग इस लाभ से वंचित हैं, जबकि ठीकठाक कमानेवाले भारतीय मध्य वर्ग की ही आबादी 15 करोड़ से ज्यादा है। सबको साथ लेनेवाले कौन-से समावेशी विकास की बात करती यह सरकार? देश की विकासगाथा को व्यापकऔरऔर भी

निफ्टी व सेंसेक्स भले ही थोड़ा बढ़कर बंद हुए हों, लेकिन बाजार में घबराहट का आलम अब भी बना हुआ है। मुझे तो दिसंबर तिमाही में जीडीपी की 6.1 फीसदी वृद्धि भी जमी नहीं। लगता है कि आंकड़ों में कुछ इधर का उधर हुआ है। निफ्टी फ्यूचर्स आज 5515.95 तक चला गया जो हमारे स्टॉप लॉस 5487 से ऊपर था। लेकिन वह खुद को वहां टिका नहीं सका। अंततः 5435 पर बंद हुआ। बाजार के खिलाड़ी निफ्टीऔरऔर भी

सुप्रजीत इंजीनियरिंग है तो स्मॉल कैप कंपनी। इक्विटी 12 करोड़ रुपए है और बाजार पूंजीकरण 240 करोड़ रुपए के आसपास। लेकिन देश में वाहनों के केबल बनानेवाली सबसे बड़ी कंपनी है। वह गाड़ियों के स्पीडोमीटर भी बनाती है। कंपनी के तार विदेश तक फैले हैं। करीब छह साल पहले 2006 में इसने एक ब्रिटिश कंपनी गिल्स केबल्स का अधिग्रहण किया था जिसका नाम अब सुप्रजीत यूरोप लिमिटेड कर दिया गया है। घरेलू बाजार की मांग को पूराऔरऔर भी

फरवरी सेटलमेंट में बाजार बराबर बढ़ता रहा, जबकि पेट्रोल व डीजल की मूल्यवृद्धि और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की चिंता से हर कोई वाकिफ था। ट्रेडर निफ्टी के 5200 से 5600 तक पहुंचने तक लगातार शॉर्ट करते रहे। फिर आखिरकार उन्होंने हथियार डाल दिया और बाजार धड़ाम हो गया। लगातार चार दिनों तक बाजार गिरता रहा। कल की गिरावट पिछले छह महीनों की सबसे तगड़ी गिरावट थी। इसने न केवल सारे लांग सौदों पर पूर्णविराम लगाऔरऔर भी