हमारे नीति-नियामक कितने मतिअंध हैं, इसका प्रमाण पेश कर दिया मंगलवार को जारी मई माह की मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने। तीन दिन पहले ही वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु कह रहे थे कि थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर मई में 8.6 फीसदी रह सकती है जो अप्रैल माह के 8.66 फीसदी से कम होगी। लेकिन वास्तव में यह आंकड़ा 9.06 फीसदी का निकला है। सवाल उठता है कि क्या इतने खासऔरऔर भी

पेट्रोल के दाम बढाने के बाद सरकार अब अगले महीने डीजल, रसोई गैस और मिट्टी तेल के दाम में भी संशोधन का फैसला कर सकती है। इस बारे में निर्णय लेने के लिए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों के अधिकार-प्राप्त समूह की बैठक अगले महीने की नौ तारीख को होगी। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने गुरुवार को दिल्ली में कहा ‘‘प्राधिकृत मंत्री समूह की बैठक 9 जून कोऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी महंगाई की दर में मामूली गिरावट से भी उत्साहित हैं। उन्होंने भरोसा जताया है कि आनेवाले महीनों में मुद्रास्फीति और नीचे आएगी। उनका मानना है कि खाद्यान्नों के स्टॉक में बढ़ोतरी और मैन्यूफैक्चर्ड वस्तुओं की लागत घटने से महंगाई और घटेगी। मुखर्जी ने सोमवार को राजधानी दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, ‘‘अप्रैल में मैन्यूफैक्चर्ड वस्तुओं व खाद्य वस्तुओं, दोनों के दाम में गिरावट आई है। यह एक अच्छा रुख है।औरऔर भी

बाजार में विश्वास का स्तर एकदम डूबने की कगार पर पहुंच चुका है। इस बीच कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी ने डीएमके के पराभव के बाद पहली बार जयललिता की तरफ हाथ बढ़ाया है। लगता है कि जैसे मैडम इसी दिन का इंतजार कर रही थीं। अगर गठबंधन सत्ताधारी पार्टी की मजबूरी है तो विधानसभा चुनावों के नतीजों ने रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार व घोटाले के इस माहौल में यकीकन उसकी मजबूरी को थोड़ा हल्का किया है। मुझे नहीं लगताऔरऔर भी

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही तेल कंपनियों ने शनिवार की मध्य-रात्रि से पेट्रोल के दाम पांच रुपए लीटर बढ़ा दिए हैं। यह एक ही झटके में होने वाली अब तक की सबसे ज्यादा मूल्य वृद्धि है। पिछले साल जून में सरकारी शिकंजे से मुक्त होने के बावजूद तेल कंपनियों ने इस साल जनवरी के बाद से पेट्रोल के दाम नहीं बढ़ाए थे। हालांकि, इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम पिछले ढाईऔरऔर भी

पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रस्ताव पर विचार के लिए मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह की बैठक से पहले प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम ने कहा है कि उपभोक्ताओं पर कम बोझ डालने के लिए सरकार को चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ानी चाहिए। एसोचैम ने रविवार को जारी बयान में कहा कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के अनुपात में ईंधन के मूल्य नहीं बढ़ाना चाहिए। बताऔरऔर भी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद सरकार घरलू बाजार में डीजल के दाम अब और ज्यादा समय तक थामे रखने को तैयार नहीं दिख रही और इसमें फिलहाल तीन रुपए प्रति लीटर की बढोतरी की योजना बना रही है। नए दाम की घोषणा पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की मौजूदा प्रक्रिया पूरी होने के साथ की जा सकती है। केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिल्ली में संवाददाताओं से  अनौपचारिक बातचीतऔरऔर भी

प्याज के साथ-साथ अब फाइबर, खनिज, पेट्रोल, एलपीजी और डीजल भी महंगाई में पलीता लगाने लग गए हैं। सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार 22 जनवरी 2011 को समाप्त सप्ताह में प्याज की थोक कीमतें साल भर पहले की तुलना में जहां 130.41 फीसदी बढ़ी हैं, वहीं फाइबर 47.13 फीसदी, खनिज 16.70 फीसदी, पेट्रोल 30.75 फीसदी, एलपीजी 14.99 फीसदी और डीजल के दाम 14.71 फीसदी बढ़ गए हैं। कुल मिलाकर 22 जनवरी को खत्म हफ्ते में खाद्यऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति की दर बढ़कर दस हफ्तों के शिखर पर जा पहुंची है। 18 दिसंबर को खत्म सप्ताह में यह 14.44 फीसदी दर्ज की गई है। यह वृद्धि इसलिए भी भयंकर हो जाती है क्योंकि साल भर पहले खाद्य मुद्रास्फीति 21.29 फीसदी बढ़ी थी। इसलिए यह महज तकनीकी या सांख्यिकीय मामला नहीं है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को भी यह बात स्वीकार करनी पड़ी जब उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति की ऊंची दर वास्तविक है और कम आधारऔरऔर भी

सरकार इंडियन ऑयल व ओएनजीसी के एफपीओ से पहले डीजल के दाम बढ़ाने पर विचार कर सकती है। यह कहना है तेल सचिव एस सुंदरेशन का। हालांकि उनका कहना था, “फिलहाल सरकार के लिए सारा बोझ उपभोक्ताओं पर डाल देना बेहद मुश्किल है। लेकिन हम यह मुद्दा मंत्रियों के अधिकारप्राप्त समूह (ईजीओएम) के सामने रखेंगे।” सुंदरेशन ने सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि इंडियन ऑयल व ओएनजीसी में और सरकारी हिस्सेदारी बेचने से पहलेऔरऔर भी