वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने शुक्रवार को कहा कि पेट्रोल की कीमतों में हाल की वृद्धि का मुद्रास्फीति पर कुछ असर पड़ेगा। सकल मुद्रास्फीति दहाई अंक के करीब पहंच चुकी है। उन्होंने राजधानी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि निश्चित रूप से मुद्रास्फीति पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा। लेकिन तेल कीमतें ऊपर जा रही है और पेट्रोल नियंत्रण-मुक्त है। यह पूछे जाने पर कि कीमत वृद्धि को लेकर सरकार की सहयोगी दलों को अंधेरे में क्यों रखाऔरऔर भी

पेट्रोल की बढ़ती कीमत को लेकर सरकार के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस का गुस्‍सा सातवें आसमान पर आ गया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर बरसते हुए कहा कि उनकी पार्टी सिर्फ सरकार में मंत्रालयों के लिए आम आदमी पर बोझ बर्दाश्त नहीं करेगी। ममता ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस बहुमत में हैं इसलिए उनकी बात अनसुनी की जाती है। ममता ने यहऔरऔर भी

सार्वजनिक तेल मार्केटिंग कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के बढ़ते दाम और डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ते रुपए को देखते हुए पेट्रोल के दाम में 1.82 रुपए प्रति लीटर बढ़ाने की तैयारी में हैं। करीब ढाई महीने पहले ही 16 सितंबर को तेल कंपनियों – इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम व भारत पेट्रोलियम ने पेट्रोल के दाम प्रति लीटर 3,14 रुपए बढ़ाए हैं। नोट करने की बात यह है कि जून 2010 से ही पेट्रोल के मूल्यऔरऔर भी

बीते हफ्ते बाजार, बीएसई सेंसेक्स 1000 से ज्यादा अंक टूट गया। हालांकि हमारा मानना है कि ऐसा होना लाजिमी नहीं था। यह कुछ फंडों द्वारा घबराहट में निकलने के लिए की गई बिकवाली का नतीजा था। वैसे भी इन फंडों मे हफ्ते भर पहले ही घोषत कर दिया था कि उन्हें अपनी कुछ स्कीमों को समेटना है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने वही किया, जिसकी उम्मीद थी। लेकिन उसके इस संकेत ने अमेरिकी बाजारों परऔरऔर भी

भारत के फाइनेंस जगत की सबसे बड़ी खबर। लेकिन निकली एकदम ठंडी। पिछली बार 26 जुलाई को अपेक्षा के विपरीत ब्याज दर को 0.50 फीसदी बढ़ाकर सबको चौंका देना एक अपवाद था। अन्यथा रिजर्व बैंक गवर्नर डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव का एक खास अंदाज है। वे नीतिगत उपायों से चौंकानेवाला तत्व एकदम खत्म कर देना चाहते हैं। यह देश के केंद्रीय बैंक के कामकाज में पारदर्शिता लाने के उनके प्रयास का हिस्सा है। आज सुबह तक सबको पक्काऔरऔर भी

डॉलर के सापेक्ष रुपए की गिरावट ने अपना असर दिखा ही दिया। सरकारी तेल कंपनियों ने कमजोर रुपए से बढ़ी आयात की लागत की भरपाई के लिए गुरुवार-शुक्रवार की मध्य-रात्रि से पेट्रोल का दाम 3.14 रुपए प्रति लीटर बढ़ाने का फैसला कर लिया है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम वन हिंदुस्तान पेट्रोलियम के आला अफसरों ने पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ बैठक के बाद पेट्रोल के मूल्य बढ़ाने की घोषणा की। इससे पहले 15 मई को पेट्रोल के दामऔरऔर भी

सरकार पेट्रोल के मूल्यों पर पिछले साल जून से ही अपना नियंत्रण हटा चुकी है और इसका फैसला अब नफे-नुकसान की बाजार शक्तियों के हिसाब से होता है। हमारे यहां पेट्रोलियम पदार्थों के दाम सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय होते हैं क्योंकि देश में इनके मूल स्रोत कच्चे तेल की 78 फीसदी मांग आयात से पूरी की जाती है। यही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मूल्य के अलावा रुपए की विनिमय दर भी पेट्रोल मूल्यों को प्रभावित करने लगी है।औरऔर भी

सरकार में डीजल के दाम तय करने को लेकर मतभेद बुधवार को उभर कर सामने आ गए, जब योजना आयोग ने डीजल के दाम को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का पक्ष लिया, जबकि भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने सरकार के सामाजिक दायित्व को देखते हुए डीजल पर सब्सिडी जारी रखने का समर्थन किया। राजधानी दिल्ली में सियाम (सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स) के सालाना समारोह को संबोधित करते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंहऔरऔर भी

अभी कुछ दिन पहले तक जो सरकार बढ़ती महंगाई के बीच राजनीतिक बवाल के डर से डीजल के मूल्यों को छेड़ने से डर रही थी, उसे विपक्ष ने ऐसा मौका दे दिया है कि वह बड़े उत्साह से इस पर मूल्य नियंत्रण उठाने की तैयारी में जुट गई है। इसका सबसे पहला वार उन लोगों पर होगा जो डीजल से चलनेवाली कारें इस्तेमाल करते हैं। लोकसभा में महंगाई पर चल रही बहस का जवाब देते हुए वित्तऔरऔर भी

मंगलवार को मई में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार घटकर 5.6 फीसदी रह जाने का आंकड़ा सामने आया तो लगने लगा कि रिजर्व बैंक शायद 26 जुलाई, मंगलवार को मौद्रिक नीति की पहली त्रैमासिक समीक्षा में ब्याज दरें बढ़ाने का अमंगल न करे। लेकिन जून माह में सकल मुद्रास्फीति के बढ़कर 9.44 फीसदी हो जाने ने इस आशा पर पानी फेर दिया है। अब नीतिगत दरों – रेपो व रिवर्स रेपो दर में कम से कम 0.25 फीसदीऔरऔर भी