सम्पत्ति का स्रोत शेयर नहीं, उसके पीछे खड़ा असली बिजनेस!

investment basics

भारत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां कभी न कभी किसी रिश्तेदार, दोस्त या यूट्यूब गुरु ने यह दावा न किया हो कि यह स्टॉक पांच गुना जाएगा, यह अगला मल्टीबैगर है, अभी खरीद लो, वरना ज़िंदगी भर पछताओगे। इन दावों में इतना आत्मविश्वास होता है कि सुनने वाला खुद को अगले कुछ वर्षों में करोड़पति के रूप में देखने लगता है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि ऐसे सपने सबसे ज़्यादा वही लोग देखते हैं जिनके पास निवेश के लिए सबसे कम पैसा होता है। एक बहुत साधारण-सा सवाल पूछिए। अगर शेयर बाज़ार में वास्तव में पैसा छह गुना, दस गुना या पचास गुना करना इतना आसान है  तो बैंक ऐसा क्यों नहीं करते? बैंक कोई धर्मार्थ संस्था तो हैं नहीं। उनका पूरा बिज़नेस मॉडल सिर्फ़ एक चीज़ पर टिका है। वो है अधिक से अधिक मुनाफ़ा कमाना। वे हर दिन हजारों करोड़ रुपए डिप्लॉय करते हैं। होम लोन देते हैं, कार लोन देते हैं, बिज़नेस लोन देते हैं, परसनल लोन देते हैं और क्रेडिट कार्ड जारी करते हैं। हर तरह के जोखिम का आकलन करते हैं और उसके हिसाब से ब्याज तय करते हैं। फिर भी उन्हें सात, आठ, दस या बारह प्रतिशत सालाना रिटर्न ही पर्याप्त लगता है।

ज़रा कल्पना कीजिए। अगर किसी बैंक को सचमुच यह विश्वास होता कि शेयर बाज़ार में हर साल सौ प्रतिशत, दो सौ प्रतिशत या पांच सौ प्रतिशत कमाया जा सकता है तो क्या वह आपको आठ प्रतिशत पर बीस साल का होम लोन देता? नहीं न? वह अगले ही दिन अपनी पूरी पूंजी शेयर बाज़ार में लगा देता। बैंक का उद्देश्य आपको मकान दिलाना नहीं, अपने शेयरधारकों के लिए अधिकतम लाभ कमाना है। अगर शेयर बाज़ार उससे कहीं अधिक सुरक्षित और लाभदायक होता तो बैंकिंग का पूरा मॉडल ही बदल जाता।

मुकेश अम्बानी ने लाखों करोड़ रुपए रिफाइनरी, टेलीकॉम, रिटेल, डेटा सेंटर और ग्रीन एनर्जी में क्यों लगाए? उन्होंने लाखों लोगों को रोजगार देने वाला विशाल इकोसिस्टम क्यों बनाया? अगर शेयर बाज़ार ही सबसे आसान रास्ता होता तो वे फैक्ट्रियां खड़ी करने, पाइपलाइन बिछाने, स्पेक्ट्रम खरीदने और अरबों रुपए की पूंजी लगाने की जगह सुबह नौ बजे लैपटॉप खोलते और शाम तक ट्रेडिंग करके अपनी सम्पत्ति कई गुना बढ़ा लेते। दुनिया का सबसे बड़ा औद्योगिक समूह शायद दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेडिंग डेस्क बन गया होता।

असलियत यह है कि दुनिया के सबसे बड़े निवेशक भी लगातार दस गुना रिटर्न नहीं कमाते। वॉरेन बफेट का लगभग छह दशकों का औसत वार्षिक रिटर्न लगभग 20% के आसपास रहा है। उन्हें इतिहास का सबसे महान निवेशक माना जाता है। अगर हर साल सौ या पांच सौ प्रतिशत कमाना सामान्य बात होती तो वॉरेन बफेट दुनिया के सबसे सफल निवेशक नहीं, औसत निवेशक कहलाते। यही कारण है कि दुनिया के सबसे बड़े बैंक, पेंशन फ़ंड, सॉवरेन वेल्थ फ़ंड और अरबों डॉलर का निवेश करने वाले फ़ैमिली ऑफ़िस कभी यह दावा नहीं करते कि वे हर साल पैसा पांच गुना या दस गुना कर देंगे। उनका पूरा ध्यान जोखिम को नियंत्रित रखते हुए लंबे समय तक बेहतर रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न कमाने पर होता है। इसलिए जब कोई व्यक्ति आपको हर साल दस गुना रिटर्न का सपना बेच रहा हो तो एक पल रुककर सोचिए। क्या उसे निवेश की ऐसी विधि मिल गई है जो वॉरेन बफेट, जिम साइमन्स, दुनिया के सबसे बड़े बैंकों और अरबों डॉलर का प्रबंधन करने वाले पेशेवर निवेशकों को आज तक नहीं मिली?

