कोई शेयर बिना किसी वजह के इतना गिर सकता है, यकीन नहीं आता। बांसवाड़ा सिंटेक्स का दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर सात महीने पहले 6 अप्रैल को 149 रुपए के शिखर पर झूम रहा था। लेकिन सवा महीने पहले 28 सितंबर को एनएसई में 78.10 रुपए और बीएसई में 84.05 रुपए तक गिर गया। छह महीने से भी कम वक्त में 47.6 फीसदी की गिरावट। लेकिन इस तरह घटकर करीब-करीब आधा हो जाने की कोई साफऔरऔर भी

पहले घर एक-मंजिला हुआ करते थे। अब बहु-मंजिला होते हैं। पहले धन-दौलत सोने-चांदी के सिक्कों या बर्तनों के रूप में जमीन या दीवार में गाड़कर बचाई जाती है। अब लोग अपनी बचत बैंक एफडी, म्यूचुअल फंड या शेयरों जैसे अनाकार माध्यमों में लगाते हैं। पहले मुद्रास्फीति नहीं थी तो बचत जितना रखो, उतनी ही रहती थी। अब खोखली होती जाती है। इसलिए आप कमाकर बचाते हैं, यह पर्याप्त नहीं। आपकी बचत को भी कमा पड़ेगा। कम याऔरऔर भी

हीरो मोटोकॉर्प का शेयर खट-खटाखट बढ़ रहा है। 18 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित किए तो 1984.85 रुपए पर बंद हुआ था। अभी दिवाली के दिन 26 अक्टूबर को मुहूर्त ट्रेडिंग में उसका बंद भाव 2105.65 रुपए रहा है। इस तरह छह कारोबारी सत्रों में वह छह फीसदी से ज्यादा बढ़ चुका है। क्या बनता है इस स्टॉक में लाभ का योग? आइए समझने की कोशिश करते हैं। हीरो मोटोकॉर्प, देश की सबसे बड़ी मोटरसाइकिलऔरऔर भी

ज़ाइडस वेलनेस करीब 3900 करोड़ रुपए के टर्नओवर वाले ज़ाइडस कैडिला समूह की कंपनी है। शुगर फ्री, एवरयूथ व न्यूट्रालाइट जैसे लोकप्रिय उत्पाद बनाती है। कुछ महीने पहले ही उसने माल्ट से बना फूड ड्रिक एक्टीलाइफ बाजार में उतारा है। छोटी है, पर बड़ी तेजी से बढ़ती कंपनी है। पिछले तीन सालों में उसकी बिक्री 81.25 फीसदी और शुद्ध लाभ 135.23 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है। नियोजित पूंजी पर उसका रिटर्न 74.33 फीसदी औरऔरऔर भी

पिछले साल पावर ऑफ आइडियाज़ के विजेता के रूप में आईआईएम अहमदाबाद में हम जैसे चुनिंदा उद्यमियों को प्रोफेसर अरिंदम बनर्जी ने पढ़ाया था कि वैल्यू या मूल्य वो है जो कोई उपभोक्ता आपकी सेवा या उत्पाद के लिए देने को तैयार है। यह वो कीमत है जो वह अपना फायदा देखकर लागत के ऊपर आपको देता है। दूसरी बात यह कि अगर आपको अपने उद्यम का अंतर्निहित मूल्य पता करना हो तो ये देखिए कि कलऔरऔर भी

मुर्गा बांग न दे, तब भी सुबह का होना तो नहीं रुकता। इसी तरह सही सलाह न मिलने से लोगों का निवेश करना नहीं रुकता। वे भविष्य की सुरक्षा के लिए अपनी वर्तमान बचत को दांव पर लगाते रहते हैं, जोखिम उठाते रहते हैं। लेकिन कुछ तो नासमझी व लालच का तकाजा और बहुत कुछ हमारे नियामक तंत्र के लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के चलते हर दिन लाखों देशवासी करोड़ों गंवा रहे हैं। स्पीक एशिया तो एकऔरऔर भी

हिंदुस्तान ज़िंक पहले साल 2003 तक भारत सरकार की कंपनी हुआ करती थी। अब कबाड़ी से अरबपति अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह की कंपनी है। कंपनी की 845.06 करोड़ रुपए की इक्विटी में वेदांता समूह की हिस्सेदारी 64.92 फीसदी है, जबकि भारत सरकार के पास अब भी उसके 29.54 फीसदी शेयर हैं। फ्लोटिंग स्टॉक कम होने के बावजूद उसका शेयर बहुत ज्यादा ऊपर-नीचे नहीं होता। 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 155.25 रुपए (21 अप्रैल 2011) और न्यूनतमऔरऔर भी

कोई कंपनी जब टी ग्रुप में डाल दी जाती है तो उसमें उसी दिन डिलीवरी के कारण लिक्विडिटी एकदम सूख जाती है। हो सकता है कि वहां पड़े-पड़े कोई शेयर किसी दिन एकदम इल्लिक्विड हो जाए, मतलब उसमें कोई खरीद-फरोख्त हो ही नहीं। बाजार नियामक सेबी और हमारे एक्सचेंज इसे लिस्टेड कंपनियों को सजा देने के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन ऐसा बी ग्रुप की किसी अच्छी-खासी कंपनी के साथ होने लगे तो आप क्या कहेंगे? जी,औरऔर भी

हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) का धंधा एकदम सीधा सरल है। पहले हमारे बाप-दादा रिटायर होने के बाद ही घर बना पाते थे। लेकिन आज 30-35 साल के नौकरीपेशा लोग भी मुंबई व दिल्ली जैसे शहर में अपना घर बना ले रहे हैं तो इसे सुगम बनाने और इस ख्वाहिश को बिजनेस म़ॉडल बनाने का श्रेय एचडीएफसी के संस्थापक हंसमुख ठाकुरदास पारेख को जाता है। 1977 में उन्होंने आम मध्य वर्ग के लोगों को हाउसिंग फाइनेंस देनेऔरऔर भी

बड़ी बेरहम दुनिया है शेयर बाजार की। यहां कोई नैतिकता नहीं चलती क्योंकि घोड़ा घास से यारी करेगा तो खाएगा क्या। यहां कुछ नियम चलते हैं जो कमोबेश शाश्वत हैं। बड़े खिलाड़ी जब सस्ते भावों पर किसी स्टॉक को जमा कर लेते हैं तो वे ब्रोकरों, एनालिस्टों व मीडिया के जरिए फैलाते हैं कि कैसे वह बहुत धांसू स्टॉक है और उसे खरीद लेना चाहिए। मकसद सिर्फ एक होता है कि वे अपना माल निकालकर नोट बनाऔरऔर भी