इस बार रिजर्व बैंक से ₹2,86,588 करोड़ का रिकॉर्ड लाभांश वसूल करने में मोदी सरकार ने हद दर्जे की चालाकी बरतते हुए देश की आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। यह फैसला वैसे तो रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में उसके केंद्रीय बोर्ड ने लिया है। लेकिन सारा देश जानता है कि मोदी सरकार ने रिजर्व बैंक से लेकर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट तक में शीर्ष पदों पर अपने पिट्ठू बैठा रखे हैं। बता दें कि रिजर्व बैंक आरबीआई एक्ट, 1934 के सेक्शन-47 के तहत रिस्क के लिए सही प्रावधान और उचित लाभांश का फैसला करता है। मोदी सरकार ने दिसंबर 2018 में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति बनाई थी। अगस्त 2019 में इस समिति की रिपोर्ट आने के बाद से ही रिजर्व बैंक के खजाने की सरकारी लूट शुरू हो गई। समिति ने कहा था कि रिजर्व बैंक बराबर एक कंटिन्जेंट रिस्क बफर (सीआरबी) बनाए रखे जिसकी रकम उसकी बैलेंस शीट के 5.5% से 6.5% तक रहे। रिजर्व बैंक ने पिछले साल यह रेंज बदलकर 4.5% से 7.5% कर दी। वित्त वर्ष 2024-25 में रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट का 7.50% हिस्सा सीआरबी में डाला गया। लेकिन इस साल पश्चिम एशिया संकट और रुपए पर दबाब की आपदा के बीच भी सरकार को ज्यादा लाभांश देने के लिए इसे घटाकर 6.5% कर दिया गया। अब बुधवार की बुद्धि…
यह कॉलम सब्सक्राइब करनेवाले पाठकों के लिए है.
'ट्रेडिंग-बुद्ध' अर्थकाम की प्रीमियम-सेवा का हिस्सा है। इसमें शेयर बाज़ार/निफ्टी की दशा-दिशा के साथ हर कारोबारी दिन ट्रेडिंग के लिए तीन शेयर अभ्यास और एक शेयर पूरी गणना के साथ पेश किया जाता है। यह टिप्स नहीं, बल्कि स्टॉक के चयन में मदद करने की सेवा है। इसमें इंट्रा-डे नहीं, बल्कि स्विंग ट्रेड (3-5 दिन), मोमेंटम ट्रेड (10-15 दिन) या पोजिशन ट्रेड (2-3 माह) के जरिए 5-10 फीसदी कमाने की सलाह होती है। साथ में रविवार को बाज़ार के बंद रहने पर 'तथास्तु' के अंतर्गत हम अलग से किसी एक कंपनी में लंबे समय (एक साल से 5 साल) के निवेश की विस्तृत सलाह देते हैं।
इस कॉलम को पूरा पढ़ने के लिए आपको यह सेवा सब्सक्राइब करनी होगी। सब्सक्राइब करने से पहले शर्तें और प्लान व भुगतान के तरीके पढ़ लें। या, सीधे यहां जाइए।
अगर आप मौजूदा सब्सक्राइबर हैं तो यहां लॉगिन करें...
