सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के बेल्लारी जिले की 19 खदानों पर रोक लगा दी है कि वहां से लौह अयस्क का खनन या उसका लाना-ले जाना नहीं हो सकता। कोर्ट ने यह फैसला शुक्रवार को सुनाया। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश एस एस कपाडिया की अध्यक्षता वाली विशेष खंडपीठ ने कहा कि यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय अधिकारप्राप्त समिति (सीईसी) ने जिन 68 अन्य खदानों को अवैध ठहराया है, उनके खिलाफ भी आदेश जारी कियाऔरऔर भी

एक महत्वपूर्ण आदेश में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार किसी भी उत्पाद के निर्यात पर पिछली तिथि से प्रतिबंध नहीं लगा सकती। न्यायालय ने यह फैसला सुनाते हुए एक निजी कंपनी को दूध पाउडर के निर्यात की अनुमति दे दी। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के प्रतिबंध संपन्न हो चुके सौदों पर लागू नहीं किए जा सकते, जहां लेटर फ क्रेडिट या साख पत्र प्रतिबंध लगाए जाने से पहले ही जारी हो चुकेऔरऔर भी

यूरोप में जारी वित्तीय संकट के बावजूद भारत ने निर्यात के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन किया है। मार्च में खत्म वित्त वर्ष 2010-11 में देश का निर्यात 37.5 फीसदी बढ़कर 245.9 अरब डॉलर हो गया। अकेले मार्च माह में निर्यात 43.9 फीसदी बढ़कर 29.1 अरब डॉलर रहा है। वाणिज्य व उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने मंगलवार को ये आंकड़े जारी किए। उन्होंने कहा कि देश का निर्यात पहली बार 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा है। उल्लेखनीयऔरऔर भी

स्टील बनाने का मुख्य कच्चा माल आइरन ओर है। लेकिन देश में स्टील का उत्पादन मांग से कम होने के बावजूद हम आइरन ओर का जमकर निर्यात करते हैं। यहां तक कि भारत दुनिया में आइरन ओर का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। इस्पात मंत्रालय की तरफ से दी गई अद्यतन जानकारी के अनुसार अप्रैल-दिसम्‍बर 2010 के दौरान देश में 464.40 लाख टन स्टील घरेलू इस्‍तेमाल के लिए उपलब्‍ध था, जबकि इसकी मांग 518 लाख टनऔरऔर भी

निर्यात शुल्क बढने से भारत से लौह अयस्क का निर्यात चालू वित्त वर्ष 2011-12 में करीब 25 फीसदी घटकर नौ करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह अनुमान खनन उद्योग ने लगाया है। सरकार ने अब लौह अयस्क पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया है। इसके अलावा इस साल निर्यातकों को कई और बाधाओं का सामना करना पड़ा है। लौह अयस्क का निर्यात कर्नाटक द्वारा निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के कारण आठ माह सेऔरऔर भी

देश के निर्यात कारोबार में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है और फरवरी 2011 में इसमें 50 फीसदी की धमाकेदार वृद्धि दर्ज की गई है। इसकी बदौलत वित्त वर्ष के शुरुआती 11 महीनों में कुल निर्यात 208 अरब डॉलर से अधिक हो गया, जबकि पूरे साल का लक्ष्य 200 अरब डॉलर का था। अब उम्मीद बंधी है कि वर्ष 2010-11 में कुल निर्यात 235 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय द्वारा शुक्रवार कोऔरऔर भी

गन्ना पेराई वर्ष 2010-11 में पहली अक्टूबर से 15 फरवरी तक देश में चीनी उत्पादन 1.34 करोड़ टन रहा है। यह पिछले वर्ष की इसी अविध के 1.15 करोड़ टन उत्पादन से 16 फीसदी ज्यादा है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट को बताया, ‘‘इस साल चीनी मिलों ने 15 फरवरी तक कुल 1.34 करोड़ टन चीनी का उत्पादन किया है। यह इससे पिछले साल की समान अवधि से 16 फीसदीऔरऔर भी

एचईजी लिमिटेड का शेयर (बीएसई – 509631, एनएसई – HEG) नई से नई तलहटी बनाता जा रहा है। नए साल में 12 जनवरी को वह 233.15 रुपए तक चला गया तो वो उसका 52 हफ्ते का न्यूनतम स्तर था। कल 18 जनवरी को वह इससे भी नीचे 218.50 तक जाकर नया न्यूनतम स्तर बना गया। हालांकि बंद हुआ है 225.25 रुपए पर। कंपनी में ऐसा क्या हो गया जो उसका स्टॉक इस तरह गोता लगाता जा रहाऔरऔर भी