खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 7 मई को समाप्त हुए सप्ताह में घटकर डेढ़ साल के निचले स्तर 7.47 फीसदी पर पर आ गई। साल भर पहले इसी दौरान खाद्य मुद्रास्फीति की दर 22.15 फीसदी थी। अभी खाद्य मुद्रास्फीति में कमी की खास वजह दाल, सब्जी और गेहूं की कीमतों में नरमी आना है। लेकिन विशेषज्ञों ने कहा कि गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी अब भी बनी हुई है जिससे रिजर्व बैंक ब्याज दरें और बढ़ा सकताऔरऔर भी

वेदांत समूह द्वारा केयर्न एनर्जी को अधिग्रहण करने के मुद्दे पर विचार करने के लिए मंत्री समूह की बैठक 27 मई को होगी, जबकि इस सौदे को पूरा करने की निर्धारित अंतिम तारीख 20 मई को समाप्त हो रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, “वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह की बैठक 27 मई को होगी जिसमें केयर्न एनर्जी द्वारा केयर्न इंडिया में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी वेदांत समूह को बेचने पर चर्चाऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी महंगाई की दर में मामूली गिरावट से भी उत्साहित हैं। उन्होंने भरोसा जताया है कि आनेवाले महीनों में मुद्रास्फीति और नीचे आएगी। उनका मानना है कि खाद्यान्नों के स्टॉक में बढ़ोतरी और मैन्यूफैक्चर्ड वस्तुओं की लागत घटने से महंगाई और घटेगी। मुखर्जी ने सोमवार को राजधानी दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, ‘‘अप्रैल में मैन्यूफैक्चर्ड वस्तुओं व खाद्य वस्तुओं, दोनों के दाम में गिरावट आई है। यह एक अच्छा रुख है।औरऔर भी

वित्त मंत्री और रिजर्व बैंक के गवर्नर दो ऐसी शख्सियतें हैं जिनका एक-एक बयान शेयर बाजार को प्रभावित कर सकता है। सावधानी हटी दुर्घटना घटी। जरा-सा गलत बयान दे दिया तो बाजार में पलीता लग सकता है। लेकिन पहले पी चिदंबरम और अब प्रणव मुखर्जी कह चुके हैं कि उन्हें बाजार का उठना-गिरना नहीं समझ में आता। पिछले हफ्ते 3 मई को करीब सवा तीन बजे शाम सालाना मौद्रिक नीति पेश किए जाने के बाद रिजर्व बैंकऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बीते वित्त वर्ष 2010-11 में तय लक्ष्य से भी अधिक कर-वसूली के लिए आयकर विभाग की पीठ थपथपाई और कहा कि 7.90 लाख करोड़ रुपए की अप्रत्याशित कर वसूली करके विभाग ने देश को वित्तीय मजबूती के रास्ते पर लाने में मदद दी है। सरकार ने 2010-11 में 7.90 लाख करोड़ रुपए का कर संग्रह किया जबकि 74,000 करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया। वित्त मंत्री ने केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड :सीबीडीटी:औरऔर भी

पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रस्ताव पर विचार के लिए मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह की बैठक से पहले प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम ने कहा है कि उपभोक्ताओं पर कम बोझ डालने के लिए सरकार को चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ानी चाहिए। एसोचैम ने रविवार को जारी बयान में कहा कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के अनुपात में ईंधन के मूल्य नहीं बढ़ाना चाहिए। बताऔरऔर भी

सेटलमेंट के चक्र के अंत में एक बार फिर बाजार में निराशा का आलम है। निफ्टी सुबह खुलने के कुछ देर बाद ही 5804 तक पहुंच गया। फिर 3 बजे तक गिरते-गिरते 5706 तक चला गया। हालांकि आखिरी आधे घंटे में उसमें सुधार देखा गया और यह 5749.50 पर बंद हुआ। लेकिन निफ्टी के जिस 5300 के स्तर को हम काफी पीछे छोड़ आए हैं, अब उसके फिर से वहां तक गिरने की बात हो रही है।औरऔर भी

प्रधानमंत्री से लेकर वित्त मंत्री तक भले ही लघु उद्योग (एमएसएमई) क्षेत्र का गुणगान करते रहते हैं। लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि सरकार अपनी सालाना 1,70,000 करोड़ रुपए की खरीद में से महज 4.5 फीसदी एमएसएमई क्षेत्र से खरीदती है। ऐसी हालत में सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने जोर दिया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को अपनी जरूरत की कम से कम 20 फीसदी खरीद लघु व मझोली इकाइयों से करनी चाहिए।औरऔर भी

रिजर्व बैंक ने महीने पर पहले ही मौद्रिक नीति की समीक्षा में कहा था कि मार्च 2011 में मुद्रास्फीति की दर 8 फीसदी रहेगी। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से लेकर मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु तक कहते रहे थे कि मार्च अंत तक मुद्रास्फीति पर काबू पा लिया जाएगा और यह 7 फीसदी पर आ जाएगी। लेकिन शुक्रवार को आए असली आंकड़ों के मुताबिक मार्च में मुद्रास्फीति की दर 8.98 फीसदी रही है। यह फरवरी महीने केऔरऔर भी