शिक्षा के अधिकार के साल भर बाद भी 18 राज्यों ने ही बनाया कानून

छह से 14 साल के बच्चों को निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (आरटीई) को लागू हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है। लेकिन अब तक देश के 28 राज्यों व सात संघशासित क्षेत्रों में केवल 18 ने ही इस कानून को अधिसूचित किया है। दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इसे अभी भी कानून नहीं बनाया जा सका है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय से प्राप्त ताजा जानकारी के अनुसार, आंध्र प्रदेश, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, बिहार, चंडीगढ़, अरूणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, दादरा नगर हवेली, दमन दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नगालैण्ड, उड़ीसा, राजस्थान, सिक्किम ने आरटीई कानून को अधिसूचित कर दिया है।

दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मेघालय, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब, कर्नाटक ने अपने विधि विभाग को इस कानून का मसौदा विचार के लिए भेजा है। गुजरात, असम, केरल, मेघालय, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा ने इस कानून को मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष भेजने की बात कही है।

निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून के तहत ही राज्यों व संघशासित क्षेत्रों में राज्य बाल अधिकार संरक्षण परिषद (एससीपीसीआर) गठित करने का प्रावधान किया गया है। लेकिन अभी तक केवल 14 राज्यों में ही राज्य बाल अधिकार संरक्षण परिषद का गठन किया गया है। असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गोवा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और उत्तराखंड ने एससीपीसीआर का गठन किया है।

बता दें कि शिक्षा का मामला संविधान की समवर्ती सूची में आता है। इसलिए राज्यों द्वारा केंद्र सरकार के कानून को स्वीकार किए बगैर उस पर अमल नहीं किया जा सकता है।

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