शॉपर्स स्टॉप: दुपट्टा उड़ा जो हवा में!

जो लोग लाखों-करोड़ों का धंधा करने बैठे हैं, वे खबरें पाने के लिए नहीं, खबरें चलाने के लिए मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए कोई सोचे कि वो बिजनेस चैनल या अखबार से मिली खबरों के दम पर बाजार को मात दे देगा तो वह इस दुनिया में नहीं, मुंगेरीलाल के हसीन सपनों की दुनिया में जी रहा है। हां, हम मीडिया से विश्लेषण का तौर-तरीका जरूर सीख सकते हैं। उन्हें देख-पढ़कर अपनी वित्तीय साक्षरता का स्तर उन्नत कर सकते। हम यकीनन शेयर बाजार के जरिए अपनी बचत को संपदा बनाने के काम में लगा सकते हैं। लेकिन उसके लिए नीर-क्षीर विवेक, तमाम उपलब्ध तथ्यों का विश्लेषण करने का कौशल हासिल करना जरूरी है।

आज चर्चा रिटेल के धंधे में लगी प्रमुख कंपनी शॉपर्स स्टॉप की। के रहेजा समूह की दस साल पुरानी कंपनी जो फिलहाल देश के 22 शहरों में 46 स्टोर चलाती है। इनमें महानगरों के अलावा जयपुर, लखनऊ, इंदौर, लातुर और सिलिगुड़ी जैसे शहर भी शामिल हैं। शहरी मध्यवर्ग में शॉपर्स स्टॉप फैशन व लाइफस्टाइल का स्वीकृत स्टोर बन चुका है। कंपनी ने बढ़ते चलन को देखते हुए चौबीसों घंटे, सातों दिन ऑनलाइन शॉपिंग की सुविधा भी दे रखी है। क्रॉसवर्ड बुक स्टोर्स शॉपर्स स्टॉप के पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी है। हाइपर सिटी रिटेल (इंडिया) लिमिटेड भी इसी का हिस्सा है। वह मदरकेयर स्टोर भी चलाती है। उसने टाइमज़ोन इंटरटेमेंट व नुयांस ग्रुप के साथ संयुक्त उद्यम बना रखा है। कुल मिलाकर देश भर में 39.3 लाख वर्गफुट में उसके स्टोर हैं। अभी दो दिन पहले ही शॉपर्स स्टॉप ने गेटवे मल्टीचैनल रिटेल की 49 फीसदी इक्विटी हाइपर सिटी से खरीदकर पूरी तरह उसे अपनी सब्सिडियरी बना लिया है। कहने का मतलब यह कि कंपनी भारतीय ग्राहक की सोच व जरूरत को पकड़ने में पूरी रफ्तार से लगी हुई है।

बीते वित्त वर्ष 2010-11 में कंपनी ने 1712 करोड़ रुपए की बिक्री पर 75.18 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था और उसका परिचालन लाभ मार्जिन (ओपीएम) 9.31 फीसदी व शुद्ध लाभ मार्जिन (एनपीएम) 4.39 फीसदी रहा था। करीब महीने भर पहले उसने सितंबर 2011 तिमाही के नतीजे घोषित किए। इस दौरान उसकी बिक्री स्टैंड-एलोन रूप से 15.78 फीसदी बढ़कर 557.40 करोड़ और शुद्ध लाभ 12.43 फीसदी बढ़कर 19.54 करोड़ रुपए हो गया। उसका ओपीएम पिछले साल से कम 8.82 फीसदी और एनपीएम 3.93 फीसदी रहा है।

समेकित रूप से कंपनी का शुद्ध लाभ अकेले से कम 10.23 करोड़ रुपए ही है। कारण, उसकी सब्सिडियरी हाइपर सिटी को 18.2 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ है। हालांकि जून 2011 की तिमाही में कंपनी को समेकित रूप से घाटा हुआ था। अब वो कम से कम फायदे में तो है। लेकिन उसका परिचालन लाभ 2.8 फीसदी घटकर 32 करोड़ और कर-पूर्व लाभ 14.5 फीसदी घटकर 10.77 करोड़ रुपए पर आ गया है।

फिलहाल स्टैंड-एलोन नतीजों के आधार पर उसका ठीक पिछले बारह महीनों (टीटीएम) का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 9.58 रुपए और समेकित आधार पर 4 रुपए है। उसका पांच रुपए अंकित मूल्य का शेयर कल बीएसई (कोड – 532638) में 5.01 फीसदी बढ़कर 357.35 रुपए और एनएसई (कोड – SHOPERSTOP) में 5.11 फीसदी बढ़कर 357.95 रुपए पर बंद हुआ है। इस तरह उसका शेयर स्टैंड-एलोन टीटीएम ईपीएस को देखते हुए 37.30 और समेकित ईपीएस को देखते हुए 89.34 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है।

जाहिरा तौर पर बाजार ने शॉपर्स स्टॉप का गुब्बारा कुछ ज्यादा ही फुला रखा है। दो साल पहले तक यह कंपनी करीब 64 करोड़ रुपए के घाटे में थी। मार्च 2010 से इस शेयर ने गति पकड़ी है। स्टैंड-एलोन रूप से यह इसी साल जनवरी 2011 में 70.40 के पी/ई पर ट्रेड हो चुका है। तब 4 जनवरी को यह 792 रुपए तक चला गया था। लेकिन तब शेयर दस रुपए अंकित मूल्य का था जिसे 13 जनवरी से 5 रुपए अंकित मूल्य के दो शेयरों में बांट दिया गया। इसके बाद चार महीने पहले इस शेयर ने 25 जुलाई 2011 को 504 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर बनाया है। जबकि इसका न्यूनतम स्तर 261 रुपए का है जो इसने 11 फरवरी 2011 को हासिल किया था।

असल में बाजार हमेशा आगे देखकर चलता है। दिसंबर 2011 की तिमाही के नतीजे तो जनवरी 2012 में आएंगे। लेकिन त्योहारी सीजन की वजह से माना जा रहा है कि शॉर्पर्स स्टॉप की बिक्री व लाभ मार्जिन अच्छा रहा है। इसी उम्मीद में उसके शेयर को चढ़ाया जा रहा है। जरा-सी नाउम्मीदी इसकी सारी हवा निकाल सकती है। वैसे, सरकार जल्दी ही सिंगल ब्रांड रिटेल में एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) की सीमा 51 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी और मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई की इजाजत देने का ऐलान करने जा रही है। इन नीतिगत फैसलों से शॉपर्स स्टॉप व पैंटालून रिटेल जैसे स्टॉक्स में तात्कालिक चाल आ सकती है। इसलिए हमारी राय में रिटेल सेक्टर के इन स्टॉक्स को फिलहाल ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन दीर्घकालिक निवेश के लिए नहीं।

शॉपर्स स्टॉप की 41.24 करोड़ रुपए की इक्विटी में प्रवर्तकों का हिस्सा 67.93 फीसदी है, जबकि एफआईआई ने इसके 12.89 फीसदी और डीआईआई ने 6.54 फीसदी शेयर ले रखे हैं। इन दोनों ने सितंबर तिमाही में कंपनी में अपना निवेश घटाया है। प्रवर्तकों ने अपनी शेयरधारिता का 27.12 फीसदी (कंपनी कुल इक्विटी का 18.42 फीसदी) गिरवी रखा हुआ है। सारे पहलुओं को देखते हुए शॉपर्स स्टॉप में लंबे समय के निवेश का कोई योग नहीं बनता।

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