शेयर बाजार या किसी खास शेयर में बढ़त के दो ही आधार होते हैं। एक, अर्थव्यवस्था या कंपनी के मजबूत होते फंडामेंटल। दो, बढ़ी हुई तरलता, यानी खरीदने के लिए ज्यादा रकम का आना। इस साल जनवरी से लेकर अब तक चली तेजी की बड़ी वजह है विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा किया गया 7.03 अरब डॉलर (34,900.80 करोड़ रुपए) का शुद्ध निवेश। सेबी के मुताबिक इसमें से केवल फरवरी में किया गया निवेश 4.96 अरब डॉलरऔरऔर भी

सेंसेक्स आज एक ही झटके में 540 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया, जबकि पिछले हफ्ते वह 600 अंकों का धक्का पहले ही सह चुका था। निफ्टी भी 160 से ज्यादा अंक गिरकर 5268.15 तक पहुंच गया। व्यवस्थागत खामी के आई इस जबरदस्त गिरावट ने ट्रेडरों की हालत खराब कर दी है। इसने निस्संदेह रूप से साबित कर दिया है कि बाजार को फंडामेंटल्स के विरुद्ध जाकर जबरदस्ती चढ़ाया गया था और अब नीचे लाया जाऔरऔर भी

चुटकी भर टिप्स, मुठ्ठी भर मंत्र। यही अपना मूल मकसद है। टिप्स तो बहाना है, असली काम तो आपको बताना है शेयर बाजार ही नहीं, पूरे वित्तीय बाज़ार की बारीकियों के बारे में ताकि कोई आपको झांसा न दे सके और आप अपने फैसले खुद ले सकें। ऐसे में हर बड़ी खबर या घटना का इस्तेमाल हमें जानने-समझने के मौके के रूप में करना चाहिए। शनिवार को वेदांत समूह ने अपनी एक कंपनी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को दूसरीऔरऔर भी

फरवरी में बड़ा कुछ नहीं हुआ तो ऑपरेटरों ने इसका फायदा उठाकर निफ्टी को पिछले सेटलमेंट से खींचकर 5650 तक पहुंचा दिया। अब बहुप्रतीक्षित करेक्शन आना शुरू हुआ है तो यह सारे उम्मीदों को तोड़ता हुआ 5500, 5400, 5300 से 5200 की तरफ लिए जा रहा है। आखिरी दो दिनों में तेजड़ियों ने हाथ खड़े कर दिए। लांग सौदों का मामूली रोलओवर हुआ। जो थोड़े-बहुत रोल्स हुए, वे कैश व डेरिवेटिव सेगमेंट में ऑर्बिट्रेज का नतीजा हैंऔरऔर भी

बाजार के उस्तादों को जो चाहिए था, आखिरकार उन्हें मिल गया। किसी को बिना कोई चेतावनी दिए, बिना कोई मौका दिए बाजार 600 अंक गिर चुका है जो अपने-आप में अच्छा करेक्शन है। मेरे बहुत-से दोस्त भ्रमित हो गए हैं और बेचनेवालों के खेमे में चले गए। लेकिन मैं अब भी लांग करनेवालों के खेमे में हूं। मेरा मानना है कि बाजार का रुझान तभी पटलेगा जब निफ्टी 5274 के नीचे पहुंच जाएगा। इसलिए तब तक होऔरऔर भी

जिस तरह गहरा पानी शांत बहता है, कम गहरा पानी थोड़ा ज्यादा और ज्यादा छिछला पानी कुछ ज्यादा ही उछलता है, उसी तरह का हाल शेयर बाजार में लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप स्टॉक्स का रहता है। यह बाजार का ऐसा स्वभाव है जिसे हम बदल नहीं सकते। समझदारी इसी में है कि इसी स्वभाव के मद्देनज़र निवेश और रिटर्न का हिसाब-किताब बैठाया जाए। इसी से फैसला किया जाए कि कहां लंबे समय का निवेशऔरऔर भी

महज 300 अंकों की मोटामोटी गिरावट ने ट्रेडरों की पैंट ढीली कर दी क्योंकि उन्हें ऑपरेटरों की पकड़वाले चंचल स्टॉक्स में अंदाज़ से कहीं ज्यादा मार्क टू मार्केट ढीला करना पड़ा। ऐसा होना ही था। ट्रेडर अब बैलेंसशीट के लिहाज से वापस निफ्टी के 5000 या 4700 वाले स्तर पर जा पहुंचे हैं। ऐसा एकदम योजनाबद्ध तरीके से किया गया है। हम इस दौरान बराबर चौकन्ने रहे क्योंकि 5400 के ऊपर की रैली पूरी तरह जोड़तोड़ काऔरऔर भी

एसआरएफ लिमिटेड भारतीय कॉरपोरेट जगत के मशहूर नाम भरतराम से जुड़े दिल्ली के डीसीएम समूह से ताल्लुक रखती है। करीब चार दशकों से केमिकल्स, इंजीनियरिंग प्लास्टिक, पैकेजिंग फिल्म और टेक्निकल टेक्सटाइल्स के धंधे में सक्रिय है। टेक्निकल टेक्सटाइल्स में टायर कॉर्ड, बेल्टिंग फैब्रिक, कोटेड फैब्रिक, लैमिनेटेड फैब्रिक व औद्योगिक यार्न बनाती है तो केमिकल्स में वह फ्लूरो केमिकल्स व फ्लूरो स्पेशयलिटीज बनाती है जो रेफ्रिजरेशन में इस्तेमाल होते हैं। कंपनी के उत्पादन संयंत्रों का जाल हरियाणा, राजस्थान,औरऔर भी

आज नहीं तो कल इसे होना ही था और आज यह हो गया। 1.33 बजे तक निफ्टी कल से महज दो अंक नीचे था। लेकिन फिर अगले दो घंटे में 102 अंक टूट गया। 40 फीसदी रोलओवर हुए और ऑपरेटरों ने बाजार पर जमकर चोट की। निफ्टी अंत में 1.82 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 5505.35 पर बंद हुआ। कल खत्म हो रहे सेटलमेंट के निफ्टी फ्यूचर्स का आखिरी भाव भी इसी के आसपास 5518.10 रहा।औरऔर भी

प्राइमरी बाजार ही वह चौराहा है, वो दहलीज है, जहां निवेशक पहली बार कंपनी से सीधे टकराता है। प्रवर्तक पब्लिक इश्यू (आईपीओ या एफपीओ) के जरिए निवेशकों के सामने अपने जोखिम में हिस्सेदारी की पेशकश करते हैं। निवेशक खुद तय करके अपने हिस्से की पूंजी दे देता है। फिर कंपनी सारी पूंजी जुटाकर अपने रस्ते चली जाती है और निवेशक अपने रस्ते। निवेशक की पूंजी चलती रही, कहीं फंसे नहीं, तरलता बनी रहे, कंपनी के कामकाज़ कोऔरऔर भी