हर तरफ धांधली, कार्टेल ही कार्टेल

ओएनजीसी का इश्यू भले ही पूरा सब्सक्राइब हो गया हो, लेकिन यह साफ तौर पर कई मोर्चों पर नाकाम रहा है। एक यह कि जिन एफआईआई को सरकार भारतीय शेयर बाजार का खुदा मानती है, उन्होंने 290 रुपए पर ओएनजीसी के प्रति कोई भरोसा नहीं जताया। वही एफआईआई, अगर सेंसेक्स 20,000 के ऊपर पहुंच जाए तो ओएनजीसी को 350 रुपए के मूल्य पर भी हाथोंहाथ ले लेंगे। लेकिन सच यही है कि उन्होंने सरकार की पेशकश पर बेहद कमजोर रुख दिखाया है।

दो, इस इश्यू में रिटेल निवेशकों को एकदम नजरअंदाज किया गया। तीन, सरकार अपने इस कहे से मुकर गई कि व्यापक भागीदारी के सिद्धांत पर अमल करते हुए निवेश के अवसरों को रिटेल निवेशकों तक पहुंचा जाएगा। इससे सरकार के अब तक के सारे किए-धरे पर पानी फिर गया है। चार, यह इश्यू महज खाते में यहां की एंट्री वहां डालने जैसा है। अब एलआईसी ओएनजीसी में सबसे बड़ा बिकवाल बन जाएगा। मुझे पक्का यकीन है कि एफआईआई इस स्टॉक को अब डाउनग्रेड करेंगे। इसका बाजार भाव गिराकर 220 रुपए पर ले आएंगे और एलआईसी घाटे पर बेचने के लिए बाध्य हो जाएगा। यह एलआईसी की ही नहीं, निवेशकों की निधि का नुकसान है। रात 11 बजे तक सही आंकड़ों को छिपाए रखना। फिर सफाई देना कि छह घंटे तक सर्वर डाउन था। यह सारी कवायत किसी के भी गले नहीं उतरती।

कोल इंडिया के अलावा किसी भी आईपीओ ओर सार्वजनिक उपक्रमों के एफपीओ ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न नहीं दिया है। यह साफ-साफ साबित करता है कि हमारी समूची विनिवेश नीति में कहीं न कहीं बुनियादी खोट है। याद कीजिए, 1998 तक भारतीय बाजार ने कभी भी बढ़त नहीं दिखाई क्योंकि उस दौरान यूटीआई बराबर बिकवाल बना रहा। इसी तरह अब लगता है कि ओएनजीसी कभी भी तेजी नहीं पकड़ेगा क्योंकि एलआईसी इसमें हमेशा बिकवाल बना रहेगा।

दुर्भाग्य है कि भारत और भारतीय हर स्तर पर भ्रष्टाचार, धांधली व गलत कामों को पसंद करने लगे हैं। कर के दायरे में आनेवाले कर न देने के रास्ते खोजते हैं। निजी क्षेत्र के कारोबारी एक्साइज ड्यूटी देने से कतराते हैं। सरकार सच्चे अवाम को मदद न देकर खुश है। शेयर बाजार किसी भी तरीके से निवेशकों को मदद न करके खुश है। हर तरफ, हर जगह कार्टेल काम कर रहे हैं। आए दिन पड़ते आयकर के छापों को देख लीजिए। लेकिन कोई भी कंपनी साफ-सुथरे खाते नहीं पेश करती। लिस्टेड कंपनियां अच्छे गवर्नेंस के मानकों को तोड़ने में लगी हैं। कानून बनानेवाले निवेशकों की पूंजी को संरक्षण न देकर प्रसन्न हैं।

पुराना बदला सिस्टम मौजूदा डेरिवेटिव प्रणाली से सौ गुना बेहतर था। आज की डेरिवेटिव व्यवस्था पूरी तरह एफआईआई व ऑपरेटरों के नियंत्रण में है। निवेशकों को संदेश दिया गया कि वे म्यूचुअल फंड का माध्यम अपनाएं। लेकिन कोई भी म्यूचुअफ फंड धनात्मक रिटर्न नहीं दे रहा। केवल बाजार के उस्ताद लोग ए ग्रुप के करीब 200 स्टॉक्स के भावों में जोड़तोड़ करके हर महीने 30 फीसदी रिटर्न कमा रहे हैं। उन पर कोई नियम-कायदा काम नहीं करता। आप एफ एंड ओ सेगमेंट के किसी स्टॉक को 50 फीसदी उठा ले जाइए। कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा। लेकिन बी ग्रुप के शेयर को 5 फीसदी भी बढ़ा दीजिए तो उसे ट्रेड टू ट्रेड में डाला जा सकता है।

मुझे तो लगता कि जुएबाजी अब हमारे खून तक में घुस चुकी है। एक महिला एनालिस्ट ने मुझसे एक स्टॉक का जिक्र किया और पूछा कि फंडामेंटल स्तर पर इतना अच्छा स्टॉक चल क्यों नहीं रहा? मैं उससे कहा कि यहां परवाह किसको है? मैं एक स्टॉक को जानता हूं जो 200 रुपए से बढ़ता-बढ़ता 800 रुपए पर आ चुका है, जबकि उसकी औकात 100 रुपए की भी नहीं है। बहुत जल्दी ही इसे एफ एंड ओ सेगमेंट में ले लिया जाएगा और सारी दुनिया इस स्टॉक को खरीदने में जुट जाएगी। हमारे भारत में इस तरह काम हो रहा है! मुझे तो लगता है कि इन सारी बातों के आधार पर शानदार मूवी बनाई जा सकती है।

खैर! मन बड़ा दुखी है। मेरे पास आज के बाजार के बारे में लिखने को कुछ नहीं है। निफ्टी ने ऊपर से नीचे तक 77.5 अंकों की पेंग मारी है। यह इसी तरफ आगे-पीछे ट्रेडरों को नचाता हुआ फायदे और नुकसान के बीच थकाऊ अंदाज में झूलता रहेगा। निफ्टी के 5277 पर पहुंचने पर बाजार का रुख पलटेगा। ऐसा मंगलवार, 6 मार्च को उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने पर हो सकता है। ऊपर की बात करें तो 5440 और फिर 5540 रुख बदलने के मुकाम बन सकते हैं।

जब भी कोई इंसान परले दर्जे की मूर्खता करता है तो उसकी नीयत हमेशा बड़ी उम्दा होती है।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं पड़ना चाहता। इसलिए अनाम है। वह अंदर की बातें आपके सामने रखता है। लेकिन उसमें बड़बोलापन हो सकता है। आपके निवेश फैसलों के लिए अर्थकाम किसी भी हाल में जिम्मेदार नहीं होगा। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का कॉलम है, जिसे हम यहां आपकी शिक्षा के लिए पेश कर रहे हैं)

2 Comments

  1. DEAR SIR

    APP DHUKHI HAI SIR AGAR APP 5800 KI BAT NAHI KARTE TO ACHAA HAI BAT KARIYE 5050

  2. kya aap GRAVITA INDIA ki baat kar rahe hain 😉 ???

    God Bless !!!

    Regards,
    Shishir

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