पंचर कर देगी वीनस पावर वेंचर्स

मुर्गा बांग न दे, तब भी सुबह का होना तो नहीं रुकता। इसी तरह सही सलाह न मिलने से लोगों का निवेश करना नहीं रुकता। वे भविष्य की सुरक्षा के लिए अपनी वर्तमान बचत को दांव पर लगाते रहते हैं, जोखिम उठाते रहते हैं। लेकिन कुछ तो नासमझी व लालच का तकाजा और बहुत कुछ हमारे नियामक तंत्र के लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के चलते हर दिन लाखों देशवासी करोड़ों गंवा रहे हैं। स्पीक एशिया तो एक नाम है। ऐसी हजारों कंपनियां गली-मोहल्लों में हर दिन लोगों की असुरक्षा व लालच का फायदा उठाकर उन्हें ठग रही हैं। शेयरों में निवेश के नाम पर भी यही हो रहा है। इसलिए मुझे लगता है कि कहां निवेश करें, इससे भी कहीं ज्यादा जरूरी यह जानना हो गया है कि कहां निवेश न करें।

जरा इस एसएमएस पर गौर कीजिए: बस 8000 रुपए का छोटा निवेश और छह महीने में आप कमाएंगे एक लाख रुपए। कंपनी का नाम है वीनस पावर वेंचर्स (इंडिया) लिमिटेड। इसका शेयर भले ही इस समय 8 रुपए चल रहा हो, लेकिन इसमें लक्ष्य 33, 50 और 90 रुपए का है। इसे भेजा जा रहा है इक्विटी रिसर्च 4यू की तरफ से।

इस तरह के एसएमएस के जाल में फंसना विश्वामित्र के मेनका के जाल में फंसने से कम नहीं है। वैसे, मेनका तो अप्सरा थी, रूपवती थी। लेकिन इन कंपनियों की शक्लो-सूरत तो इतनी बदरंग होती है कि समझ में नहीं आता कि कैसे कोई पढ़ा-लिखा समझदार इंसान इनमें फंस सकता है। लेकिन लोग फंसते हैं, तभी तो ‘इक्विटी रिसर्च 4यू’ जैसी फर्मों का धंधा चलता है। ऐसी कंपनियों के बारे में सारे तथ्य इतने खुले होते हैं कि एसएमएस भेजनेवाला सामने आ जाए तो उसे झन्नाटेदार तमाचा मारना चाहिए और इतनी धुलाई करनी चाहिए कि उसकी सात पुश्तें गंजी व गूंगी पैदा हों।

खैर, नजर डालते हैं इस वीनस पावर वेंचर्स नाम के चारे पर। यह मूलतः आंध्र प्रदेश की कंस्ट्रक्शन कंपनी है। दो साल पहले 2009 तक उसका नाम केवल वीनस वेंचर्स हुआ करता था। लेकिन उसके घोषित किया कि वह अब बिजली के धंधे में उतर रही है। आंध्र प्रदेश के गोदावरी जिले में 50 मेगावॉट का गैस आधारित संयंत्र लगाएगी। साथ ही नेल्लोर जिले में अपनी 175 एकड़ जमीन पर 350 मेगावॉट का ताप बिजली संयंत्र लगाएगी। इससे भी दो साल पहले 2007 तक कंपनी का नाम सर्वत्र बिल्डर्स लिमिटेड हुआ करता था।

जिन बिजली संयंत्रों के नाम पर कंपनी ने अपना नाम बदला, उन संयंत्रों में दो साल बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई है। अगर हुई होती तो कंपनी जरूर इसकी सार्वजनिक घोषणा करती। एक्सचेंजों को दी गई जानकारी पर सरसरी निगाह डालने से यही लगता है कि कंपनी बस कागजी धंधे में लगी हुई है। इस प्रवर्तक के शेयर उसको देने का फैसला या वित्तीय नतीजों को पारित करने की औपचारिकता। लगता है निदेशक बोर्ड को इसके अलावा कोई धंधा नहीं है।

2006-07 में कंपनी ने 5.44 करोड़ रुपए की आय पर 13 लाख रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। किसी तरह कांख-कांख कर उसने चार साल बाद 2010-11 तक अपनी आय को 27.58 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ को 2.17 करोड़ रुपए तक पहुंचा दिया। लेकिन इस साल 2011-12 की जून तिमाही में उसकी आय 1.15 फीसदी बढ़कर 7.05 करोड़ रुपए हुई है, जबकि शुद्ध लाभ 52.63 फीसदी घटकर 36 लाख रुपए रहा है। सितंबर तिमाही के नतीजे वह 26 अक्टूबर को दिवाली के दिन घोषित करेगी। अपनी तो अपनी, लगता है शेयरधारकों की भी दिवाली खराब करेगी।

