आप सभी से हमारी विनम्र गुजारिश है कि बाजार के तमाम मध्यवर्तियों की तरफ से बिना वजह किए जानेवाले डाउनग्रेड व अपग्रेड को लेकर बहुत चौकन्ने रहें। जैसे, बाजार कल और आज मूडीज द्वारा भारत की विदेशी मुद्रा रेटिंग को अपग्रेड करने पर बहक गया। हकीकत यह है कि भारत सरकार के बांडों की रेटिंग मूडीज ने पिछले महीने 20 दिसंबर को ही बढ़ा दी थी। इसलिए, रुपया जब पिछले छह महीनों में डॉलर के सापेक्ष करीब-करीबऔरऔर भी

सरकार देश में विदेशी पूंजी को खींचने के हरसंभव उपायों पर गौर कर रही है। यह कहना है वित्त मंत्रालय के एक उच्चाधिकारी का। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने जिस तरह भारत के स्थानीय व विदेशी मुद्रा बांडों की रेटिंग एक कर दी है, उससे देश से विदेशी पूंजी के बाहर निकलने के सिलसिले को थामने में मदद मिलेगी। बता दें कि बुधवार को मूडीज ने भारत के देशी व विदेशी बांडों कीऔरऔर भी

जो अपरिहार्य था, जिसे होना ही था, आखिरकार वही हो रहा है। भारतीय बैंकिंग सेक्टर को मूडीज ने एसबीआई के नतीजों के बाद डाउनग्रेड किया तो उसके एक दिन बाद ही स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) ने उसे अपग्रेड कर दिया। इससे कहीं न कहीं यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि डाउनग्रेड और अपग्रेड करना ऐसे सिंडीकेट की चाल है जिसका मकसद भारतीय बाजार को अपने इशारों पर नचाना है। जो निवेशक भगवान मानकर ऐसा करनेवालों काऔरऔर भी

भारतीय बैंकिंग उद्योग अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों के लिए पैंतरेबाजी का अड्डा बन गया लगता है। मूडीज़ ने सितंबर में देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (भारतीय स्टेट बैंक) की रेटिंग डी+ से घटाकर सी- कर दी थी। फिर बुधवार, 9 नवंबर को उसने भारतीय बैंकिंग उद्योग का नजरिया घटाकर स्थिर से नकारात्मक कर दिया। लेकिन दुनिया की दूसरी प्रमुख एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) की 9 नवंबर को ही जारी उस रिपोर्ट पर किसी काऔरऔर भी

बराक ओबामा ने अमेरिका में नौकरियों के नए अवसरों को प्रोत्साहित करने के लिए 447 अरब डॉलर के पैकेज की घोषणा कर दी। वहां अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने हैं तो ओबामा को ऐसा कुछ करना ही था। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की हालत में थोड़ा और सुधार आएगा। यह अलग बात है कि इस पैकेज की राह में आनेवाली राजनीतिक अड़चनों की सोचकर अमेरिका व यूरोप के बाजारों ने इस पर तल्ख नकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई है। अपनेऔरऔर भी

महीने का आखिरी गुरुवार। डेरिवेटिव सेगमेंट में सेटलमेंट का आखिरी दिन। निफ्टी का 4820 या 5000 होना इस बात पर निर्भर था कि बाजार चलानेवालों ने ऑप्शंस में किस तरफ का कॉल या पुट प्रीमियम पकड़ा है। जैसा पहले सामने आ चुका है कि 4600 पर पुट सौदे की बड़ी पोजिशन बन चुकी थी तो निश्चित रूप से 4600 की गुंजाइश खत्म हो गई थी। दूसरी तरफ ऐसा लगता है कि उन्होंने 5000 और 5100 की कॉलऔरऔर भी

कोल इंडिया अब बाजार पूंजीकरण के मामले में देश की सबसे बड़ी कंपनी बन गई है। उसने सालों से इस स्थान पर काबिज रिलायंस इंडस्ट्रीज को पीछे धकेल दिया है। इस समय कोल इडिया का बाजार पूंजीकरण 2,51,296 करोड़ रुपए है, जबकि रिलांयस इंडस्ट्रीज का मौजूदा बाजार पूंजीकरण 2,47,129 करोड़ रुपए ही रह गया है। यह फर्क लगातार बाजार का किंग कहे जानेवाले रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में आई गिरावट के चलते पैदा हुआ है। रिलायंस काऔरऔर भी

अमेरिका के डाउ जोंस सूचकांक मे 600 अंकों की भारी गिरावट ने आखिरकार भारत व एशिया में आई गिरावट की बराबरी कर दी। भारत का बाजार पिछले दस महीनों से गिर रहा था, जबकि डाउ जोंस खुद को मजबूती से 12300 पर टिकाए हुए था। लेकिन अब उसे असली झटका लग चुका है। असल में विकसित देशों को लौटकर गया धन अब वहां से निकलकर फिर से भारत उभरते बाजारों की तरफ बढ़ रहा है। खैर, हमारेऔरऔर भी

अमेरिका का डाउनग्रेड होना चाहिए था या नहीं, यह अब बहस का नहीं, इतिहास का मसला बन चुका है क्योंकि एस एंड पी उसकी संप्रभु रेटिंग को डाउनग्रेड कर एएए से एए+ पर ला चुकी है। हो सकता है कि एएए रेटिंग वाले दूसरे देशों को भी बहुत जल्द ही डाउनग्रेड कर दिया जाए। लेकिन क्या इस तरह के डाउनग्रेड से सब कुछ खत्म हो जाता है? ऐसा कतई नहीं है। दुनिया और बाजार चलते रहे हैं,औरऔर भी

हमने इसी जगह एक बार नहीं, कई बार कहा था कि चाहे कुछ हो जाए, बाजार 5735 तक जाएगा। यह हो गया। महज दो हफ्तों में एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) ने 10,000 करोड़ रुपए की खरीद कर डाली। अहम सवाल है कि आगे क्या होगा? क्या यह क्षणिक आवेग है या बाजार नई छलांग की तैयारी में है? मंदी और तेजी के खेमे की राय स्वाभाविक तौर पर अलग-अलग है। कुछ कहते हैं कि यह महज फुलझड़ीऔरऔर भी