देश में प्रति व्यक्ति आय 2009-10 में 46,492 रुपए रही है। यह साल भर पहले 2008-09 की प्रति व्यक्ति आय 40,605 रुपए से 14.5 फीसदी अधिक है। यह जानकारी सांख्यिकी व कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री एम एस गिल ने मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी। लेकिन यह जानकारी पुरानी है क्योंकि उन्हीं का मंत्रालय चालू वित्त वर्ष 2010-11 का भी अनुमान महीने भर पहले 7 फरवरी को जारी कर चुका है। उस समय बताया गयाऔरऔर भी

भारतीय लंदन में घर खरीदने में सबसे आगे हैं। दो साल पहले ही यह रुख दिखाई देने लगा था, पर अब यह हाउसिंग बाजार का एक स्थापित तथ्य बन चुका है कि भारतीय और अन्य विदेशी खरीदार लंदन में घर खरीदने में जुटे हैं। हालांकि ब्रिटेन के अन्य स्थानों पर मकानों की कीमतों में गिरावट आ रही है। लंदन के कुछ मुख्य प्रॉपर्टी डीलरों का कहना है कि अमीर भारतीय लंदन में घर खरीदने में काफी आगेऔरऔर भी

गुल टेकचंदानी को आपने देखा भी होगा, सुना भी होगा, अंग्रेजी और हिंदी के बिजनेस चैनलों पर। निवेश सलाहकार हैं, बाजार के विश्लेषक हैं। निवेश उनका धंधा है। लेकिन सबसे बड़ी बात है धंधे में बड़े बेलाग हैं, ईमानदार हैं। बताते हैं कि छात्र जीवन में ही सट्टे का चस्का लग गया था। 1980-81 के आसपास शेयर बाजार से इतना कमाया कि दक्षिण मुंबई में दफ्तर, गाड़ी, बंगला सब कुछ हो गया। पिता को बोले कि मुझेऔरऔर भी

।।प्रणव मुखर्जी।। भारत आज उस मुकाम पर है जहां कुछ भी करना या पाना असंभव नहीं लगता। साथ ही बहुत सारी चुनौतियां भी हमारे सामने हैं जिन्हें सुलझाकर ही हमने इस दशक के अंत तक विकसित देश के रूप में उभर सकते हैं। इसमें सबसे बड़ी चुनौती है युवा भारत की बढ़ती अपेक्षाएं। यह आबादी का वो हिस्सा है जो बेचैन है। फिर भी डटा हुआ है और सामने आनेवाले हर अवसर को पकड़ने को तैयार है।औरऔर भी

समझ में नहीं आता इन दुखी आत्माओं का क्या करूं? एक दुखी आत्मा ने लिखा है, “हेलो! आप यहां हर वक्त लिखते हैं कि मार्केंट मजबूत रहेगा। लेकिन हर वक्त वो नीचे ही नीचे जा रहा है। आपने लिखा था कि 6200 से 7000 तक निफ्टी जाएगा। मगर ऐसा नहीं हुआ। अगर आपको सही मालूम होता तो क्यों नहीं आप सबको बोलते कि निफ्टी 4500 तक जाएगा। जब निफ्टी 6200 था तब सब अपना बेच देते औरऔरऔर भी

हमारे राजनेताओं को मजबूरन अपनी जुबान खोलते वक्त जन-भावनाओं का ख्याल रखना पड़ता है। लेकिन अच्छे से अच्छे नौकरशाह भी अक्सर जन-भावनाओं के प्रति इतने असंवेदनशील हो जाते हैं कि ऐसी बातें बोल जाते हैं कि अपनी परंपरा का यह नीति-वाक्य तक याद नहीं रहता – सत्यम् ब्रूयात प्रियं ब्रूयात, न ब्रूयात सत्यम् अप्रियं। आपको याद होगा कि कुछ साल पहले अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने कहा था कि दुनिया में जिंसों के दामऔरऔर भी

चालू वित्त वर्ष 2010-11 में अप्रैल-जून की पहली तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 8.8 फीसदी रही है। इसमें सबसे ज्यादा योगदान मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र का रहा है जिसमें इस बार 12.4 फीसदी वृद्धि हुई है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह केवल 3.8 फीसदी बढ़ा था। सेवाओं में वित्तीय, बीमा व रीयल एस्टेट की वृद्धि दर 11 से घटकर 8 फीसदी रह गई है। हालांकि कंस्ट्रक्शन में 4.8 फीसदीऔरऔर भी

चीन अब जापान को पछाड़कर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और विश्व बैंक, गोल्डमैन सैक्स व दूसरी प्रमुख वित्तीय संस्थाओं के आकलन पर यकीन करें तो वह 2025 तक अमेरिका को नंबर-1 के पायदान से हटा देगा। इससे पहले चीन साल 2005 में ब्रिटेन व फ्रांस और 2007 में जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बना था। चीन इस समय दुनिया के समृद्ध व उभरते देशों के समूह जी-20औरऔर भी

हफ्ते भर में कभी फुरसत ही नहीं मिलती कि आपसे कोई सीधी बात हो सके। तीन महीने बीत गए, चौथा बीतने जा रहा है। देखिए, एक बात तो तय मानिए कि हमारा रिश्ता लंबा होने जा रहा है। अर्थकाम को धीरे-धीरे ऐसा बना देना है कि वह हमारी-आपकी दुनिया की देखभाल में सक्षम हो जाए। मेरे एक अभिन्न मित्र ने शुरुआत के वक्त कहा कि चलिए आप अर्थ-काम देखिए, हम धर्म-मोक्ष संभाल लेते हैं। बात मुझे अचानकऔरऔर भी

हमारे गांव में एक गजा-धर पंडित (जीडीपी) थे। थे इसलिए कि अब नहीं हैं। गांव के उत्तर में बांस के घने झुरमुट के पीछे बना उनका कच्चा घर अब ढहकर डीह बन चुका है। तीन में से दो बेटे गांव छोड़कर मुंबई में बस गए हैं और एक कोलकाता में। वहीं पंडिताई करते हैं। शुरू में जजमान अपने ही इलाके के प्रवासी थे। लेकिन धीरे-धीरे जजमानी काफी बढ़ गई। गजाधर पंडित बाभन थे या महाबाभन, नहीं पता।औरऔर भी