ढोल-ताशे से दूर आधार स्वदेशी का

जो अपरिहार्य था, जिसे होना ही था, आखिरकार वही हो रहा है। भारतीय बैंकिंग सेक्टर को मूडीज ने एसबीआई के नतीजों के बाद डाउनग्रेड किया तो उसके एक दिन बाद ही स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) ने उसे अपग्रेड कर दिया। इससे कहीं न कहीं यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि डाउनग्रेड और अपग्रेड करना ऐसे सिंडीकेट की चाल है जिसका मकसद भारतीय बाजार को अपने इशारों पर नचाना है। जो निवेशक भगवान मानकर ऐसा करनेवालों का अनुसरण करते हैं, वे इसकी कीमत चुका रहे हैं, भले ही वे एफआईआई हों, डीआईआई या एचएनआई हों या आम निवेशक। एस एंड पी का यह मानना कि फ्रांस को डाउनग्रेड किया जाना एक गलती थी, अपने आप में बहुत कुछ साफ कर देता है।

कुछ बिजनेस चैनल भी ऐसे निहित स्वार्थों के हरकारों का काम करते हैं। आगे बढ़-चढ़कर उनकी बातों पर ढोल-ताशा बजाने लगते हैं। यह दिखाता है कि भारत में संचालन व नियंत्रण की प्रणाली कितनी कमजोर है और बेचारे ट्रेडर कैसे बड़ी आसानी से जोड़तोड़ से भरी बातों का शिकार बन जाते हैं। निवेशक समुदाय के लिए आईपीओ बाजार पहले ही कैंसर बन चुका है। सेबी ने भले ही केवाईसी (नो योर कस्टमर) मानक बना दिए हों, लेकिन रूपलबेन पांचाल के अंदाज में बोगस एकाउंट खोलकर धंधा करनेवालों की कोई कमी नहीं है। निवेशकों को बरबाद कर देनेवाले इस गोरखधंधे को रोकने का एक ही तरीका है कि आईपीओ आने के तीन महीने के भीतर उसमें हुई धांधली की जांच करा ली जाए। अभी तो एक-दो साल बाद जब जांच शुरू होती है, तब तक दूसरी रूपलबेन पांचाल आ चुकी होती हैं।

खैर, 12 महीनों तक लस्त-पस्त बाजार में मुझे झेलने के बाद आप से मेरी गुजारिश है कि कुछ महीने और झेलें और तब देखें कि तेजी के बाजार का रंग कितना चोखा होता है। यकीन मानिए कि आप चहककर बोल पड़ेंगे कि यही तो हमें चाहिए था। तेजी का अगला बाजार जबरदस्त तेजी का दौर लेकर आएगा। पिछले 12 महीने 2003 से 2016 तक के समूचे तेजी के बाजार के सबसे बुरे महीने थे। इसलिए जोखिम और उपलब्धि का तराजू आनेवाले महीनों में तेजड़ियों की तरफ झुका रहेगा।

अभी जिस तरह का डर बाजार में छाया हुआ है, वह हाल के सालों का सबसे विकराल रूप लिए हुए है। यह लेहमान संकट से भी ज्यादा तकलीफदेह है क्योंकि लेहमान ब्रदर्स ने तो पता लगने से पहले ही एक झटके में आपको मार डाला था, जबकि यह तो धीमे जहर की तरफ आपको हलाल कर रहा है। इसलिए निवेशकों को ज्यादा चोट लग रही है और छोटी से छोटी घटना भी घाव पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। वे कुछ ज्यादा ही शंकालु हो गए हैं। यहां तक कि उन्होंने इक्विटी में निवेश करने का विकल्प ही छोड़ दिया है। आज जो लोग ट्रेडिंग कर भी रहे हैं, वे घाटा बढ़ते ही मैदान छोड़कर भाग खड़े होंगे। इसने ब्रोकरों का जोखिम खतरनाक हद तक बढ़ा दिया है।

इस सारे हालात के बीच भी मैं तेजड़ियां हूं और बचाव की रणनीति अपनाकर बाजार को मात देते हुए तेजड़िया ही बना रहूंगा। हम निवेश व ट्रेडिंग की इस रणनीति से बराबर धनात्मक रिटर्न देते रहे हैं। फरवरी 2009 के बाद से एक भी महीना ऐसा नहीं है, जब हमने ऋणात्मक रिटर्न दिया हो। यह हमारी रणनीति की श्रेष्ठता को साबित करता है। जो लोग चार्टों से खेलते हैं, उन्हें फास्ट फूड की तरह हर चीज बड़े ‘फास्ट’ अंदाज में मिल जाती है, लेकिन फिर भारी ‘फैट’ को हर हाल में जलाना उनकी मजबूरी बन जाता है। इसलिए जो भी फैसला करें, सोच-समझ कर करें।

निफ्टी आज पूरा एक फीसदी गिरकर 5168.85 पर बंद हुआ है। लेकिन इस भारी उथल-पुथल भरे दौर में भी मुझे नहीं लगता कि वो 5000 अंक के नीचे जाएगा। दूसरी तरफ, मुझे साफ-साफ दिख रहा है कि बैंक निफ्टी के 13,000 तक पहुंचने की राह खुल चुकी है। अब तो मैं अपना सब कुछ एसबीआई पर दांव लगाने को तैयार हूं। मैंने यही बात इनफोसिस में 2200 रुपए पर कही थी और आप नतीजा देख चुके हैं। मैंने यही बात भारती एयरटेल के 263 रुपए पर रहने के दौरान कही थी और यहां भी परिणाम आप देख चुके हैं। फिरंगियों को त्यागकर स्वदेशी को आधार बनाइए और आपकी किस्मत चमकने लगेगी।

कुछ ही लोगों में वो माद्दा होता है कि उन्हें बड़ी से बड़ी बोली लगाकर भी नहीं खरीदा जा सकता।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं पड़ना चाहता। इसलिए अनाम है। वह अंदर की बातें आपके सामने रखता है। लेकिन उसमें बड़बोलापन हो सकता है। आपके निवेश फैसलों के लिए अर्थकाम किसी भी हाल में जिम्मेदार नहीं होगा। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का कॉलम है, जिसे हम यहां आपकी शिक्षा के लिए पेश कर रहे हैं)

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