कंपनी की कुल इक्विटी 15.20 करोड़ रुपए है, लेकिन बाजार पूंजीकरण इससे भी कम 12 करोड़ रुपए है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके दस रुपए अंकित मूल्य के शेयर का भाव इस समय बीएसई (कोड – 531874) मात्र 8.11 रुपए चल रहा है। कल ही यह 3.45 फीसदी गिरा है। पिछले साल 12 नवंबर 2010 को इसे किसी तरह 21 रुपए पर पहुंचा दिया गया था। लेकिन इस साल 30 सितंबर 2011 को यह 5.89 रुपए तक गिर गया। तभी से इसे उठाने के लिए एसएमएस दागे जा रहे हैं और इसे मल्टी-बैगर बताया जा रहा है। यह कंपनी केवल बीएसई में लिस्टेड है।

हालांकि देखने-दिखाने को इसका टीटीएम ईपीएस 1.16 रुपए है और इसका शेयर 6.99 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। शेयर का भाव भले ही 8.11 रुपए है, लेकिन उसकी बुक वैल्यू 15.44 रुपए है। फिलहाल प्रवर्तक इस कंपनी से लगभग निकल चुके हैं क्योंकि उनके पास इसके केवल 8.55 फीसदी शेयर हैं। इसमें 2228 छोटे निवेशक फंसे हुए हैं, जिनके पास कंपनी के 14.34 फीसदी शेयर हैं। उनसे भी ज्यादा फंसे हैं 40 अपेक्षाकृत बड़े निवेशक जिनके पास कंपनी के 41.19 फीसदी शेयर हैं।

असल में पब्लिक की श्रेणी में 11 निवेशक ऐसे हैं जिनके पास कंपनी के एक फीसदी से ज्यादा शेयर हैं। इनके पास कुल 65.05 फीसदी पूंजी है। इनमें सीमेंटेक्स इंडिया (13.16 फीसदी), धन एनर्जी (13.16 फीसदी), वीरा कुमार दास सुरपनानी (6.74 फीसदी), मक्केना रामकृष्ण (6.58 फीसदी), स्वर्ण कुमार कोली (6.58 फीसदी), आर चक्रवर्ती (6.58 फीसदी), वैनटेक सोल्यूशंस (2.68 फीसदी) और ज़ेन सिक्यूरिटीज (1.19 फीसदी) शामिल हैं। एफआईआई व डीआईआई के तो इस कंपनी में रहने का सवाल ही नहीं उठता।

कंपनी के पांच प्रवर्तकों में भी हेराफेरी चल रही है। पिछले ही महीने दो प्रवर्तकों अस्विन राज व डी उदयकुमार ने अपने 4,56,300 शेयर तीसरे प्रवर्तक वी श्रीकृष्णा को दे दिए है। श्रीकृष्णा के पास अभी तक प्रवर्तकों में सबसे कम 16,500 शेयर थे। अब वे कंपनी के मुख्य प्रवर्तक व सीएमडी एम श्रीनिवास राव के बाद प्रवर्तकों में दूसरे सबसे शेयरधारक हो गए हैं। एम श्रीनिवास राव के पास कंपनी के 8,11,392 शेयर (5.34 फीसदी इक्विटी) हैं।

वीनस पावर वेंचर्स के बारे में इससे ज्यादा कुछ बताने की जरूरत नहीं हैं। मेरा बस इतना कहना है कि इंटरनेट के इस जमाने में ऐसी कंपनियों के बारे में कम से कम इतनी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहती है। हर लिस्टेड कंपनी को अपनी खास-खास जानकारियां स्टॉक एक्सचेंज को भेजनी जरूरी हैं, जिन्हें एक्सचेंज पाने के दिन ही सार्वजनिक कर देता है। इसलिए जब भी निवेश का कोई लुभावना एसएमएस या मेल मिले तो फौरन एक्सचेंज की वेबसाइट पर जाकर कंपनी का कच्चा-चिट्ठा देख लीजिए। उसका अतीत और वर्तमान इतना कुछ बयां कर देता है कि भविष्य को लेकर किसी भ्रम की गुंजाइश नहीं रहती। तो, निवेश की कला के साथ यह समझदारी भी पाने की कोशिश करें कि कहां निवेश नहीं करना है।

2 Comments

  1. धन्‍यवाद

  2. very good ji knowalge badne ke liye

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