सेंसेक्स का 20,500 अंक पर पहुंचना और चालू वित्त वर्ष 2010-11 के अनुमानित लाभ के 21 पी/ई अनुपात पर ट्रेड होना निश्चित रूप से ऐसे पहलू हैं जिन पर निवेशकों को ध्यान देने की जरूरत है। बाजार की मौजूदा तेजी की खास वजह ज्यादा तरलता या लिक्विडिटी है। इसलिए हमें खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि यह तरलता कब तक रहेगी? अगले दो महीने में 77,000 करोड़ रुपए के आईपीओ आने हैं जो बाजार से भारीऔरऔर भी

कोल इंडिया के आईपीओ के मूल्य-निर्धारण ने एफआईआई निवेश के जमकर आने का माहौल बना दिया है। इस इश्यू में बाहर से कम से कम 75,000 करोड़ रुपए आने की उम्मीद है। अगर विदेशी निवेशकों को कोल इंडिया के आईपीओ में आवंटन नहीं मिला तो वे इसके शेयर लिस्टिंग होने के बाद बाजार से खरीदेंगे। अगर कोल इंडिया का शेयर लिस्टिंग पर बहुत महंगा हो गया तो बाहर से आया यह धन एनएचपीसी, आरईसी और एनटीपीसी कीऔरऔर भी

आपको 8000 अंक पर 15,000 के लक्ष्य के साथ खरीद की कॉल, इसके बाद फिर 15,000 अंक पर 20,000 के लक्ष्य के साथ खरीद की कॉल और फिर इसके बाद जब धन का प्रवाह अलग रंग दिखा रहा हो तब बिक्री की कॉल देने के लिए बड़ा कलेजा और बूता चाहिए। कलेजे के साथ आपको अपने ऊपर भरोसा व विश्वास होना चाहिए। साथ ही साथ इसके लिए बाजार की समझ भी जरूरी है। ब्रोकरों को तो हमेशाऔरऔर भी

हां, दुनिया के बाजारों ने भारतीय बाजार को एक और आवेग दिया जिससे निफ्टी फिर से 6215 तक चला गया। हालांकि वह एक बार 6248 के खतरे के निशान को भी छू गया था। लेकिन मैं अब भी निफ्टी के बारे में तेजी की धारणा पालने को तैयार नहीं हूं। मैं यही चाहूंगा कि मेरे साथ चलनेवाले भी इस मामले में पर्याप्त सावधानी बरतें। मैंने निफ्टी, ऑटो और बैंकिंग में बेचने की सलाह दी थी, लेकिन उसेऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी भले ही मानते हों कि देश में विदेशी पूंजी प्रवाह का बढ़ना चिंता की बात नहीं है। न ही वे मुद्रास्फीति के दबाव को लेकर चिंतित हैं। लेकिन रिजर्व बैंक इन दोनों ही मुद्दों को लेकर गंभीर है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने मंगलवार को मुंबई में प्राइवेट इक्विटी इंटरनेशनल इंडिया फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि विदेशी पूंजी का यूं बहते चले आना खतरे की आशंका पैदा करऔरऔर भी

देश में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश का आना जारी है। इस साल जनवरी से अब तक भारतीय शेयर बाजार में एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशक) 46,196.83 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश कर चुके हैं। सोमवार को ही उन्होंने शेयर बाजार में 1264.11 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया, जबकि घरेलू निवेशक संस्थाएं तेजी के इस माहौल में बेचकर मुनाफा कमा रही है और उनकी शुद्ध बिक्री 797.83 करोड़ रुपए की रही। विदेशी निवेश के आने से रुपया भी मजबूतऔरऔर भी

सार्वजनिक अस्पतालों को चलाने के लिए सरकार को सब्सिडी देनी पड़ती है, जबकि निजी अस्पताल महंगे होने के बावजूद लोगों से पटे रहते हैं और करोड़ों का मुनाफा कमाते हैं। यह मानसिकता और पद्धति का सवाल है। ब्रिटेन में सब्सिडी चलती है तो हेल्थकेयर सिस्टम पिटा पड़ा है। जर्मन में स्वास्थ्य बीमा चलता है तो हेल्थकेयर सिस्टम चकाचक है। भारत में सब घालमेल है। लेकिन ‘जान है तो जहान है’ और परिजनों के लिए कुछ भी करनेवालेऔरऔर भी

हमें यकीन नहीं था कि बाजार खुद को ऊपरी स्तर पर टिकाए रख पाएगा, फिर भी हमने शॉर्ट सौदे काटने को क्यों कहा? यह एक बड़ा सवाल है और आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों है? तो जवाब है कि बारिश ने भारत की विकासगाथा को धुंधला कर दिया है। राष्ट्रमंडल खेलों की भयंकर खामियों व घपलों ने विदेश में भारत और भारतीय राजनीति की छवि को दागदार बना दिया है। अभी देश के जीडीपी कीऔरऔर भी

बाजार ने तेजी का एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया। सेंसेक्स 20,000 के पार तो निफ्टी 6000 के पार जाकर बंद हुआ। इस मौके पर मैं अपनी खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकता। फिर भी आपको चेतावनी देने से खुद को नहीं रोक पा रहा। एक बात जान लें कि जुनून जितना तल्ख होगा, करेक्शन उतना ही गहरा होगा और आपकी पूरी बैलेंस शीट चंद दिनों में साफ हो सकती है। मगर, शॉर्ट सौदे करते वक्तऔरऔर भी