विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) स्थानीय ब्रोकरों के साथ मिलाकर भारतीय शेयर बाजार को नचाने के लिए कंपनियों के जीडीआर इश्यू तक का इस्तेमाल करते हैं। यह ऐतिहासिक खुलासा पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने पूरे साक्ष्यों के साथ किया है। इस सिलसिले में बुधवार को सुनाए गए आदेश में सेबी ने पांच एफआईआई व उनके सब-एकाउंट और पांच ब्रोकरेज फर्मों पर रोक लगा दी है। साथ ही कहा है कि इस खेल में बिचौलिये की भूमिका निभानेवालीऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने एक बार फिर वही किया। ब्याज दर बढ़ाकर मुद्रास्फीति को थामने का आक्रामक अंदाज बनाए रखा। इससे तो यही लगता है कि मंदड़िए फिर से हमला करने की कोशिश करेंगे क्योंकि पिछले दो दिनों वे अपनी शॉर्ट पोजिशन काट चुके हैं। फिर भी बाजार का मिजाज कुल मिलाकर धीरे-धीरे तेजी का होता जा रहा है। अब तो निफ्टी के 4000 या इससे भी नीचे जाने की भविष्यवाणी करनेवाले एनालिस्ट भी अपनी राय बदलकर गिरनेऔरऔर भी

बाजार दो दिन की हिचकी के बाद फिर बढ़ गया। सेंसेक्स में 1.47 फीसदी तो निफ्टी में 1.45 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। लेकिन अभी यह कहना बहुत जल्दबाजी होगी कि बाजार सबसे निचले धरातल पर पहुंचने के बाद उठने लगा। हालांकि न्यूनतम स्तर पर पहुंचने के संकेत साफ नजर आने लगे हैं। निवेशक समुदाय एक तरफ से केवल पुट ऑप्शन यानी बेचने के अधिकार वाले ऑप्शन ही खरीद रहा है। इस महीने इस तरह केऔरऔर भी

बाजार ने कल साबित करने की कोशिश की कि अमेरिकी बाजार से हमारा कोई वास्ता नहीं रह गया है, जबकि ग्लोबल होती जा रही दुनिया का सच यह नहीं है। दरअसल बाजार के महारथियों ने कुछ एफआईआई की मदद से चुनिंदा स्टॉक्स को खरीदकर बनावटी माहौल बनाने की कोशिश की थी। खैर, कल जो हुआ, सो हुआ। आज दोपहर करीब डेढ़ बजे के बाद बाजार ने बढ़त पकड़ ली तो कारोबार के अंत तक सेंसेक्स 0.89% बढ़करऔरऔर भी

केईसी इंटरनेशनल। अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी रखनेवाली आरपीजी समूह की मुख्य कंपनी। 40-45 फीसदी धंधा भारत से, बाकी बाहर से। करीब महीने भर पहले 400 करोड़ रुपए के नए ऑर्डर मिले। उससे हफ्ते भर पहले जून 2011 की तिमाही के नतीजों से सामने आया कि उसकी बिक्री 20.9 फीसदी और शुद्ध लाभ 25.4 फीसदी बढ़ा है। तब तक उसके पास 8116 करोड़ रुपए के अग्रिम ऑर्डर थे। अब 8516 करोड़ के हो गए हैं। साल भर पहले अमेरिका मेंऔरऔर भी

यूटीआई म्यूचुअल फंड में चेयरमैन व प्रबंध निदेशक का पद इस साल फरवरी में यू के सिन्हा के पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी का चेयरमैन बन जाने के बाद से ही खाली पड़ा है। इसकी खास वजह है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की निजी सलाहकार ओमिता पॉल इस पद पर अपने भाई जितेश खोसला को बैठाने पर अड़ी हुई हैं, जबकि यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी द्वारा बनाई गई सर्च कमिटी ने खोसला को अनुपयुक्त ठहरा दियाऔरऔर भी

सोमवार को रिजर्व बैंक ने नए बैंकों को लाइसेंस देने के नियमों का खाका पेश किया। मंगलवार को सहारा इंडिया समूह की पैरा-बैंकिंग कंपनी सहारा इंडिया फाइनेंशियल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने घोषणा कर दी कि उसके पास जून 2011 तक जमाकर्ताओं के कुल 73,000 करोड़ रुपए जमा है, जिसे वह इसी साल दिसंबर वापस कर देगी और उसके बाद उसके ऊपर एक पैसे की भी देनदारी नहीं बचेगी, जबकि रिजर्व बैंक ने उसे इसके लिए 30 जून 2015औरऔर भी

बाजार उम्मीद के मुताबिक 4730 से सुधरकर 5001 तक आ चुका है। इसके जल्दी ही 5080 तक चले जाने की संभावना है क्योंकि अब भी यह ओवरसोल्ड अवस्था में है। लेकिन उसके बाद इसमें इस सिरे से उस सिरे तक की उछल-कूद शुरू होगी। एक सिरा 4900 का है तो दूसरा 5240 का। उसी के बाद हम राय बनाएंगे कि सारे मंदड़ियों की मान्यता के अनुरूप यह 4000 तक जाता है कि नहीं। मंदड़ियों ने निफ्टी मेंऔरऔर भी

खबर आई है कि पिछले हफ्ते पूंजी बाजार के 13 उस्तादों ने मुंबई में जुहू के फाइव स्टार होटल में एक मीटिंग की जिसमें तय किया गया कि उन्हें आगे कैसे और क्या करना है। इस मीटिंग में कुछ एफआईआई ब्रोकरों से लेकर प्रमुख फंड मैनेजरों व ऑपरेटरों ने शिरकत की। उनके बीच जो भी खिचड़ी पकी हो, लेकिन इससे इतना तो साफ हो गया है कि वे एक कार्टेल की तरफ काम कर रहे हैं जोऔरऔर भी

हॉलैंड की वित्तीय सेवा कंपनी एगॉन बहुत समय से पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी से गुजारिश कर रही थी कि भारत में उसके एगॉन म्यूचुअल फंड का लाइसेंस रद्द कर उसे मुक्ति दे दी जाए। सेबी ने गुरुवार को उसकी यह गुजारिश पूरी कर दी। सेबी ने उनका पंजीकरण रद्द कर दिया है और कहा है कि एगॉन भारत में म्यूचुअल फंड का धंधा अब नहीं कर सकती। हालांकि यह महज एक कागजी खानापूर्ति या औपचारिकता हीऔरऔर भी