विडम्बना देखिए। पांच लाख करोड़ रुपए संभालने वाला बैंक आठ प्रतिशत कमाने के लिए सैकड़ों एनालिस्ट, हजारों कर्मचारियों और जटिल रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम पर पैसा खर्च करता है। दूसरी ओर पचास हजार रुपए लेकर बाज़ार में आया एक नया निवेशक दो चार रील्स, कुछ टेलिग्राम चैनल और व्हाट्सऐप फ़ॉरवर्ड देखने के बाद मान बैठता है कि वह अगले तीन साल में करोड़पति बनने वाला है। सवाल यह नहीं है कि दोनों में कौन अधिक कमाएगा। सवाल यह है कि दोनों में वास्तविक जोखिम को बेहतर कौन समझता है।

इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि शेयर बाज़ार से धन नहीं बनता। इतिहास गवाह है कि धैर्यवान निवेशकों ने यहीं बड़ी सम्पत्तियां बनाई हैं। लेकिन उन्होंने यह सम्पत्ति कंपाउंडिंग, अनुशासन, सही एसेट एलोकेशन, बिज़नेस की समझ और वर्षों के धैर्य और अध्ययन से बनाई है। उन्होंने रातोंरात अमीर बनने की मानसिकता से नहीं, बल्कि धीरे-धीरे संपत्ति खड़ी करने के सिद्धांत से निवेश किया।

शेयर बाज़ार कोई जादुई मशीन नहीं है। वह अर्थव्यवस्था का आईना है। जब कंपनियां मूल्य पैदा करती हैं, मुनाफ़ा कमाती हैं, नए उत्पाद बनाती हैं और अपने कारोबार का विस्तार करती हैं, तब उनके शेयर भी लंबे समय में बढ़ते हैं। यानी सम्पत्ति का स्रोत शेयर नहीं, उसके पीछे खड़ा वास्तविक व्यवसाय होता है। नुकसान हमेशा उस भ्रम से होता है कि बिना कोई मूल्य पैदा किए, बिना कोई कौशल विकसित किए और बिना समय दिए कोई हॉट टिप आपको अमीर बना देगी। अगर यह सच होता, तो दुनिया के सबसे अमीर लोग उद्योगपति, वैज्ञानिक या उद्यमी नहीं होते। वे गली नुक्कड़ के स्टॉक गुरु होते, जो रोज़ मोबाइल कैमरे के सामने बैठकर करोड़पति बनाने की गारंटी बेच रहे हैं।

बड़े निवेशक और उद्योगपति अपने दिन की शुरुआत किसी हॉट टिप या व्हाट्सऐप फ़ॉरवर्ड से नहीं करते। उनका पहला काम होता है विश्वसनीय सूचनाएं पढ़ना, कंपनियों की घोषणाएं देखना, आर्थिक नीतियों को समझना, उद्योग की दिशा पर नज़र रखना और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना। वे जानते हैं कि बाज़ार अफ़वाहों से कुछ घंटे चल सकता है, लेकिन कारोबार और सम्पत्ति दशकों तक केवल जानकारी, विश्लेषण और धैर्य के सहारे बनती है। इसलिए जब भीड़ व्हाट्सऐप पर अगला मल्टीबैगर खोज रही होती है, गंभीर निवेशक अख़बारों, वार्षिक रिपोर्टों और विश्वसनीय डेटा में भविष्य तलाश रहे होते हैं।

  • मनोज अभिज्ञान (लेखक सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट हैं और शेयर बाज़ार व निवेश के गहरे जानकार हैं)

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