संघर्ष तो चलेगा अभी कुछ दिन और

बाजार पलटकर उठा। सुबह-सुबह सेंसेक्स 18,672.65 और निफ्टी 5604.95 तक चला गया। निफ्टी का यूं 5600 के स्तर को पार करना बड़ी बात थी। लेकिन दोपहर बारह बजे के बाद बाजार अपनी बढ़त को बनाए नहीं रख। माना जा रहा था कि निफ्टी के 5580 के ऊपर पहुंचते ही टेक्निकल एनालिस्ट और बाजार के पंटर भाई लोग लांग होने या खरीद की भंगिमा अपनाने जा रहे हैं। लेकिन शर्त यही है कि निफ्टी को इससे ऊपर बंद होना चाहिए। और, ऐसा नहीं हुआ। इसलिए संघर्ष अभी कुछ दिन और चलेगा। इस दौरान बाजार के उस्ताद लोग 5480 से 5600 के बीच उथल-पुथल मचाने की, गदर काटने की कोशिश करेंगे।

मैं अब भी मानता हूं कि इस सेटलमेंट में बाजार को अच्छा-खासा बढ़ना है। निफ्टी के 5735 से 5750 तक चले जाने की संभावना बहुत ज्यादा है। अगर गिरा तो पहली बाधा 5480 पर होगी और उसके बाद 5330 पर। लेकिन अगर यह बाधा भी टूट गई तो निफ्टी 5200 तक जा सकता है। हो सकता है कि ऐसा हो या न हो, लेकिन निवेशक अगर इस आशंका को ध्यान में रखेंगे तो बेहतर रणनीति बना सकते हैं। मेरी आशंका का आधार बस इतना है कि फिजिकल सेटलमेंट के अभाव में बाजार चलानेवालों के लिए निफ्टी को पीटकर 5200 तक ले जाना असंभव नहीं है।

कल बाजार का जो ढर्रा चल रहा था, उसमें वह बढ़कर बंद होता। लेकिन तभी एक बिजनेस चैनल ने खबर चला दी कि सीबीआई ने विशेष अदालत में रिलांयस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह के प्रमुख यानी अनिल अंबानी की धर-पकड़ की अर्जी लगाई है। इससे अनिल अंबानी की कंपनियों के शेयरों को एक तरफ से 4 से 5 फीसदी का फटका लग गया। बाजार बंद होने के बाद अदालत ने सीबीआई की अर्जी ठुकरा दी। सवाल उठता है कि अर्जी का फैसला जब इतनी जल्दी आना था तो खबर की सनसनी फैलाने का मकसद क्या था?

यहां तक कि रिलांयस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) का स्टॉक भी कंपनी की एजीएम (सालाना आमसभा) के दिन दबा हुआ दिखा। सुबह मामूली बढ़त के साथ खुला था। लेकिन बाद में 1.68 फीसदी तक गिर गया। हालांकि एजीएम कभी शेयर का रुझान नहीं तय करती। लेकिन रिलायंस की एजीएम से जैसी उम्मीदें थे, उसे देखते हुए इसमें वोलैटिलिटी और वोल्यूम तो बढ़ना ही था। एजीएम में कोई खास बात नही हुई तो ट्रेडर आरआईएल के स्टॉक में मुनाफावसूली करने लगे और बाजार गिरावट की राह पर चल पड़ा।

वैसे, मेरी सलाह है कि ट्रेडरों को आमतौर पर इस तरह घटना-आधारित ट्रेडिंग से बचना चाहिए, बशर्ते वे नुकसान उठाने की पूरी मनःस्थिति में न हों। इनफोसिस इस समय सबसे सुरक्षित दांव है। बाहरी रूप अस्थाई है, अंदर का दम स्थाई है। यह बात इनफोसिस पर बराबर लागू होती है।

फिलहाल बारिश की ताजा फुहारों ने फर्टिलाइजर सेक्टर के शेयरों में नई संभावना पैदा कर दी है क्योंकि अच्छे मानसून से उर्वरकों की मांग बढ़ सकती है। इससे फर्टिलाइजर कंपनियों के शेयर बढ़ सकते हैं। हालांकि अभी उनके वोल्यूम में कायदे की वृद्धि नहीं दिख रही। फिर भी मेरा मानना है कि यह सेक्टर छोटी अवधि में अच्छा रिटर्न दे सकता है।

प्रॉक्टर एंड गैम्बल इंटरनेशनल के बारे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं उड़ी हैं कि वह अपने सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी कंपनी यूनिलीवर (भारत में हिंदुस्तान यूनिलीवर) का ही अधिग्रहण करने की फिराक में है। यह सौदा 3800 करोड़ पौंड (2.78 लाख करोड़ रुपए) में हो सकता है। मुझे लगता है कि यह परले दर्जे की अफवाह है। लेकिन इतना जरूर है कि एफएमसीजी सेक्टर में कुछ छोटे-मोटे अधिग्रहण तो हो ही सकते हैं। यह दौर ही ऐसा है।

प्रकृति ने इंसान को दो आंखें, लेकिन जीभ एक ही दी है। ऐसा इसलिए ताकि वह जुबान खोलने से पहले कम से कम दो बार देख ले।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का फीस-वाला कॉलम है, जिसे हम यहां मुफ्त में पेश कर रहे हैं)

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