भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंडों द्वारा विभिन्न स्कीमों में ली जानेवाली निवेश प्रबंधन और सलाह सेवाओं के लिए सीमा बांध दी है। साथ ही उसने स्कीम के खुले रहने से लेकर रिफंड व स्टेटमेंट तक भेजने का समय घटा दिया है। सेबी ने गुरुवार को एक अधिसूचना जारी कर म्यूचुअल फंडों के लिए संशोधित रेगलेशन जारी कर दिया। गजट में प्रकाशित होने के साथ 29 जुलाई 2010 से नए नियम लागू भी होऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने 27 अगस्त 2007 से ही डीमैट खातों के लिए पैन (परमानेंट एकाउंट नंबर) को अनिवार्य कर दिया था। लेकिन अब भी बहुत सारे निवेशक हैं जिन्होंने अपने डीमैट खातों के डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (डीपी) के पास पैन नंबर की पुष्टि नहीं कराई है। इसके लिए उन्हें पैन कार्ड की फोटोकॉपी वगैरह देनी थी। अभी तक पैन वेरिफिकेशन न करानेवाले निवेशक अपने खाते से कुछ डेबिट नहीं सकते थे। लेकिन सेबी ने अबऔरऔर भी

यूलिप पर पूंजी बाजार नियामक संस्था सेबी और बीमा नियामक संस्था आईआरडीए (इरडा) की तकरार का नतीजा भले ही कानून बनाकर इरडा को बचाने के रूप में सामने आया हो, लेकिन इसने इरडा को पॉलिसीधारकों के प्रति ज्यादा जबावदेह बनने को मजबूर कर दिया है। वह लगातार नए-नए कदम उठा रही है। ताजा दिशानिर्देश में उसने तय किया है कि जीवन बीमा और साधारण बीमा कंपनियों को पॉलिसीधारकों की शिकायतों की निपटारा तीन दिन से लेकर दोऔरऔर भी

सी अच्युतन कमिटी की तरफ से पेश किए गए नए टेकओवर कोड को अपनाने में अभी वक्त लगेगा। यह भी संभव है कि पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी 31 अगस्त तक प्रतिक्रियाएं मिलने के बाद इसमें फेरबदल कर दे। लेकिन अगर इसकी मूल सिफारिशों को अपना लिया गया तो इससे देश की कम से कम 76 बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के विदेशी अधिग्रहण का खतरा बढ़ जाएगा। ब्रोकर फर्म एसएमसी कैपिटल्स के एक अध्ययन के अनुसार बीएसई-500 मेंऔरऔर भी

यह सच है कि हाथी के दांत दिखाने के और, खाने के और होते हैं। लेकिन यह बात मुझे अभी-अभी पता चली है कि हमारे पूंजी बाजार में भी ऊपर-ऊपर जो दिखाया जाता है, हकीकत उससे काफी जुदा होती है। जैसे, यह कि बहुत सारी कंपनियों के आईपीओ फंडेड होते हैं। इस अर्थ में ही नहीं कि उनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशन खरीदार (क्यूआईबी), एंकर इनवेस्टर और एचएनआई पहले से ही इश्यू के मर्चेंट बैंकर से बातचीत के बादऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने शेयर बाजार में 15 मिनट का प्री-ओपन सत्र शुरू करने का फैसला किया है। यह प्री-ओपन सत्र 9 बजे से 9.15 बजे तक होगा। इसे अभी बीएसई और एनएसई में प्रायोगिक स्तर पर सेंसेक्स और निफ्टी में शामिल शेयरों से किया जाएगा। वैसे, इसमें कुल 50 कंपनियों के ही शेयर हैं क्योंकि सेंसेक्स के 30 शेयर निफ्टी के 50 शेयरों के सेट के सब-सेट ही हैं। सेबी ने प्री-ओपन सत्र मेंऔरऔर भी

एक हफ्ते के भीतर ही पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के चेयरमैन सी बी भावे ने अपना वादा पूरा कर दिया और गुरुवार 15 जुलाई से शेयरों के डेरिवेटिव सौदों में फिजिकल सेटलमेंट की व्यवस्था अपना ली गई है। सेबी ने एनएसई और बीएसई के इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट के मुख्य अधिकारियों के नाम भेजे गए सर्कुलर में यह सूचना दी है। अब स्टॉक एक्सचेजों को इसे लागू करने के व्यावहारिक इंतजाम करने हैं। तय यह हुआ हैऔरऔर भी

शेयरों के डेरिवेटिव सौदों में फिजिकल सेटलमेंट की व्यवस्था अपनाने पर महीने भर के भीतर अंतिम फैसला हो जाएगा। यह कहना है पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के चेयरमैन सीबी भावे। वे गुरुवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में सर्टिफिकेशन एक्जामिनेशन फॉर फाइनेंशियल एडवाइजर्स (सीएफए) के लांचिंग समारोह के दौरान मीडिया से बात कर रहे थे। उनका कहना था, “स्टॉक एक्सचेंजों के साथ तमाम मसलों पर विमर्श हो चुका है और महीने भर के भीतर अंतिम फैसलाऔरऔर भी

दो साल पुराने वैश्विक वित्तीय संकट के बाद बैंकिंग व फाइनेंस क्षेत्र के निवेश को सबसे ज्यादा जोखिम भरा माना जाने लगा है। लेकिन हमारे म्यूचुअल फंडों ने अपना सबसे ज्यादा निवेश इसी क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में कर रखा है। पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी को एम्फी (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के मिली जानकारी के मुताबिक मई अंत तक  म्यूचुअल फंडों ने अपनी कुल आस्तियों का 14.14 फीसदी हिस्सा बैंकों और 5.01 फीसदीऔरऔर भी