दोपहर साढ़े बारह बजे तक सेंसेक्स जब दो सालों के न्यूनतम स्तर 15478.69 और निफ्टी 4640.95 तक जा गिरा तो हर तरफ कोहराम मच गया। गनीमत है कि उसके बाद स्थिति संभलने लगी और सेंसेक्स अंततः 2.27 फीसदी की गिरावट के साथ 15,699.97 और निफ्टी 2.20 फीसदी की गिरावट के साथ 4706.45 पर बंद हुआ। असल में सेंसेक्स आज सुबह खुला ही करीब-करीब 100 अंक गिरकर, जबकि इतनी कमजोर शुरुआत की कोई ठोस वजह नहीं थी। इसनेऔरऔर भी

भारतीय कंपनियों ने इस कैलेंडर वर्ष 2011 में अब तक करीब 30 अरब डॉलर विदेशी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) से जुटाए हैं। भारतीय मुद्रा में यह कर्ज लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपए का बैठता है। लेकिन जनवरी से अब तक डॉलर के सापेक्ष रुपए के 18 फीसदी कमजोर हो जाने से कंपनियों पर इस कर्ज का बोझ 5.40 अरब डॉलर या 27,000 करोड़ रुपए बढ़ गया है। ब्रोकरेज फर्म एसएमसी ग्लोबल सिक्यूरिटीज के रिसर्च प्रमुख व रणनीतिकार जगन्नाधमऔरऔर भी

देश का बढ़ता व्यापार घाटा, विदेशी पूंजी की कम आवक, नतीजतन चालू खाते का बढ़ जाना, ऊपर से पेट्रोलियम तेल रिफाइनिंग व आयात पर निर्भर दूसरी कंपनियों में डॉलर खरीदने के लिए मची मारीमारी ने मंगलवार को डॉलर के सामने रुपए को ऐतिहासिक कमजोरी पर पहुंचा दिया। सुबह-सुबह एक डॉलर 52.73 रुपए का हो गया। रिजर्व बैंक की संदर्भ दर भी 52.70रुपए प्रति डॉलर रखी गई थी। हालांकि शाम तक रुपए की विनिमय दर में थोड़ा सुधारऔरऔर भी

कोई भी कह सकता है कि लगातार नौ सत्रों तक घाटा खाने के बाद सेंसेक्स का उठना लाजिमी था और इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद तो मरी हुई बिल्ली भी थोड़ा उछलती है। लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता। जब कुछ भी सामान्य नहीं रहा तो बेचारे निवेशक गफलत में पड़ गए कि सब कुछ बाहर से आ रही बुरी खबरों का नतीजा है। तभी अचानक उन्हें अहसास होता है कि ऐसा नहीं था तो झटका लगनाऔरऔर भी

रुपए में कमजोरी का सिलसिला जारी है। डॉलर के सापेक्ष उसकी विनियम दर सोमवार को दोपहर तीन बजे के आसपास 1/52 रुपए से नीचे चली गई। 5 मार्च 2009 के बाद पहली बार रुपया इतना नीचे गिरा है। शाम पांच बजे तक एमसीएक्स एसएक्स में एक डॉलर की दर 52.27 रुपए हो गई, वहीं दिसंबर फ्यूचर्स का भाव 52.50 रुपए रहा है। अगर बाजार की मानें तो जून 2012 तक डॉलर/रुपए की विनिमय दर 53.20 रुपए होऔरऔर भी

कमजोर होती यूरोप मुद्रा यूरो और देश के भीतर कॉरपोरेट क्षेत्र व तेल कंपनियों की तरफ से डॉलर की मांग बढ़ती जा रही है तो रुपया गिरता चला जा रहा है। मंगलवार को एक डॉलर 50.76 रुपए का हो गया है जो 31 मार्च 2009 के बाद के 32 महीनों में रुपए का सबसे कमजोर स्तर है। सोमवार को यह डॉलर के सापेक्ष 50.285/295 रुपए पर बंद हुआ था। मंगलवार को रिजर्व बैंक की संदर्भ दर 50.5645औरऔर भी

बीते हफ्ते बाजार, बीएसई सेंसेक्स 1000 से ज्यादा अंक टूट गया। हालांकि हमारा मानना है कि ऐसा होना लाजिमी नहीं था। यह कुछ फंडों द्वारा घबराहट में निकलने के लिए की गई बिकवाली का नतीजा था। वैसे भी इन फंडों मे हफ्ते भर पहले ही घोषत कर दिया था कि उन्हें अपनी कुछ स्कीमों को समेटना है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने वही किया, जिसकी उम्मीद थी। लेकिन उसके इस संकेत ने अमेरिकी बाजारों परऔरऔर भी

भारतीय रुपया शुक्रवार को डॉलर के सापेक्ष कमजोर होकर 49.825 रुपए तक चला गया। लेकिन बाद में 49.50 रुपए पर आकर थम गया। रिजर्व बैंक की संदर्भ दर आज डॉलर के सापेक्ष 49.663 रुपए रही। जानकारों का कहना है कि रिजर्व बैंक अगर बाजार में डॉलर नहीं बेचता तो रुपए की विनिमय दर कभी भी 50 रुपए के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर सकती है। लेकिन रिजर्व बैंक फिलहाल ऐसे किसी भी हस्तक्षेप के लिए तैयार नहींऔरऔर भी

हां, यह सच है कि कैश सेगमेंट में कल एफआईआई की शुद्ध 1305.55 करोड़ रुपए की भारी-भरकम बिकवाली घरेलू निवेशक संस्थाओं (डीआईआई) की 743.47 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीद पर भारी पड़ी और बाजार एकदम धराशाई हो गया। हालांकि कैश सेगमेंट की स्थिति तो बिना जहर वाले सांप जैसी है। सरकार पहले ही फिजिकल सेटलमेंट की सहूलियत न देकर बाजार का जहर निकाल चुकी है और फिलहाल किसी में दम नहीं है कि वह भारतीय हलके मेंऔरऔर भी

डॉलर के सापेक्ष रुपए की गिरावट ने अपना असर दिखा ही दिया। सरकारी तेल कंपनियों ने कमजोर रुपए से बढ़ी आयात की लागत की भरपाई के लिए गुरुवार-शुक्रवार की मध्य-रात्रि से पेट्रोल का दाम 3.14 रुपए प्रति लीटर बढ़ाने का फैसला कर लिया है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम वन हिंदुस्तान पेट्रोलियम के आला अफसरों ने पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ बैठक के बाद पेट्रोल के मूल्य बढ़ाने की घोषणा की। इससे पहले 15 मई को पेट्रोल के दामऔरऔर भी