विदेशी नहीं, अपनी पूंजी को बढ़ाना होगा
राष्ट्रीय उद्योगों को बढ़ाने और विदेशी पूंजी को अपने हित में इस्तेमाल करने की जो रणनीति चीन से दशकों से अपना रखी है, भारत को भी विदेशी माल व सेवाओं का बाज़ार बनने और विदेशी पूंजी को बेहिसाब छूट देने के बजाय राष्ट्रीय पूंजी व उद्योगों को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनानी होगी। तब तक हमें झूठी प्रशस्ति या निंदा नहीं, बल्कि सच्चाई का सामना करना पड़ेगा। भारतीय अर्थव्यस्था का आकार अभी बमुश्किल 4 ट्रिलियन (लाख करोड़)औरऔर भी
