रिजर्व बैंक ब्याज दरों को बराबर बढ़ा रहा है, फिर भी मुद्रास्फीति पर लगाम नहीं लग रही। हां, इससे आर्थिक विकास की रफ्तार पर जरूर लगाम लगती दिख रही है। बाजार को यह कतई पसंद नहीं और वो किसी न किसी बहाने लार्सन एंड टुब्रो, इनफोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), एसबीआई व मारुति सुजुकी जैसी ऊंची विकास दर वाली कंपनियों को भी लपेटे जा रहा है। रिलायंस का स्टॉक दो साल के न्यूनतम स्तर पर आ चुका है।औरऔर भी

अच्छी बात है कि निफ्टी अब गिरकर बाजार के उस्तादों के मनोवांछित टेक्निकल स्तर पर आ गया है। फिलहाल बाजार ओवरसोल्ड अवस्था में है। यह तेजडियों के लिए सुनहरा मौका है कि वे निफ्टी को 200 अंक तक उठाकर जबरदस्त मुनाफा कमाने की सूरत निकाल लें। हमें निफ्टी की इस गति का अहसास था और हमने खुद को खास-खास सूचनाओं वाले चुनिंदा स्टॉक्स पर केंद्रित किया। ये स्टॉक गिरते बाजार में भी निश्चित रूप से बढ़ रहेऔरऔर भी

बाजार में भयंकर निराशा का आलम है। निफ्टी 5400 से भी नीचे जा चुका है। विदेशी निवेशकों की तरफ से डंका बजाया जा रहा है कि अगर यह 5300 के नीचे चला गया तो फिर इसे 4700 तक गिरने से रोक पाना मुश्किल होगा। लेकिन इस निराशा के बीच भी आम निवेशकों के लिए नोट बनाने का एक सुनहरा पक्ष उभर रहा है। अभी तक चार बहुराष्ट्रीय कंपनियां डीलिस्टिंग की घोषणा कर चुकी हैं। फिर भी वेऔरऔर भी

बाजार बड़ी कोशिश करके 5499.35 तक चला तो गया। लेकिन 5480 का स्तर टूटते ही वह खुद को संभाल नहीं सका और निफ्टी करीब एक फीसदी की गिरावट के साथ 5447.50 पर पहुंच गया। बाजार के इस तरह धड़ाम हो जाने की वजह सिर्फ इत्ती-सी थी कि कुछ फंड हाउसों ने आशंका जता दी कि कल ब्याज दरों में 50 आधार अंक (0.50 फीसदी) की वृद्धि हो सकती है। मेरा मानना है कि या तो ब्याज दरऔरऔर भी

मुद्रास्फीति बढ़कर 9.06 फीसदी हो गई। चीन तक ने ब्याज दरें 0.50 फीसदी बढ़ा दी हैं। अब तो बाजार के लोगों को सचमुच यकीन हो चला है कि रिजर्व बैंक 16 जून को ब्याज दरें 0.50 फीसदी बढ़ा देगा। इतनी बुरी खबरों के बावजूद निफ्टी 5520 तक जाने के बाद 5500 के ऊपर बंद हुआ है। यह क्या दर्शाता है? हमने पहले भी कहा था और हमें अब भी लगता है कि यही बाजार के सही मूल्यांकनऔरऔर भी

बाजार का विश्वास पहले से ही डिगा हुआ था। ऊपर से निफ्टी 5480 के प्रतिरोध स्तर से भी नीचे चला गया। यह इस बात का साफ संकेत है कि निफ्टी में आगे भी कमजोरी बनी रहेगी। हालांकि बाजार में भागीदारी की जो स्थिति है, उसे देखते हुए इसके बढ़ने की भी इतनी ही ज्यादा गुंजाइश है। आज भी दोपहर बारह बजे के बाद यह कोशिश नजर आई। लेकिन छोटी-सी रेंज में थोड़े से वोल्यूम के साथ बाजारऔरऔर भी

बाजार में क्या मंदड़िए, क्या तेजड़िए, सभी दुविधा में हैं। किसी को अंदाज नहीं है कि बाजार आगे कौन-सी दिशा पकड़ने जा रहा है। बीएसई में कैश बाजार में रोज का औसत वोल्यूम 2600 करोड़ रुपए और एनएसई में 8800 करोड़ रुपए पर आ चुका है। डेरिवेटिव सौदों में बीएसई में तो कुछ होता है नहीं, एनएसई तक में कारोबार घटकर 70,000 करोड़ रुपए के नीचे जाने लगा है। दिन के दिन यानी इंट्रा-डे कारोबार में होनेवालेऔरऔर भी

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के कमजोर आंकड़ों और अर्थव्यवस्था की धीमी पड़ती विकास दर को आधार बनाकर पंटरों ने जबरदस्त बिकवाली कर डाली। नतीजतन, निफ्टी एक बार फिर 5480 का समर्थन स्तर तोड़कर नीचे चला गया। हालांकि 5457 तक जाने के बाद फिर वह उठने लगा और बाजार बंद होने तक 5480 के ऊपर आ गया। वैसे, अगले हफ्ते 16 जून को मध्य-तिमाही समीक्षा में रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों को बढ़ाने का अंदेशा भी पंटरों को मथऔरऔर भी

बाजार बहुत मजबूत धरातल पर खड़ा है क्योंकि मुद्रास्फीति में कमी के आसार बढ़ गए हैं। साथ ही यह भी स्थिति बन रही है कि रिजर्व बैंक अब ब्याज दरों को बढ़ाने का सिलसिला रोक देगा। पहली तिमाही के खराब नतीजों के असर को बाजार मौजूदा भावों में सोख चुका है। इसलिए निफ्टी के 4700 तक गिर जाने की अतिवादी आशंका पूरी होने की उम्मीद नहीं है। ऐसा उसी हालत में हो सकता है, जब अण्णा, बाबा,औरऔर भी

मैंने सुना और अखबारों में पढ़ा भी कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) दोनों ही छोटी व मध्यम आकार की कंपनियों के लिए जल्दी ही अलग एसएमई एक्सचेंज शुरू करने जा रहे हैं। इस एक्सचेंज को लेकर बहुत सारे ट्रेडर और निवेशक काफी उत्साहित हैं। छोटी कंपनियों के आईपीओ में अमूमन कॉरपोरेट गवर्नेंस का स्तर अच्छा नहीं होता। ऐसे ज्यादातर आईपीओ खुलने से पहले ही बिक जाते हैं। आईपीओ की लिस्टिंग पर भावऔरऔर भी