गोदरेज कंज्यूमर: डार्लिंग हमारी नहीं

बड़ी बेरहम दुनिया है शेयर बाजार की। यहां कोई नैतिकता नहीं चलती क्योंकि घोड़ा घास से यारी करेगा तो खाएगा क्या। यहां कुछ नियम चलते हैं जो कमोबेश शाश्वत हैं। बड़े खिलाड़ी जब सस्ते भावों पर किसी स्टॉक को जमा कर लेते हैं तो वे ब्रोकरों, एनालिस्टों व मीडिया के जरिए फैलाते हैं कि कैसे वह बहुत धांसू स्टॉक है और उसे खरीद लेना चाहिए। मकसद सिर्फ एक होता है कि वे अपना माल निकालकर नोट बना सकें। आखिर कोई खरीदेगा, तभी तो वे बेच पाएंगे।

वल्लभ भंसाली के हाथों से निकलकर एक्सिस बैंक के तंत्र का हिस्सा बन चुकी एनम सिक्यूरिटीज ने 26 अगस्त को अपनी रिसर्च रिपोर्ट में बताया कि गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड का शेयर अभी 417 रुपए पर है। लेकिन जल्दी ही 475 रुपए पर जा सकता है। 13.90 फीसदी का फायदा। एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) या अमीर निवेशकों को फंसाने के लिए इतना काफी है।

इसके बाद 15 सितंबर के आसपास बिजनेस स्टैंडर्ड ने एडेलवाइस, एनम, मैक्वारी रिसर्च व मोतीलाल ओसवाल सिक्यूरिटीज की तरफ से 20 ऐसे स्टॉक्स की सूची पेश की, जिनसे कमाई की जा सकती है। इसमें गोदरेज कंज्यूमर का भी नाम था और बताया गया था कि यह 12 फीसदी रिटर्न दे सकता है। शेयर तब 425 रुपए पर था। सब्जबाग वही था 476 रुपए पर पहुंचने का। वजहें भी गिनाई गईं। कहा गया कि कंपनी की विकास दर अगले दो सालों में 21 फीसदी रहेगी। कमोडिटीज के घटते मूल्य व खुद अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने से कंपनी का लाभ मार्जिन बढ़ेगा। सारे उत्पादों का धंधा चौकस रहेगा। डार्लिंग के अधिग्रहण से कमाई में चमत्कारिक इजाफा हो सकता है। जोखिम के बतौर कच्चे माल की लागत का बढ़ना और बढ़ती होड़ जैसे शाश्वत मसले गिना दिए गए।

जिन भी निवेशकों ने इस बिचौलियों के कहने पर गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का शेयर खरीदा होगा, वे आज रो रहे होंगे। शुक्रवार को इसका एक रुपए अंकित मूल्य का शेयर बीएसई (कोड – 532424) में 399.45 रुपए और एनएसई (GODREJCP) में 399.70 रुपए पर बंद हुआ है। यही नहीं, पिछले सोमवार को यह 387.60 तक भी गिर गया था। कहां 12 से 20 फीसदी रिटर्न का सब्जबाज और कहां दो महीने से भी कम वक्त में 7 से 9 फीसदी का फटका! ऐसा होना ही था क्योंकि उस्तादों ने जब सिफारिशें जारी करवाने के बाद शेयर बेचने शुरू किए होंगे तो उसे बढ़ना नहीं, गिरना ही था।

डार्लिंग का किस्सा यह है कि कंपनी ने मोजाम्बिक के डार्लिंग समूह की 51 फीसदी इक्विटी करीब 500 करोड़ रुपए में खरीद ली है। बाकी 49 फीसदी इक्विटी भी वह अगले पांच सालों में धीरे-धीरे करके खरीद लेगी। डार्लिंग समूह विग, चोटी जैसे बालों के गुच्छे वगैरह बनाती है और बताते हैं कि अफ्रीकी महिलाओं में उसके उत्पाद बड़े लोकप्रिय हैं। असल में गोदरेज कंज्यूमर विदेशी अधिग्रहण के अभियान पर निकली हुई है। पिछले साल उसने इंडोनेशिया में मेगासारी, लैटिन अमेरिका में इश्यू समूह व आर्गेन्कोज और नाइजीरिया में ट्यूरा का अधिग्रहण किया था।

यह सच है कि गुड नाइट, गोदरेज हेयर डाई, सिंथोल, हिट, जेट, फेयरग्लो, इजी व एक्सपर्ट जैसे ब्रांडों की मालिक गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की अपनी एक साख है और उसका धंधा भी बढ़ रहा है। लेकिन इसका शेयर जब बराबर 36 से ज्यादा पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा हो तो उसके खरीदने की सिफारिश करने का क्या तुक है? अगर वह गिरकर 52 हफ्ते के न्यूनतम स्तर 325.20 रुपए (4 फरवरी 2011) पर आ जाए, तब भी उसका पी/ई अनुपात 30.11 रहेगा क्योंकि उसका ठीक पिछले बारह महीनों का स्टैंड-एलोन ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) अभी 10.8 रुपए है।

चार दिन बाद शुक्रवार, 21 अक्टूबर कंपनी की सितंबर तिमाही के नतीजे आने हैं। इससे पहले की जून तिमाही में उसकी बिक्री 20.05 फीसदी बढ़कर 625.55 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 96.51 फीसदी बढ़कर 219.84 करोड़ रुपए हो गया था। लेकिन लाभ के बढ़ने की मुख्य वजह यह थी कि उसे कीवी बूट पॉलिश का बिजनेस बेचने से 175 करोड़ रुपए मिले थे, जो एक बार की ही बात है। नहीं तो उसका परिचालन लाभ केवल 10.6 फीसदी बढ़ा था और परिचालन लाभ मार्जिन (ओपीएम) 19.61 फीसदी से घटकर 16.57 फीसदी तक आ गया था।

जून 2011 की तिमाही में विदेश में खरीदी गई कंपनियों में ज्यादा तनख्वाह देने के चलते उसकी कर्मचारी लागत 63 फीसदी बढ़ गई थी। होड़ में टिके रहने के लिए उसने अपना विज्ञापन व प्रचार खर्च भी 58 फीसदी बढ़ा दिया था। इधर अधिग्रहण के लिए बैंकों के उठाए गए ऋण के चलते उस पर ब्याज की अदायगी का बोझ भी बढ़ रहा है। हमें लगता है कि जब कंपनी का 70 फीसदी धंधा भारतीय बाजार से आता है और इस घरेलू बाजार में ही जबरदस्त मौके हैं, तब कंपनी का अधिग्रहण के लिए जहां-तहां भागना शायद अच्छी रणनीति नहीं है। बाहर हर लागत भारत से ज्यादा है।

खैर, ये सारे पहलू गोदरेज समूह के कर्ताधर्ता यकीनन बेहतर समझते होंगे। हम तो आम शेयरधारकों व निवेशकों के पक्ष में खड़े होकर इतना ही कह सकते हैं कि जब आईटीसी का शेयर 30.38, हिंदुस्तान यूनिलीवर का शेयर 33.34 और मैरिको का शेयर 35.76 के पी/ई अनुपात पर उपबल्ध हो, तब पिछले दो महीने में गिरने के बावजूद 36.98 के पी/ई पर ट्रेड हो रहे गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के शेयर को लेने का कोई तुक नहीं है। हां, यह गिरकर 270 रुपए के आसपास 25 के पी/ई पर आ जाए तो जरूर इसे खरीदा जा सकता है। यह स्टॉक हमारे लिए नहीं है। इसमें बड़े लोगों को खेल करने दीजिए।

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