अमेरिकी अर्थव्यवस्था में छा रही सुस्ती और कुछ यूरोपीय देशों में ऋण संकट के बावजूद देश के निर्यात में अगस्त महीने के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस बार अगस्त महीने में निर्यात सालाना आधार पर 44.2 फीसदी बढ़कर 24.3 अरब डॉलर रहा है। वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर ने शुक्रवार को इन आंकड़ों को जारी होने के बाद संवाददाताओं को बताया कि लौह अयस्क को छोड़कर इंजीनियरिंग, रसायन व कपड़ा समेत अन्य सभी क्षेत्रों केऔरऔर भी

इस्पात उद्योग कुछ भी कहे, लेकिन इस्‍पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा की मानें तो लौह अयस्क निर्यात करना हमारी मजबूरी है क्योंकि हमारा लौह अयस्क उत्पादन घरेलू खपत का लगभग दोगुना है। जैसे, 2010-11 में देश मे इसकी कुल खपत 11.14 करोड़ टन थी, जबकि उत्पादन 20.811 करोड़ टन था। 2008-09 में तो लौह अयस्क का उत्पादन 21.296 करोड़ टन था, जबकि खपत मात्र 8.74 करोड़ टन ही थी। मंत्री महोदय ने बताया कि मौजूदा नीति केऔरऔर भी

देश के निर्यात में जुलाई माह के दौरान 81.8 फीसदी की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है और यह 29.3 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर ने राजधानी दिल्ली में गुरुवार को मीडिया को यह जानकारी दी। जुलाई में आयात 51.5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 40.4 अरब डॉलर का रहा है। माह के दौरान व्यापार घाटा 11.1 अरब डॉलर का रहा। खुल्लर का कहना था कि निर्यात का प्रदर्शन अच्छा रहा है। लेकिनऔरऔर भी

भारत को परमाणु बिजली के क्षेत्र में झाड़ पर चढ़ाने की कोशिश हो रही है क्योंकि जब बाकी दुनिया परमाणु बिजली को तौबा कर रही है तब भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल हैं जो इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का मंसूबा पाले हुए है और बाहर से परमाणु रिएक्टर आयात कर सकता है। लेकिन भारत में आम राय इसके खिलाफ न जाए, इसलिए ऐसा दिखाने की सायास कोशिश हो रही है कि भारत इसऔरऔर भी

एडीएफ फूड्स छोटी-सी कंपनी है। 20.38 करोड़ रुपए की पूंजी है जो दस रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में बंटी है। बाजार पूंजीकरण कोई खास नहीं, 126 करोड़ रुपए है। इसलिए स्मॉल कैप में गिनी जाती है। लेकिन काम जबरदस्त करती है। भारतीय स्वाद की मास्टर है। अचार, चटनी व मसालों से लेकर फ्रोजन फूड तक बनाकर निर्यात करती है। अशोका, कैमल, एयरोप्लेन, खानखामा, ट्रूली इंडियन और सोल इसके ब्रांड हैं। 95 फीसदी कमाई मध्य-पूर्व, अमेरिका, यूरोपऔरऔर भी

यकीनन, आप भी इस बात से इत्तेफाक करेंगे कि शेयर बाजार से पैसे कमाने का आदर्श तरीका है – सबसे कम भाव पर खरीदो और अधिकतम भाव पर बेचकर निकल जाओ। लेकिन व्यवहार में ऐसा हो नहीं पाता क्योंकि जब कोई शेयर अपने न्यूनतम स्तर पर होता है तब हमें लगता है कि यह तो डूब रहा है, अभी और नीचे जाएगा। वहीं, जब शेयर बढ़ रहा होता है तब हमें लगता है कि अभी और ऊपरऔरऔर भी

ग्लोबीकरण का शोर ज्यादा, सच्चाई कम है। अपना देश छोड़कर बाहर पढ़ने जानेवाले छात्रों की संख्या मात्र दो फीसदी है। अपनी मातृभूमि से अलग रहनेवाले लोगों की संख्या मात्र तीन फीसदी है। सीमाओं से बाहर व्यापार के लिए जानेवाले चावल की मात्रा केवल 7 फीसदी है। एस एंड पी 500 सूचकांक में शामिल कंपनियों के निदेशकों में विदेशियों की संख्या महज 7 फीसदी है। दुनिया के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का केवल 20 फीसदी हिस्सा निर्यात सेऔरऔर भी

सरकार हस्तशिल्प को लोकप्रिय बनाने के लिए टाटा समूह से याचना करने जा रही है। कपड़ा मंत्रालय खुद रतन टाटा को पत्र लिखकर अनुरोध करने जा रहा है कि वे देश भर में फैले वेस्टसाइड स्टोरों में कुछ जगह हस्तशिल्प की वस्तुओं को भी दे दें। बता दें कि वेस्टसाइड टाटा समूह का रिटेल स्टोर है जहां मुख्यतः रेडीमेड कपड़े व लाइफ स्टाइल से जुड़े उत्पाद बेचे जाते हैं। वेस्टसाइड के देश भर में लगभग 50 स्टोरऔरऔर भी

भारतीय निर्यातकों के लिए लोकप्रिय प्रोत्साहन स्कीम डीईपीबी (ड्यूटी इनटाइटलमेंट पासबुक स्कीम) का विस्तार किए जाने की वकालत करते हुए वाणिज्य मंत्री आनन्द शर्मा ने कहा है कि वे नई दिल्ली लौटकर इस मुद्दे को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के सामने उठाएंगे। शर्मा ने सोमवार को आदिस अबाबा (इथियोपिया) में यह बात कही। उन्होंने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट को बताया, ‘‘मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो यह कह रहे हैं कि हमारा निर्यात ऐसे स्तरऔरऔर भी

अच्छे उत्पादन के चलते भारत का मक्का निर्यात अक्तूबर को समाप्त होने वाले 2010-11 के विपणन वर्ष में 33 फीसदी बढ़कर 24 लाख टन रहने की उम्मीद है। इस दौरान रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन की संभावना है। अमेरिकी खाद्यान्न परिषद (यूएसजीसी) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 2009-10 के विपणन वर्ष (नवंबर से अक्तूबर) में 18 लाख टन मक्के का निर्यात किया था। यूएसजीसी के भारत स्थित प्रतिनिधि अमित सचदेव ने बताया कि भारत का मक्का निर्यातऔरऔर भी