पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी शेयर बाजार के सौदों पर नजर रखने के लिए नवीनतम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने लगी है। साथ ही वह अपने निगरानी विभाग में ऐसा सॉफ्टवेयर टूल लगा रही है जिससे फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों पर शेयरों को लेकर पेश की गई सूचनाओं व टिप्स का विश्लेषण किया जाएगा। समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट के मुताबिक सेबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उसे बताया कि नया सॉफ्टवेयर फेसबुक व ट्विटर जैसीऔरऔर भी

रिजर्व बैंक के गर्वनर डॉ. दुव्वरी सुब्बाराव के मुताबिक हाल में हाउसिंग लोन घोटाले में रिश्वत लेकर जो भी ऋण दिए गए हैं, उनमें से सभी में स्थापित नियमों का पालन किया गया है। उन्होंने गुरुवार को कोलकाता में रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि इस सिलसिले में 14 ऋण खातों की जांच की गई है और इनमें से 13 खाते एकदम दुरुस्त तरीके से काम कर रहेऔरऔर भी

अगस्त 2009 में पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी द्वारा एंट्री लोड खत्म कर देने से म्यूचुअल फंडों की आस्तियां जरूर घटी हैं, लेकिन उनका शुद्ध लाभ बहुत ज्यादा बढ़ गया है। निवेश संबंधी रिसर्च से जुड़ी फर्म मॉर्निंगस्टार की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2009-10 में म्यूचुअल फंडों को संचालित करनेवाली एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) का औसत शुद्ध लाभ तीन गुना या 300 फीसदी बढ़ गया है। 2009-10 में देश के सभी म्चूचुअल फंडों काऔरऔर भी

हम में से बहुत लोग लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय खुद बहुत कम सोचते हैं। ज्यादातर वे एजेंट की बातों पर भरोसा करते हैं या उसकी वाकपटुता के जाल में आकर फैसला कर बैठते हैं और एजेंट उन्हें अपने मन मुताबिक (कमीशन-माफिक) लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बेच देता है। फिर क्या करें: सिर्फ यह कीजिए कि  फैसला खुद लीजिए कि आपको  कौन-सी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी  खरीदनी है? एजेंट द्वारा सुझाई गई कम प्रीमियम वाली पॉलिसी को तभी तवज्जोऔरऔर भी

लोन के लिए रिश्वतखोरी के मामले में बड़े नायाब किस्म के एसएमएस इस्तेमाल किए गए हैं। जैसे, बिचौलिये को संदेश मिला कि ऑल इज़ वेल तो मतलब कि लोन मंजूर हो गया है। अगर बैंक या वित्तीय संस्था के अधिकारी ने एसएमएस में लिखा – चाइनीज क्यूजीन तो मतलब कि रिश्वत तगड़ी चाहिए। पंजाबी फूड के एसएमएस का मतलब होता है कि रिश्वत सोने के जेवरात, महंगी घड़ियों या इसी तरह के साजोसामान के रूप में चाहिए।औरऔर भी

गुरुवार को शेयर बाजार खुलने के एकाध घंटे बाद ही अफवाह फैल गई कि सिविल एविएशन सेक्टर में भी सीबीआई किसी घोटाले का पर्दाफाश करनेवाली है। दिन भर यह सनसनी चलती रही। फिर कहा गया कि बाजार बंद होने के बाद ऐसा खुलासा हो सकता है। इस चक्कर में बढ़े बाजार में भी जेट एयरवेज, किंगफिशर और स्पाइसजेट के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। लेकिन देर शाम तक ऐसी कोई खबर नहीं आई है। हां, इसऔरऔर भी

लोगों में बीमा की जागरूकता बढ़ रही है। बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) की तरफ से जारी किए गए ताजा आंकड़े यही तस्वीर पेश कर रहे हैं। इस साल सितंबर की तिमाही में एकल और गैर-एकल प्रीमियम वाली पॉलिसियों में सम-एश्योर्ड 2,68,945.36 करोड़ रुपए रहा है, जबकि साल पहले की सितंबर तिमाही में यह बीमा कवर 2,46,482.45 करोड़ रुपए का था। इस तरह सालाना तुलना में सम-एश्योर्ड 15.33 फीसदी बढ़ गया है। लेकिन इसमें नोट करने कीऔरऔर भी

कभी-कभी कुछ चीजों का साक्ष्य नहीं होता, लेकिन इससे वो चीजें गलत नहीं हो जातीं। मैं यहां ईश्वर जैसी सत्ता की नहीं, बल्कि शेयर बाजार में अभी हाल में चले खेल की बात कर रहा हूं। साधारण-सी रिश्वतखोरी को बडे घोटाले की तरह पेश करना, लोड सिंडिकेशन के काम में लगी मनी मैटर्स फाइनेंशियल सर्विसेज को निपटाना, सेंसेक्स से ज्यादा मिड कैप और स्माल कैप शेयरों को पीट डालना, कुछ ऑपरेटरों को रत्ती भर भी आंच नऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था ने तय किया है कि म्यूचुअल फंडों की लिक्विड स्कीमों (छोटी अवधि की ऋण स्कीमों) के खाते में जब तक निवेश की पूरी रकम नहीं आ जाती है, तब तक उसके एवज में यूनिटें नहीं जारी की जा सकती हैं। अभी तक होता यह है कि दिन में नियत समय तक पैसा आए या न आए, म्यूचुअल फंड इन स्कीमों के निवेशकों के नाम यूनिटें आवंटित कर देते हैं। वे इस भरोसे परऔरऔर भी

शुक्रवार को सूत्रों के हवाले दिन भर खबर आती रही कि पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी इस बात की जांच कर रही है कि हाउसिंग लोन घोटाले में शामिल लोगों व फर्मों ने कुछ कंपनियों के शेयरों में इनसाइडर ट्रेडिंग तो नहीं की है। असल में इसमें एलआईसी के सचिव (निवेश) नरेश चोपड़ा पर यही आरोप है कि वह मनी मैटर्स फाइनेंशियल से रिश्वत लेकर उन कंपनियों की जानकारी दिया करता है जिनमें एलआईसी निवेश करनेवाली है।औरऔर भी