मानसून की सही व अच्छी शुरूआत, लेकिन आर्थिक विकास दर में कमी, कंपनियों के लाभार्जन का सिकुड़ना और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बैंकों के ऋण-प्रवाह में कमी। यह सब ऐसी बातें हैं जिनके सम्मिलित प्रभाव से हो सकता है कि रिजर्व बैंक अब ब्याज दरों को बढ़ाने का सिलसिला रोक दे। हालांकि चीन सीआरआर (केंद्रीय बैंक के पास बैंकों द्वारा अनिवार्य रूप से रखा जानेवाला कैश) में एक और वृद्धि करनेवाला है। लेकिन भारत में ब्याज दर कीऔरऔर भी

बाजार उठने की पुरजोर कोशिश करता रहा। दो बजे तक मंदड़िए हावी रहे। लेकिन उसके बाद तेजड़िए इसे आगे ले जाने में कामयाब रहे। उन्होंने लांग पोजिशन बना रखी है जबकि दूसरे कारोबारी शॉर्ट हुए पड़े हैं। इसलिए यह बड़ी बात है कि बाजार अंत में बढ़त लेकर बंद हुआ है। निफ्टी में 0.28 फीसदी तो सेंसेक्स में 0.24 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पूरे हफ्ते की दशा-दिशा तय हो सकती है। आज की बढ़तऔरऔर भी

अनिश्चितताओं का क्रम जारी है। बहुत से अनुत्तरित सवाल बाजार को डोलायमान किए हुए हैं। पिछले सेटलमेंट में सेंसेक्स 17,770 तक गिरने के बाद सुधरकर 18,600 पर आया ही था कि कुछ नई बुरी खबरों ने पटरा कर दिया। यकीनन, कच्चा तेल, मुद्रास्फीति और ब्याज दरों का बढ़ना जैसे पुराने मुद्दे बरकरार हैं। लेकिन इधर ग्रीस में फिर से उभरे ऋण संकट और अमेरिका में आई सुस्ती ने बाजार की मानसिकता को चोट पहुंचाई है। यहां तकऔरऔर भी

बाजार पलटकर उठा। सुबह-सुबह सेंसेक्स 18,672.65 और निफ्टी 5604.95 तक चला गया। निफ्टी का यूं 5600 के स्तर को पार करना बड़ी बात थी। लेकिन दोपहर बारह बजे के बाद बाजार अपनी बढ़त को बनाए नहीं रख। माना जा रहा था कि निफ्टी के 5580 के ऊपर पहुंचते ही टेक्निकल एनालिस्ट और बाजार के पंटर भाई लोग लांग होने या खरीद की भंगिमा अपनाने जा रहे हैं। लेकिन शर्त यही है कि निफ्टी को इससे ऊपर बंदऔरऔर भी

खराब आर्थिक आंकड़ों के चलते अमेरिकी बाजार कल गिर गया और ग्रीस को डाउनग्रेड कर दिया गया। इन दोनों ही घटनाओं का दुनिया के बाजारों पर पड़ा तो भारतीय बाजार भी आज सुबह गिरकर खुले। दिन भर ऊंच-नीच का क्रम चला और आखिकार सेंसेक्स 114.63 अंकों की गिरावट के साथ 18,494.18 और निफ्टी 41.65 अंकों की गिरावट के साथ 5550.35 पर बंद हुआ। लेकिन अगर दुनिया के बाजार न भी गिरे होते तो भारतीय बाजार गिर सकताऔरऔर भी

मैं नहीं जानता कि एफआईआई के तौर-तरीकों, उनके बर्ताव और बाजार की गति पर मैं हँसूं कि रोऊं? पिछले सेटलमेंट तक शोर था कि निफ्टी 5000 का स्तर तोड़कर नीचे चला जाएगा। बेचारे ट्रेडरों ने 5000 के पुट ऑप्शन खरीद डाले। ऐसा इसलिए भी हुआ क्योंकि एक प्रमुख विदेशी ब्रोकिंग हाउस ने अखबारों के जरिए सार्वजनिक तौर पर राय रखी थी कि पहले तीन महीने बाजार गिरेगा और उसके बाद 20 फीसदी बढ़ेगा। इस तरह के बयानऔरऔर भी

भारतीय बाजार ने दिखा दिया है कि यहां एक तरफ बहुत-सी कंपनियां मुश्किल में हैं और अपना धंधा बेचने को तैयार हैं, वहीं दूसरी तरफ बहुत-सी कंपनियां इस कदर संभावनाओं से भरी हैं कि उन्हें खरीदनेवालों की लाइन लगी है। ऑफिस स्टेशनरी बनानेवाली कैमलिन अपनी 50.3 फीसदी इक्विटी जापानी कंपनी कोकुयो को 365 करोड़ रुपए में बेचने में कामयाब हो गई। इससे पहले कनोरिया केमिकल्स अपना एक डिवीजन आदित्य बिड़ला समूह को बेच चुकी है। अब सबेरोऔरऔर भी

बाजार में निराशावादी अब भी मंदड़ियों की पताका लहरा रहे हैं। हर बढ़त का इस्तेमाल नए शॉर्ट सौदों के लिए किया जा रहा है। मुझे पक्का नहीं है कि एफआईआई आगे क्या करने जा रहे हैं क्योंकि वे विशुद्ध ट्रेडर बन चुके हैं और ऑप्शन प्रणाली के जरिए ट्रेडिंग के लिए अल्गोरिथम का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि उन्हें आखिरकार इसमें नुकसान ही उठाना पड़ेगा क्योंकि भारतीय बाजार में वो गहराई व विस्तार नहीं है जहां अल्गोरिथमऔरऔर भी

शिवालिक बाईमेटल, राठी बार्स, त्रिवेणी ग्लास, क्विंटेग्रा सोल्यूशंस, सूर्यचक्र पावर, एचसीसी और रोमान टारमैट ऐसे कुछ स्टॉक्स हैं जिनकी चर्चा इस कॉलम में साल भर के दौरान बार-बार हुई है। किसी न किसी आधार पर इनमें अच्छी बढ़त का अनुमान पेश किया गया था। लेकिन बताए जाने के बाद से इनमें से कई शेयरों के भाव 40-50 फीसदी तक गिर चुके हैं। आप में से कई लोगों ने इस बाबत अपनी शंकाएं और सवाल भी पेश किएऔरऔर भी

निफ्टी में 5330 या सेंसेक्स में 17,770 को हमने बाजार का बॉटम बताया था। सेंसेक्स दो दिन पहले 25 मई को 17,786 तक गिरने के बाद 17,847 पर बंद हुआ था। आज, शुक्रवार को सेंसेक्स पलटकर उस स्तर से 419 अंक ऊपर जाकर 18,266 पर पहुंच गया। अब हम दावे के साथ कह सकते हैं कि बाजार अपनी तलहटी पकड़ने के बाद ऊपर उठ रहा है। अब 4800 या 5000 की अफवाहों को हमें इस सेटलमेंट केऔरऔर भी