जो लोग लाखों-करोड़ों का धंधा करने बैठे हैं, वे खबरें पाने के लिए नहीं, खबरें चलाने के लिए मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए कोई सोचे कि वो बिजनेस चैनल या अखबार से मिली खबरों के दम पर बाजार को मात दे देगा तो वह इस दुनिया में नहीं, मुंगेरीलाल के हसीन सपनों की दुनिया में जी रहा है। हां, हम मीडिया से विश्लेषण का तौर-तरीका जरूर सीख सकते हैं। उन्हें देख-पढ़कर अपनी वित्तीय साक्षरता का स्तरऔरऔर भी

एवरेस्ट इंडस्ट्रीज लाभ के धंधे में लगी बराबर लाभ कमानेवाली कंपनी है। 1934 में बनी 77 साल पुरानी कंपनी है। बिल्डिंग से जुड़े साजोसामान बनाती रही है। छत व दीवारों से लेकर दरवाजे व फ्लोरिंग तक। फाइबर सीमेंट बोर्ड (एफसीबी) से लेकर प्री-इंजीनियर्ड स्टील बिल्डिंग तक। एस्बेस्टस पर्यावरण के लिए खतरनाक है, विकसित देशों से उसे निकाला गया तो कंपनी ने उसका विकल्प एफसीबी के रूप में पेश कर दिया। घरेलू बाजार के साथ-साथ कंपनी निर्यात भीऔरऔर भी

इंजीनियर्स इंडिया। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी जिसमें भारत सरकार की हिस्सेदारी 80.40 फीसदी है। पिछला एफपीओ (फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर) सवा साल भर पहले जुलाई 2010 में आया था। अगला एफपीओ भी देर-सबेर आएगा क्योंकि सरकार की हिस्सेदारी को घटाकर 75 फीसदी तक लाना जरूरी है। लेकिन अच्छी कंपनी के शेयर सस्ते में पाने की तमन्ना में उस्ताद लोग तब तक सरकारी कंपनियों के स्टॉक को दबाकर रखते हैं जब तक उनमें पब्लिक इश्यू की गुंजाइश बची रहतीऔरऔर भी

कुछ कंपनियों के बढ़ने से अर्थव्यवस्था बढ़ती है और कुछ कंपनियां अर्थव्यवस्था के बढ़ने से बढ़ती हैं। 1938 में डेनमार्क के दो इंजीनियरों हेनिक हॉक-लार्सन और सोरेन क्रिस्टियान टुब्रो द्वारा मुंबई में अपने नाम पर बनाई गई एल एंड टी दूसरी तरह की कंपनी है। हालांकि ये दोनों संस्थापक इतिहास के बस नाम भर रह गए हैं। इनका धेले भर का भी लेना देना अब एल एंड टी से नहीं है। यह पूरी तरह प्रोफेशनलों की तरफऔरऔर भी

गणनाओं में बहुत कुछ रखा है। लेकिन गिनतियों में कुछ नहीं रखा। आज दुनिया में करोड़ों लोग बमके पड़े हैं कि वे 11/11/11 का दिन जी रहे हैं। जर्मनी में तो लोग ज्यादा ही बावले होंगे क्योंकि आज 11 बजकर 11 मिनट पर वहां कई महीनों चलनेवाला कार्निवाल शुरू होगा तो उनके लिए पूरा क्रम 11/11/11/11/11 का बन गया है। लेकिन यह भी चक्र का एक दिन है जो जैसा आया है, वैसे ही चला जाएगा। फिरऔरऔर भी

साल 1992 में देश में हाइड्रोकार्बन की खोज व उत्पादन का काम निजी क्षेत्र के लिए खोला गया और सेलन एक्सप्लोरेशन टेक्नोलॉजी तभी से धरती के भीतर से इन्हें निकालने का काम कर रही है। उसे शुरू में सरकार से गुजरात में खोजे गए तीन तेल क्षेत्रों – बकरोल, इंदरोरा व लोहार को विकसित करने का काम मिला। इसके बाद गुजरात में ही दो और तेल क्षेत्रों – ओग्नाज व कर्जीसन का काम भी मिल गया। कंपनीऔरऔर भी

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में डेरिवेटिव ट्रेडिंग धीरे-धीरे जोर पकड़ती जा रही है। दो महीने पहले तक महज लाखों में रहनेवाला कारोबार अब 1000 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर गया है। बीएसई से मिली आधिकारिक सूचना के अनुसार मंगलवार, 8 नवंबर को एक्सचेंज में हुआ डेरिवेटिव कारोबार 1054.45 करोड़ रुपए रहा है। यह वोल्यूम 107 ब्रोकरों के जरिए हुए 39,055 सौदों से हासिल हुआ है। डेरिवेटिव सेगमेंट में आई जान एक्सचेंज द्वारा 28 सितंबर से शुरूऔरऔर भी

सपरिवार तीन दिन की छुट्टियां। शहर से बाहर, पास के दूसरे शहर में। घरवालों ने मना किया कि इन दिनों में काम नहीं करना। फिर भी लैपटॉप व एमटीएस का कनेक्शन साथ ले गया कि दिन में घंटे-दो घंटे काम कर ही लेंगे। लेकिन एमटीएस का कनेक्शन लाख जतन के बावजूद जुड़ न सका और मेरी झल्लाहट एमटीएस के विज्ञापन की वो छवियां बढ़ाती रहीं जो उसकी स्पीड का महिमागान करती हैं। समझ में आ गया किऔरऔर भी

अक्सर मुझे लगता है कि किसी खास शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह महज एक उकसावा भर होती है ताकि लोगों की दिलचस्पी बनी रहे और बाजार की खटर-पटर चलती रही। अनुमानों के पीछे कितना भी गणित गिनाया जाए, कुछ न कुछ पहलू छूट ही जाते हैं जिससे तीर निशाने पर नहीं लगता। जैसे साल भर पहले आज ही के दिन हमने फीनिक्स मिल्स पर एचडीएफसी सिक्यूरिटीज की रिसर्च रिपोर्ट के हवाले बताया था कि, “यहऔरऔर भी

मुंबई की लोकल ट्रेनों में गैंग बनाकर चलनेवाले यात्री जब करताल बजाकर गाना शुरू करते हैं तो समूचा कोच सिर पर उठा लेते हैं। पूरा माहौल विचित्र तरंग व उल्लास से भर जाता है। इतना ज्यादा कि कभी-कभी डर लगने लगता है। कुछ ऐसा ही हाल हमारे शेयर बाजार के डे-ट्रेडरों का है। इशारा मिला नहीं कि करताल बजाकर किसी शेयर को आकाश से पाताल या पाताल से आकाश तक पहुंचा देते हैं। हल्ला मचाते हैं क्विंटलऔरऔर भी