घटिया हरकत फिरंगी ब्रोकरों की

आप सभी से हमारी विनम्र गुजारिश है कि बाजार के तमाम मध्यवर्तियों की तरफ से बिना वजह किए जानेवाले डाउनग्रेड व अपग्रेड को लेकर बहुत चौकन्ने रहें। जैसे, बाजार कल और आज मूडीज द्वारा भारत की विदेशी मुद्रा रेटिंग को अपग्रेड करने पर बहक गया। हकीकत यह है कि भारत सरकार के बांडों की रेटिंग मूडीज ने पिछले महीने 20 दिसंबर को ही बढ़ा दी थी। इसलिए, रुपया जब पिछले छह महीनों में डॉलर के सापेक्ष करीब-करीब 25 फीसदी कमजोर हो चुका है तो विदेशी मुद्रा रेटिंग का बढ़ना तय था। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की मूलभूत स्थिति में रातोंरात कोई तब्दीली नहीं आई है।

एक और एफआईआई ब्रोकिंग हाउस ने एक खास स्टॉक के मूल्य की रेटिंग 60 रुपए से घटाकर 19 रुपए कर दी। लेकिन उसने ऐसा तब किया, जब वह स्टॉक पहले ही 18 रुपए पर आ चुका था। मजेदार बात यह है कि उसने वित्त वर्ष 2013 व 2014 में कंपनी की अनुमानित आय में कोई खास बदलाव नहीं किया है। इससे दो सवाल उठते हैं। एक, भले ही उनके पास बेहतर कौशल व सुविधाएं हैं. लेकिन उन्हें किसी स्टॉक को 60 रुपए से गिराकर 19 रुपए की कचरा स्थिति तक लाने में इतना वक्त कैसे लग गया कि वह खुद ही उस स्तर पहुंच गया? वह भी तब, जब कंपनी की बिक्री व आय के अनुमान को ज्यादा न छेड़ा गया हो। दो, उसी ब्रोकर फर्म को अपनी रिपोर्ट जारी करने के बाद इस स्टॉक के खरीदार कैसे मिल गए?

हमें लगता है कि यह निवेशकों के दिमाग में गलत धारणा भरने और उन्हें गुमराह करने का सरासर विकृत तरीका है। बेहद घटिया हरकत है यह। लेकिन क्या कीजिएगा! भारतीय बाजार ऐसे ही चलता है। भारत में ऐसा कोई कायदा-कानून नहीं है जो राय बदलने पर एनालिस्टों को कठघरे में खड़ा कर सके। यह भी होता है कि अपने यहां एक ही फर्म की ब्रोकिंग व रिसर्च शाखाएं उल्टी बात कहती हैं। इस बात की पुष्टि कुछ ब्रोकिंग हाउसों के प्रतिनिधियों के इंटरव्यू से की जा सकती है। इसके पीछे तर्क यह दिया जाता है कि ब्रोकिंग व रिसर्च अलग शाखाएं हैं और कानून किसी स्टॉक के बारे में विपरीत राय रखने की मनाही नहीं करता।

निवेशक रिसर्च नोट को इस भरोसे के साथ स्वीकार करते हैं कि इससे उन्हें लाभ होगा। लेकिन बहुत बार स्टॉक्स रिसर्च की सिफारिश से उल्टी दिशा में चले जाते हैं। हालांकि, रिसर्च का निशाना गलत हो सकता है और स्टॉक्स उसके अनुरूप नहीं चल सकते। लेकिन जारी करनेवाले की निष्ठा असंदिग्ध होनी चाहिए। इसे ही तो प्रोफेशनलिज्म कहा जाता है। इस सारी हकीकत को देखने-समझने के बाद विदेशी निवेशकों के बीच स्वतंत्र रिसर्च की मांग बढ़ रही है। इसलिए आज निवेशकों को शिक्षित करने की अनिवार्य जरूरत है ताकि वे मुफ्त की रिसर्च के झांसे में न आकर खुद अपना होमवर्क कर सकें।

बाजार के तलहटी पर पहुंचने की प्रक्रिया का सीधा वास्ता मूलभूत कारकों के बदलने से है। हम पहले ही कह चुके हैं कि बाजार के तलहटी पर पहुंचने के संकेत साफ दिखने लगे हैं। वैसे भी बाजार अर्थव्यवस्था की वास्तविक हालत छह महीने पहले ही महसूस कर लेता है। रुपए का आगामी महीनों में मजबूत होना भी तय है। यह पहले 50 पर और फिर 48 तक आ जाएगा। खाद्य मुद्रास्फीति का ऋणात्मक होना, गुरुवार को आनेवाले आईआईपी के आंकड़े और 16 जनवरी को दिसंबर की सकल मुद्रास्फीति की तस्वीर अर्थव्यवस्था के सुधरते मूलाधार पर थोड़ी रौशनी डाल सकती है।

बाजार के बढ़ने का खास खटका होगा, रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती। वैसे, वक्त ही मांग यही है। लेकिन रिजर्व बैंक केवल दिसंबर की मुद्रास्फीति के आधार पर कोई कदम नहीं उठा सकता। फिर भी गुंजाइश इस बात की है कि अगर उसे लग गया कि नई फसल के आने और जिंसों के दाम घटने से मुद्रास्फीति गिरनेवाली है तो वह पहले ही ब्याज दरें घटा सकता है।

इस दरमियान, जब तक मूलभूत कारकों में बदलाव नहीं आता, तब तक हम वास्तव में बाजार में ली गई पोजिशन से संचालित होते रहेंगे। बाजार को दिसंबर के अच्छे होने और जनवरी के बुरे होने की अपेक्षा थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। साथ ही साथ सारे लोगों का दांव गलत पड़ गया क्योंकि सभी पंटर, एचएनआई व ट्रेडर शॉर्ट सौदों में फंस गए। निफ्टी में 4820 प्रतिरोध का पहला स्तर था जो कल टूट गया और पोजिशन शॉर्ट से बदलकर लांग कर दी गईं। ऐसा गुरुवार को इनफोसिस के नतीजों और आईआईपी के आंकड़े के आने से ठीक एक दिन पहले हुआ है। इसलिए पूरे आसार इस बात के हैं कि इनफोसिस के नतीजों के बाद बाजार गिरेगा और निफ्टी वापस 4775 पर चला जाएगा। वहां इसे फिर समर्थन मिलेगा और यह फिर से उठने लगेगा। इसी के हिसाब से अपना दांव तय करें।

भूखा दिमाग खुद को ही खाने लगता है। इसीलिए कहा भी गया है कि खाली दिमाग शैतान का घर।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं पड़ना चाहता। इसलिए अनाम है। वह अंदर की बातें आपके सामने रखता है। लेकिन उसमें बड़बोलापन हो सकता है। आपके निवेश फैसलों के लिए अर्थकाम किसी भी हाल में जिम्मेदार नहीं होगा। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का कॉलम है, जिसे हम यहां आपकी शिक्षा के लिए पेश कर रहे हैं)

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