मोदी सरकार भले ही चार्वाक के नाम पर प्रचारित दर्शन ऋणम कृत्वा, घृतम पीवेत पर चल रही है। लेकिन आम भारतीय कभी ऋण के फंदे में नहीं फंसना चाहता। वो बेहद मजबूरी में ही ऋण लेता है। मगर, सरकारी नीतियों का कमाल देखिए कि मोदीराज में आम भारतीय घरों पर चढ़ा ऋण आज भारत सरकार पर चढ़े ऋण की बराबरी करने जा रहा है। केंद्र में बैठी सरकार जितना कर्ज लेना चाहे ले सकती है क्योंकि उसेऔरऔर भी