हल्ला है कि देश की अर्थव्यवस्था बड़ी तेज़ी से बढ़ रही है। इसका सबूत है कि लोगबाग जमकर टैक्स दे रहे हैं और सरकार भी दिल खोलकर खर्च कर रही है। पश्चिम एशिया का संकट भारत का बाल बांका भी नहीं कर सका। वित्त मंत्रालय के अधीन करनेवाले महालेखा नियंत्रक (सीजीए) ने 31 जुलाई को डेटा जारी किया कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से जून की पहली तिमाही में भारत सरकार ने 13.57 लाख करोड़औरऔर भी

देश में पहले मुद्रास्फीति की दो ही दरें हुआ करती थीं। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित थोक मुद्रास्फीति और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित रिटेल मुद्रास्फीति। अब इसमें एक तीसरी भी जुड़ गई है उत्पादकों के मूल्य सूचकांक (पीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति। लेकिन ये सभी बैंकिंग, कॉरपोरेट क्षेत्र और वित्तीय तंत्र के लिए मायने रखती हैं, जबकि देश के आमजन के लिए इनका कोई खास मतलब नहीं। उसके लिए तो सालों-साल से ‘महंगाई डायन खायेऔरऔर भी

साल भर से ज्यादा हो गए। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग के हुनर, सीख व अभ्यास के जुड़े इस कॉलम में सबके लिए खुला लगभग 200 शब्दों का पहला पैराग्राम हमेशा अर्थव्यवस्था पर केंद्रित रहता है। कभी सरकार की नीतियां, कभी रिजर्व बैंक के फैसले तो कभी किसानी, बेरोज़गारी व गरीबी की स्थिति। अर्थव्यवस्था के पूरे स्पेक्ट्रम को पकड़ने की कोशिश रहती है। सब्सक्राइबरों के साथ ही अन्य लोगों ने भी सवाल उठाए हैं कि शेयर बाज़ार कीऔरऔर भी

भारत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां कभी न कभी किसी रिश्तेदार, दोस्त या यूट्यूब गुरु ने यह दावा न किया हो कि यह स्टॉक पांच गुना जाएगा, यह अगला मल्टीबैगर है, अभी खरीद लो, वरना ज़िंदगी भर पछताओगे। इन दावों में इतना आत्मविश्वास होता है कि सुनने वाला खुद को अगले कुछ वर्षों में करोड़पति के रूप में देखने लगता है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि ऐसे सपने सबसे ज़्यादा वही लोगऔरऔर भी

आज ईद-उल-फितर के मौके पर शेयर बाज़ार बंद है। ईद का यह त्योहार खुशी, एकता और सद्भाव का प्रतीक है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था व शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संदेश लेकर आता है। लेकिन बेहद दुखद है कि सत्ता में बैठी भाजपा के कारिंदों ने देश भर में जगह-जगह इस त्योहार के सद्भाव को तोड़ने की कोशिश की। उत्तर प्रदेश के संभल से लेकर मेरठ तक उपद्रवियों के साथ ही प्रशासन ने भी साम्प्रदायिक माहौल में तनावऔरऔर भी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नए वित्त वर्ष 2025-26 का बजट पेश करते हुए ऐलान कर दिया कि अब नई कर व्यवस्था के तहत साल भर में 12 लाख रुपए तक (यानी महीने में औसतन एक लाख रुपए) की आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा। यह रकम नौकरीपेशा करदाता के लिए 75,000 रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़कर 12.75 लाख रुपए हो जाती है। इसके बाद लोकसभा से लेकर मीडिया तक तालियों की बौछार होने लगी। वित्तऔरऔर भी

हर तरफ हल्ला है। अखबारों से लेकर टीवी चैनलों और कॉरपोरेट क्षेत्र में तारीफ-दर-तारीफ हो रही है कि एनडीए सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट होने के बावजूद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नए वित्त वर्ष 2023-24 के बजट को लोकलुभावन होने से बचा लिया। विकास पर ही पूरा ध्यान रखा। साथ ही राजकोषीय अनुशासन का पूरा पालन किया। सरकार की उधारी नहीं बढ़ने दी और राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.9% तक सीमित रखा।औरऔर भी

अर्थकाम के अब तक के सफर के हमसफर दोस्तों! अब तक मैंने ट्रेडिंग बुद्ध और तथास्तु की सेवा थोड़े-बहुत व्यवधान के बावजूद बराबर जारी रखी। लेकिन इधर स्वास्थ्य संबंधी कुछ जटिल समस्याएं आ गई हैं। सच बताऊं तो मेरे हार्ट की बाईपास सर्जरी ज़रूरी हो गई है। कल 4 फरवरी को सीना खोलकर यह ऑपरेशन किया जाएगा। उसके बाद हील होने में अमूमन पांच-छह हफ्ते लग ही जाते हैं। उसके बाद ही काम करने लायक हो पाऊंगा।औरऔर भी

सेंसेक्स हो, निफ्टी हो या हो म्यूचुअल फंड, जोखिम से जुड़े हुए इन बाजार आधारित निवेश विकल्पों ने इस साल जून से ही दिल गार्डन-गार्डन कर रखा है। अब आगे बाजार क्या रुख ले रहा है, इसकी खलबली, भविष्यवाणी सब चल रही है एक साथ। अगले कुछ महीनों में बाजार क्या रहेगा? खलबली क्यों है, बाजार आधारित इस जोखिम भरे स्टॉक या शेयर बाज़ार में निवेश के सुखद अवसर बना रहे कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात करतेऔरऔर भी