बाज़ार अपना चार महीनों से कदमताल किए जा रहा है। इस साल 29 अप्रैल को निफ्टी-50 सूचकांक 24,177.65 पर बंद हुआ था और अभी 28 अगस्त को 24,175.65 पर है। वहीं, साल के दूसरे दिन 2 जनवरी को यह 26,328.55 पर था, जहां से अब तक 8.18% गिर चुका है। निराशा और पस्ती का आलम है। देशी निवेशक संस्थाएं खासकर म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियां ज्यादा खरीद रही हैं, जबकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक उनसे कम बेच रहे हैं। फिर भी बाजार पस्त है। इस बीच मल्टी-बैगर स्टॉक्स के सौदागर गदर काटे पड़े हैं। लेकिन लम्बे समय के निवेशक समझ लें कि मल्टी-बैगर स्टॉक्स पकड़ना संभावना व समय का खेल है। ट्रैक-रिकॉर्ड देखकर संभावनाओं से भरी कंपनी के शेयर सही भाव पर पकड़ लें। धैर्य रखें। समय सारा करिश्मा खुद देगा। ‘अर्थकाम’ गिनती नहीं रखता कि उसने अब तक कितने मल्टी-बैगर स्टॉक्स पेश किए है, न ही इनका श्रेय लेता है। संयोगवश बता दें कि कोलकाता की कंपनी रामकृष्ण फोर्जिंग्स को हमने करीब चार साल पहले 15 मई 2022 को पकड़ा था। तब उसका दो रुपए अंकित मूल्य का शेयर ₹150 की रेंज में था। अभी ₹750 की रेंज में है। चार साल में पांच गुना। अब तथास्तु में आज की कपंनी…
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