अप्रैल होगा अमर, अकबर, एंथनी का!

सेंसेक्स आज 300 अंक नहीं बढ़ा, बल्कि 200 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया। लेकिन रोलओवर की तकलीफ अब बीतती दिख रही है। मेरा मानना है कि जिन स्टॉक्स में रिटेल निवेशक व ट्रेडर लांग रहे हैं, वे बदतर स्तर पर बंद होंगे। इनमें एचडीआईएल, वोल्टास और वीआईपी जैसे स्टॉक्स शामिल हैं जिन्होंने इस सीरीज में अच्छा-खासा रिटर्न दिया है। आज एचडीआईएल 5.72 फीसदी, वोल्टास 3.99 फीसदी और वीआईपी इंडस्ट्रीज 4.19 फीसदी गिरा है। दूसरी तरफ बॉम्बे डाईंग, रेमंड और सेंचुरी टेक्सटाइल्स संभावनाओं से भरे अंदाज में बंद होंगे। इन तीनों में आज सांकेतिक बढ़त दर्ज की गई है।

निफ्टी ने एक बार फिर 5170 पर समर्थन हासिल किया और 5194.75 पर बंद हुआ, जो अच्छी बात है। निफ्टी फ्यूचर्स का आखिरी भाव 5199 रहा है। इस सेटलमेंट में कल तकलीफ का आखिरी दिन है। फिलहाल पी-नोट के मामले ने बाजार को ओवरसोल्ड अवस्था में डाल दिया है। ऐसे में अगर निफ्टी कल 5340 पर पहुंच जाए तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा। अगर ऐसा होता है तो शुक्रवार और सोमवार को हम अच्छी रैली देख सकते हैं जो निफ्टी को 5503 तक ले जा सकती है। ये वो मुकाम है जहां टेक्निकल एनालिसिस के चार्टों ने बेचने का इशारा किया था।

कल बीएसई ने लिस्टिंग समझौते की शर्तों को पालन न करने के लिए 49 और कंपनियों को सस्पेंड कर दिया, जिनमें से बहुतों को डीलिस्ट कर दिया जाएगा। इससे पहले पिछले दो दशकों में करीब 1600 कंपनियों को सस्पेंड किया गया और फिर वे डीलिस्ट हो गईं। फिर बाजार से गायब हो गईं। उनके साथ निवेशकों के 64,000 करोड़ रुपए से ज्यादा डूब चुके हैं। लेकिन हमारे नियामक कान में तेल सो रहे हैं।

इसमें भी पिरामिड साईमीरा का मामला तो ज्यादा ही गंभीर है। इसमें सेबी के फर्जी पत्र का इस्तेमाल कर निर्मल कोटेचा ने खुले बाजार में कंपनी की 8 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी बेच डाली। सेबी ने कंपनी के प्रबंध निदेशक व मालिक पी एस स्वामीनाथन के खिलाफ ओपन ऑफर लाने का आदेश सुनाया। और, उसके बाद फिर वही पुरानी कहानी दोहराई गई। पिरामिड साईमीरा ने लिस्टिंग समझौते की केवल एक शर्त का उल्लंघन किया था और उसके स्टॉक को डीलिस्ट कर दिया गया। हालांकि कंपनी के पास आस्तियां हैं, लेकिन निवेशकों की क्षतिपूर्ति के लिए उनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यहां तक कि निवेशक संरक्षण फंड को भी कभी निवेशकों की पूंजी को बचाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता।

फिर, वित्त मंत्री जी! आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि रिटेल निवेशक बाजार में वापस आएंगे? क्या आप चाहते हैं कि राजीव गांधी इक्विटी बचत स्कीम के रास्ते 2500 रुपए का टैक्स बचाने के लिए वे हर साल 50,000 करोड़ रुपए गंवाते रहें? अजीब हाल है! सेबी को उन सभी कंपनियों की आस्तियों को फ्रीज कर देना चाहिए जो जान-बूझकर डीलिस्टिंग के लिए सस्पेंड होने का रास्ता अपनाती हैं। एक तरफ बहुराष्ट्रीय कंपनियां डीलिस्टिंग के लिए बुक वैल्यू से ऊपर जाकर अपने शेयर वापस खरीद रही हैं, जैसे ओरेकल डीलिस्टिंग के लिए 3200 रुपए पर अपने शेयर बायबैक कर रही है, वहीं दूसरी तरफ शर्म की बात है कि हमारी कंपनियां सस्पेंड होने जैसा घटिया तरीका अपना रही है।

मेरे बहुत से एनालिस्ट दोस्तों ने कल स्वीकार किया कि वे कंप्यूटर प्रोग्राम के जरिए हो रहे सौदों को मात नहीं दे सकते और किसी स्मार्ट से स्मार्ट ट्रेडर के भी मुनाफा कमाने का सवाल नहीं उठता। जो भी हो, भारतीय बाजार में उथल-पुथल का स्तर काफी ऊंचा रहेगा जिसकी वजह है अल्गोरिदम ट्रेडिंग का बढ़ता चलन और स्टॉक डेरिवेटिव सौदों में फिजिकल सेटलमेंट का अभाव। अगर इसमें फिजिकल सेटलमेंट हो जाए तो एक कंप्यूटर भी शॉर्ट सेल नहीं कर पाएगा और एचएनआई या अमीर निवेशक अपनी ताकत से कंप्यूटर तक को पस्त कर डालेंगे। खैर, इस सारे लफड़ों में अभी मुझे नहीं पड़ना क्योंकि कोई भी इन पर ध्यान नहीं देगा।

अप्रैल महीना भारत के अमर, अकबर, एंथनी के लिए है। ये वो मशहूर हिंदी सिनेमा है जिसमें विनोद खन्ना, ऋषि कपूर और अमिताभ बच्चन ने धूम मचाई थी। शेयर बाजार में इस तरह की धूम मचानेवाले तीन तिलंगे स्टॉक्स होंगे – रेमंड, सेंचुरी टेक्सटाइल्स और बॉम्बे डाईंग।

दान अगर खुद ही अपना श्रेय लेने में जुट जाए तो वह दान नहीं रहता। वह तो महज अहंकार और दिखावा बनकर रह जाता है।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं पड़ना चाहता। इसलिए अनाम है। वह अंदर की बातें आपके सामने रखता है। लेकिन उसमें बड़बोलापन हो सकता है। आपके निवेश फैसलों के लिए अर्थकाम किसी भी हाल में जिम्मेदार नहीं होगा। यह मूलतः सीएनआई रिसर्च का कॉलम है, जिसे हम यहां आपकी शिक्षा के लिए पेश कर रहे हैं)

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