न शॉर्ट का शोर, ना लांग का लफड़ा

बाजार दो दिन की हिचकी के बाद फिर बढ़ गया। सेंसेक्स में 1.47 फीसदी तो निफ्टी में 1.45 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। लेकिन अभी यह कहना बहुत जल्दबाजी होगी कि बाजार सबसे निचले धरातल पर पहुंचने के बाद उठने लगा। हालांकि न्यूनतम स्तर पर पहुंचने के संकेत साफ नजर आने लगे हैं। निवेशक समुदाय एक तरफ से केवल पुट ऑप्शन यानी बेचने के अधिकार वाले ऑप्शन ही खरीद रहा है।

इस महीने इस तरह के ऑप्शंस का वोल्यूम 65 फीसदी की जबरदस्त बढ़त ले चुका है जबकि बहुत सारी बुरी खबरें अब भी लाइन लगाए खड़ी हैं। यूरो संकट, ब्याज दरों में वृद्धि, राजकोषीय घाटे का लक्ष्य से चूक जाना वगैरह-वगैरह। ये बातें मानसून और शेयरों के स्वामित्व की स्थिति जैसे अच्छे कारकों को बेअसर किए दे रही हैं।

साल 2008 में सेबी ने पी-नोट के उधार सौदों पर प्रतिबंध लगा दिया था क्योंकि इनका इस्तेमाल बाजार में नैकेड शॉर्ट पोजिशन बनाने में किया जा रहा था। नैकेड शॉर्ट पोजिशन उसे कहते हैं कि जब डिलीवरी का कोई इंतजाम किए बगैर शॉर्ट सेलिंग की जाती है। हमारे सूत्रों का कहना है कि इस प्रतिबंध के अब भी लागू होने के बावजूद बहुत से एफआईआई शॉर्ट सेलिंग करने के इच्छुक दूसरे एफआईआई को भारी मात्रा में उधार दे रहे हैं। कुछ एफआईआई प्रमुखों से बातचीत से हमें पता चला है कि वे पी-नोट के तहत पड़े शेयरों को खरीदने को तैयार हैं। लेकिन अब कोई बेचनेवाला ही नहीं बचा है क्योंकि अधिकांश लोग पहले ही अपनी झोली खाली कर चुके हैं।

मेरी मजबूत धारणा है कि बाजार अब ऊर्ध्व दिशा का रुख कर रहा है। यह मेरी व्यक्तिगत राय और मान्यता है। यह फिलहाल ओवरसोल्ड अवस्था में है। हालांकि कुछ लोग कहे जा रहे हैं कि सेंसेक्स 12,000 तक चला जाएगा तो कुछ कह रहे हैं कि यह 22,000 तक जानेवाला है। मेरा कहना है कि आनेवाले दिनों में चाहे कुछ भी हो जाए, चाहे कैसी भी बुरी घटना हो जाए, हर हाल में शॉर्ट सेलिंग से बचना चाहिए।

मुद्रास्फीति की दर आगे भी 10 फीसदी के आसपास बनी रह सकती है। रिजर्व बैंक एक बार फिर शुक्रवार को वित्त मंत्री की इच्छा के खिलाफ जाकर ब्याज दर चौथाई फीसदी बढ़ा सकता है। फिर भी ट्रेडर बंधुओं से मेरा कहना है कि शॉर्ट सेलिंग न करें, भले ही निफ्टी वापस 4700 तक गिर जाए क्योंकि हर दिन का थोड़ा-थोड़ा फायदा बहुत जल्दी ही बड़ी आफत का सबब बन जाएगा।

अगर आप किसी वजह से ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो दो हफ्ते तक बाजार से एकदम मुंह फेर लीजिए। न शॉर्ट का शोर, न लांग का लफड़ा। लेकिन निवेशकों से मेरा कहना है कि जो भी आपको पसंद आए, कहीं से भी नोट जुटाकर उसे खरीद डालें।

जो सत्य की खोज में लगे हैं, उन पर यकीन करो। जो इसे पाने का दावा करते हैं, उन पर संदेह करो।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का पेड-कॉलम है, जिसे हम यहां मुफ्त में पेश कर रहे हैं)

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