दुविधा के हिंडोले पर झूलता बाजार

बाजार में क्या मंदड़िए, क्या तेजड़िए, सभी दुविधा में हैं। किसी को अंदाज नहीं है कि बाजार आगे कौन-सी दिशा पकड़ने जा रहा है। बीएसई में कैश बाजार में रोज का औसत वोल्यूम 2600 करोड़ रुपए और एनएसई में 8800 करोड़ रुपए पर आ चुका है। डेरिवेटिव सौदों में बीएसई में तो कुछ होता है नहीं, एनएसई तक में कारोबार घटकर 70,000 करोड़ रुपए के नीचे जाने लगा है। दिन के दिन यानी इंट्रा-डे कारोबार में होनेवाले उतार-चढ़ाव भी थम गए हैं।

बाजार भी थम-सा गया है। जनवरी अंत में सेंसेक्स 18,300 के आसपास था और साढ़े चार महीने भी लगभग उसी स्तर पर है। बड़े-बड़े ब्रोकर कहने लगे हैं कि बाजार इस समय अंडर-वैल्यूड है यानी सस्ता चल रहा है। फिर भी इतनी उहापोह और खरीदनेवालों का ऐसा टोंटा क्यों? सवाल यह भी है कि क्या बाजार वाकई सस्ता चल रहा है?

असल में किसी को भी यकीन नहीं है कि यह साल अर्थव्यवस्था, खासकर कंपनियों के लिए कैसा रहनेवाला है। एक खेमे का तर्क है कि 30 कंपनियों वाला सेंसेक्स इस समय बीते वित्त वर्ष के ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) के आधार पर भले ही 19.4 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा हो, लेकिन अगर हम एक साल बाद की सोचें तो यह चालू वित्त वर्ष 2011-12 के अनुमानित ईपीएस के आधार पर 14.4 के ही पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। बीएसई-30 या सेंसेक्स कंपनियों का मौजूदा ईपीएस 940.22 रुपए माना गया है, जिसके साल भर बाद करीब 35 फीसदी बढ़कर 1268.65 रुपए हो जाने का अनुमान है।

जाहिर है कि यह अतिशय आशावादी नजरिया है क्योंकि इस साल कंपनियों के मुनाफे में 35 फीसदी की वृद्धि की कोई गुंजाइश नहीं दिखती। इसलिए अगर कुछ ब्रोकरेज हाउस 14.4 के पी/ई का अनुमान जता रहे हैं तो वह महज एक सब्जबाग है। अगर हम इस वृद्धि दर को 20 फीसदी मानकर चलें तो सेंसेक्स का साल भर बाद का ईपीएस 1128.27 रुपए निकलता है। इसे आधार बनाए तो सेंसेक्स इस समय भावी लाभप्रदता के सापेक्ष 16.19 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है जिसे न तो बहुत सस्ता कहा जाएगा और न ही बहुत महंगा। यहीं से पैदा होता है खरीदने या न खरीदने का भ्रम।

मान लीजिए जिस तरह के आर्थिक धीमेपन के लक्षण दिख रहे हैं, उसमें अगर वित्त वर्ष 2011-12 में कॉरपोरेट क्षेत्र का मुनाफा 10 फीसदी ही बढ़ता है, तब साल भर बाद सेंसेक्स का ईपीएस 1034.24 रुपए होगा। और, इस ईपीएस के सापेक्ष सेंसेक्स अभी 17.66 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। साल भर हम मानें कि सेंसेक्स 21 से ऊपर के पी/ई अनुपात पर ट्रेड होगा, तभी इसके 21,800 तक जाने की सूरत नजर आती है। इसलिए आशावादी मन मानकर चल सकता है कि मुनाफे में 10 फीसदी की वृद्धि और तेजड़ियों की पकड़ मजबूत होने पर हम शेयर बाजार से साल भर में करीब 19 फीसदी का रिटर्न कमा सकते हैं।

वैसे, ब्रोकरेस हाउसों की बात मानें तो मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक वित्त वर्ष 2011-12 में सेंसेक्स का ईपीएस 1200 रुपए, कोटक सिक्यूरिटीज के मुताबिक 1210 रुपए और बैंक ऑफ अमेरिका, मैक्वॉयरी व सिटी के मुताबिक लगभग 1250 रुपए रहेगा। ब्लूमबर्ग का भी औसत अनुमान 1240 रुपए का है। इसे सही मानें तो सेंसेक्स अभी 14.7 के पी/ई पर ट्रेड हो रहा है। लेकिन क्या सेंसेक्स में शामिल कंपनियों का शुद्ध लाभ साल भर में 32 फीसदी बढ़ जाएगा?

यकीनन यह आकलन कुछ ज्यादा ही सुनहरी तस्वीर दिखाने के लिए पेश किया गया है। हमें फिलहाल मुनाफे में 10 फीसदी वृद्धि और सेंसेक्स के 21 पी/ई पर ट्रेड होने जितना ही आशावाद रखना चाहिए। यह एक सम्यक नजरिया है जिसके आधार पर इस समय चुनिंदा शेयरों की खरीद की जानी चाहिए। सोमवार को बहुत मुमकिन है कि एसबीआई पर और चोट की जाए। लेकिन हमारी स्पष्ट राय है कि एसबीआई, इनफोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज को इस समय एसआईपी (सिस्टेमिक इनवेस्टमेंट प्लान) के अंदाज में हर महीने थोड़ा-थोड़ा खरीदते रहना चाहिए। ये तीनों ही मजबूत कंपनियां हैं और लंबे समय में पक्के तौर पर अच्छा रिटर्न देंगी।

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