कोई कंपनी जब टी ग्रुप में डाल दी जाती है तो उसमें उसी दिन डिलीवरी के कारण लिक्विडिटी एकदम सूख जाती है। हो सकता है कि वहां पड़े-पड़े कोई शेयर किसी दिन एकदम इल्लिक्विड हो जाए, मतलब उसमें कोई खरीद-फरोख्त हो ही नहीं। बाजार नियामक सेबी और हमारे एक्सचेंज इसे लिस्टेड कंपनियों को सजा देने के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन ऐसा बी ग्रुप की किसी अच्छी-खासी कंपनी के साथ होने लगे तो आप क्या कहेंगे? जी,औरऔर भी

हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) का धंधा एकदम सीधा सरल है। पहले हमारे बाप-दादा रिटायर होने के बाद ही घर बना पाते थे। लेकिन आज 30-35 साल के नौकरीपेशा लोग भी मुंबई व दिल्ली जैसे शहर में अपना घर बना ले रहे हैं तो इसे सुगम बनाने और इस ख्वाहिश को बिजनेस म़ॉडल बनाने का श्रेय एचडीएफसी के संस्थापक हंसमुख ठाकुरदास पारेख को जाता है। 1977 में उन्होंने आम मध्य वर्ग के लोगों को हाउसिंग फाइनेंस देनेऔरऔर भी

हमने पिछले हफ्ते जो भी कहा, सच हुआ। पूरा बाजार अक्टूबर को अशुभ महीना बताता रहा। कहता रहा कि निफ्टी 3700 तक गिर जाएगा। लेकिन हमने कहा कि यह राहत का महीना है और निफ्टी 5300 तक चला जाएगा। फिलहाल हम 5140 तक पहुंच चुके हैं और कल सोमवार को बाजार के अच्छी बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। हो सकता है बाजार 5200 के ऊपर खुले। मान लीजिए कि अब हमारा 5300 का लक्ष्य ज्यादाऔरऔर भी

सामाजिक जीवन और प्रकृति में बिंदासपना चलता है। बल्कि सच कहा जाए तो जो रिस्क उठाते हैं, जीवन का असली आनंद वही लोग उठा पाते हैं। महाभारत में कृष्ण यही तो मनोभूति बना रहे होते हैं, जब वे अर्जुन से कहते हैं कि युद्ध में जीत गए तो धरती के सुखों का भोग करोगे और वीरगति को प्राप्त हो गए तो स्वर्ग का आनंद लूटोगे। लेकिन यह मानसिकता शेयर बाजार में नहीं चलती। यहां भावना में आंखऔरऔर भी

हमारे शेयर बाजार और यहां के उस्तादों की बलिहारी है। जो कंपनी सिर्फ एक खनिज, कोयला निकालती है, उस कोल इंडिया का शेयर 34.54 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है और जो कंपनी लौह अयस्क ही नहीं, तांबा, रॉक फॉस्फेट, लाइमस्टोन, डोलोमाइट, जिप्सम, टिन, टंगस्टेन, बेंटानाइट और मैग्नेसाइट से लेकर हीरे तक का खनन करती है, उसका शेयर मात्र 14.66 के पी/ई पर डोल रहा है। वह भी तब, जब कर्नाटक में अवैध खनन परऔरऔर भी

सामाजिक जीवन में आप क्या हैं, इससे ज्यादा फर्क इस बात से पड़ता है कि लोगबाग आपके बारे में क्या धारणा रखते हैं। शेयर बाजार में भी कमोबेश यही होता है। बाजार को लग रहा है कि उजाला, मैक्सो, एक्सो, जीवा और फैब्रिक स्पा जैसे ब्रांडों से ग्राहकों के बीच धूम मचानेवाली कंपनी ज्योति लैब्स का जर्मन कंपनी हेंकेल की भारतीय शाखा को खरीदने का फैसला गलत है तो वह इसे सही मानने को तैयार ही नहींऔरऔर भी

देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी इनफोसिस ने उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए तो दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद निवेशकों के चेहरे खिल गए और उसके शेयर एकबारगी 6.17 फीसदी उछल गए। लेकिन इसके साथ ही थोड़ी बिकवाली भी शुरू हो गई तो शेयर बाद में थोड़ा नीचे आ गए। इनफोसिस ने चालू वित्त वर्ष 2011-12 की सितंबर तिमाही में समेकित रूप से 8099 करोड़ रुपए की आय पर 1906 करोड़ रुपएऔरऔर भी

एक मोटी-सी बात गांठ बांध लें कि शेयरों का धंधा दुनिया का इकलौता धंधा है जो अकेले किया जाता है। दूसरों के चक्कर में पड़े तो समझिए कि खटिया खड़ी, बिस्तरा गोल। आप इस बात की भी तस्दीक करेंगे कि चैनलों या अखबारों में दी गई एनालिस्टों की दस में आठ सलाहें गलत होती हैं। इसलिए हमारी कोशिश आपको ‘चुटकी भर टिप्स, मुठ्ठी भर मंत्र’ देने की है ताकि आप अपने फैसले खुद कर सकें। हमारी सलाहऔरऔर भी

आप से यह साझा करने में मुझे कोई हर्ज नहीं लगता कि मैं भी एक छोटा निवेशक हूं। साल 2005 से निवेश करके सीखने-समझने की कोशिश में लगा हूं। हमेशा समझदारी से, पढ़-लिखकर निवेश करता हूं। खुद के फैसले पर कमाया है। औरों के कहने पर घाटा खाया है। पहले बड़े नामों पर भरोसा करता था। अब नहीं करता क्योंकि दूध का जला छाछ भी फूंककर पीता है। इकनॉमिक्स टाइम्स की इनवेस्टर गाइड में पहले एक इनसाइडरऔरऔर भी