नई सीरीज़ में वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी की विकास दर खींचकर 7.6% कर दी गई। लेकिन अर्थव्यवस्था का आकार छोटा करना पड़ा। एक दिन बाद ही अमेरिका ने ईरान पर हमला बोल दिया। कच्चे तेल के दाम बढ़ते चले गए। डॉलर के मुकाबले रुपया गिरता गया। भारत दुनिया में जापान व ब्रिटेन से नीचे छठे नंबर पर आ गया। अब पता चला है कि पिछले 12 सालों में आर्थिक विकास का मचाया गया हल्ला असल में विकास गाथा नहीं, बल्कि पतन की दास्तान है। वित्त वर्ष 2003-04 से 2025-26 तक के 22 सालों में देश का नॉमिनल जीडीपी 12.3% की सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ा था। यह दर 2013-14 से 2025-26 तक के 12 सालों में घटकर 10.1% पर आ गई। बीते वित्त वर्ष 2025-26 में तो यह 8.6% ही रही है। अगर मुद्रास्फीति के असर को हटाकर रीयल जीडीपी की बात करें तो उसकी विकास दर 2003-04 से 2025-26 तक के 22 सालों में 6.5% और 2013-14 से 2025-26 तक 12 सालों में 6.2% रही है। यही नहीं, वित्त वर्ष 2018-19 से 2025-26 तक मोदी सरकार के दूसरे चरण के पांच और तीसरे चरण के दो साल को मिलाकर सात साल में मात्र 5.4% रही है। यह लगभग वही विकास दर है जब भारत ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ के कारण दुनिया में ‘फ्रेजाइल फाइव’ देशों में आ गया था। आगे संकट है। अब गुरुवार का अभ्यास…
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