साल भर से ज्यादा हो गए। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग के हुनर, सीख व अभ्यास के जुड़े इस कॉलम में सबके लिए खुला लगभग 200 शब्दों का पहला पैराग्राम हमेशा अर्थव्यवस्था पर केंद्रित रहता है। कभी सरकार की नीतियां, कभी रिजर्व बैंक के फैसले तो कभी किसानी, बेरोज़गारी व गरीबी की स्थिति। अर्थव्यवस्था के पूरे स्पेक्ट्रम को पकड़ने की कोशिश रहती है। सब्सक्राइबरों के साथ ही अन्य लोगों ने भी सवाल उठाए हैं कि शेयर बाज़ार कीऔरऔर भी

भारत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां कभी न कभी किसी रिश्तेदार, दोस्त या यूट्यूब गुरु ने यह दावा न किया हो कि यह स्टॉक पांच गुना जाएगा, यह अगला मल्टीबैगर है, अभी खरीद लो, वरना ज़िंदगी भर पछताओगे। इन दावों में इतना आत्मविश्वास होता है कि सुनने वाला खुद को अगले कुछ वर्षों में करोड़पति के रूप में देखने लगता है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि ऐसे सपने सबसे ज़्यादा वही लोगऔरऔर भी

कभी-कभी इतिहास किसी तारीख या घटना से नहीं, बल्कि किसी सवाल से शुरू होता है। कैसे ऐसा हुआ कि समझदार लोग, शिक्षित समाज और सत्ता के गलियारों में बैठी बुद्धि एक साथ भ्रम में डूब गई? ‘साउथ सी बबल’ इसी सवाल की जन्मभूमि है। यह केवल शेयरों के चढ़ने और गिरने की कहानी नहीं है, बल्कि उस क्षण की कथा है जब तर्क ने भीड़ के सामने हथियार डाल दिए, जब भविष्य की चमक ने वर्तमान कीऔरऔर भी

सरकार ने 1 अप्रैल 2023 से शेयर बाज़ार के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफ एंड ओ) सेगमेंट में होनेवाले सौदों पर सिक्यूरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) 25% बढ़ा दिया है। पहले एक करोड़ रुपए के फ्यूचर्स सौदों पर 1000 रुपए एसटीटी लगता था, जबकि अब यह 1250 रुपए लगेगा। वहीं, ऑप्शंस की बिक्री पर पहले 0.05% एसटीटी लगता था, अब 0.0625% लगेगा। इस तरह इसमें भी 25% वृद्धि की गई है। पहले ऑप्शंस में एक करोड़ रुपए के सौदेऔरऔर भी

अगर आप शेयरों की ट्रेडिंग में दिलचस्पी रखते हैं तो डब्बा ट्रेडिंग का नाम ज़रूर सुना होगा। हर गैर-कानूनी काम की तरह यह भी हल्के-फुल्के मुंगेरीलाल टाइप लोगों को खूब खींचता है। कोई लिखा-पढ़ी नहीं, रिकॉर्ड नहीं, सारा लेनदेन कैश में, सारी कमाई काली। फिर इनकम टैक्स देने या रिटर्न भरने का सवाल ही नहीं। सारे सौदे स्टॉक एक्सचेंज के बाहर होते हैं तो सिक्यूरिटी ट्रांजैक्शन का सवाल ही नहीं उठता। साथ ही कोई दिक्कत आने याऔरऔर भी

मैंने कहा था कि सेंसेक्स अगले कुछ सत्रों में 500 अंक बढ़ जाएगा। 250 अंक तो वो पहले ही बढ़ चुका था और आज ही एनएवी के चलते 300 से ज्यादा अंकों की बढ़त उसने और ले ली। यह कोई करिश्मा नहीं, पहले से तय था। इसका श्रेय डेरिवेटिव सौदों में कैश सेटलमेंट की व्यवस्था को दिया जाना चाहिए। आईएफसीआई जैसे स्टॉक को पहले तोड़कर 39.5 रुपए तक ले जाया गया और वापस 42.5 रुपए पर पहुंचाऔरऔर भी

अगर बजट में घोषित आयकर कानून का प्रस्तावित संशोधन लागू कर दिया गया तो अब तक हुई सारी दोहरा कराधान बचाव संधियां (डीटीएए) निरस्त हो जाएंगी क्योंकि इन संधियों का मकसद ही खास परिस्थितियों में खास किस्म की आय को टैक्स की कम या शून्य दरों का फायदा देना है। भारत सरकार ने 82 देशों के साथ ऐसी संधियों पर दस्तखत कर रखे हैं। इनमें मॉरीशस ही नहीं, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, रूस, चीन, ब्रिटेन, बांग्लादेश और नेपालऔरऔर भी

सेंसेक्स आज 300 अंक नहीं बढ़ा, बल्कि 200 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया। लेकिन रोलओवर की तकलीफ अब बीतती दिख रही है। मेरा मानना है कि जिन स्टॉक्स में रिटेल निवेशक व ट्रेडर लांग रहे हैं, वे बदतर स्तर पर बंद होंगे। इनमें एचडीआईएल, वोल्टास और वीआईपी जैसे स्टॉक्स शामिल हैं जिन्होंने इस सीरीज में अच्छा-खासा रिटर्न दिया है। आज एचडीआईएल 5.72 फीसदी, वोल्टास 3.99 फीसदी और वीआईपी इंडस्ट्रीज 4.19 फीसदी गिरा है। दूसरी तरफऔरऔर भी

बाजार का 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए) से नीचे चले जाना कोई मामूली बात नहीं होती। लेकिन आज सुबह सवा दस बजे के आसपास यही हुआ, जब सेंसेक्स नीचे में 17,061.16 पर पहुंच गया। सेंसेक्स का 200 डीएमए फिलहाल 17,118.99 है। लेकिन कुछ ही समय बाद वित्त मंत्रालय की तरफ से बयान आ गया कि वे पी-नोट्स को निशाना नहीं बना रहे हैं तो बाजार खटाक से चहकने लग गया। सेंसेक्स कुल 204.58 अंक की बढ़तऔरऔर भी

हमने निफ्टी में सारी लांग कॉल्स शुक्रवार को ही बंद कर दी थीं क्योंकि हमें अच्छी तरह पता था कि पी-नोट का मसला सप्ताहांत पर उछाला जाएगा। ऑपरेटर 65 लाख पुट यानी बेचने के ऑप्शंस सौदे कर चुके थे। इसलिए बाजार को कमजोरी के साथ ही खुलना था। निफ्टी साढ़े दस बजते-बजते 5195 तक चला गया जो 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए) के बेहद करीब है। फिर बड़े स्टॉप लॉस लग गए और जो लोग लांगऔरऔर भी