अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हारून लोर्गट का मानना है कि भारतीय उप महाद्वीप में सट्टेबाजी को वैध कर देना चाहिए। इससे सट्टेबाजों पर निगाह रखने में मदद मिलेगी और ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना भी आसान हो जाएगा।’ लोर्गट ने कहा, ‘‘यदि इस कारोबार को वैध बना दिया जाता है तो फिर आप वास्तव में उनके साथ मिलकर काम करोगे। ऐसे में उन पर बेहतर तरीके से निगरानी रखी जा सकती है। यदिऔरऔर भी

अच्छे उत्पादन के चलते भारत का मक्का निर्यात अक्तूबर को समाप्त होने वाले 2010-11 के विपणन वर्ष में 33 फीसदी बढ़कर 24 लाख टन रहने की उम्मीद है। इस दौरान रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन की संभावना है। अमेरिकी खाद्यान्न परिषद (यूएसजीसी) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 2009-10 के विपणन वर्ष (नवंबर से अक्तूबर) में 18 लाख टन मक्के का निर्यात किया था। यूएसजीसी के भारत स्थित प्रतिनिधि अमित सचदेव ने बताया कि भारत का मक्का निर्यातऔरऔर भी

।।संजय तिवारी।। दुनिया का तो पता नहीं लेकिन भारत में विचार के व्यापार का तरीका बड़ा वीभत्स हो गया है। जो व्यापार है उसमें विचारशून्यता अनिवार्य शर्त है लेकिन जहां विचार के प्रचार को ही व्यापार होना है वहां स्थिति बड़ी भयावह है। ज्ञान के बोझ को कांधे पर लादे भारत में विचारों का इतना अनादर आश्चर्य पैदा करता है। सत् तत्व को शब्द तक उतार लानेवाले भारतीय समाज में सद्विचार, सत्कर्म, सत्संग को समाप्त करने केऔरऔर भी

भारत अपनी नौसेना की ताकत में इजाफा करने के मकसद से अगले बीस सालों में 101 नए युद्धपोतों पर कुल 46.96 अरब डॉलर का निवेश करेगा। एक विशेषज्ञ ने सिंगापुर में यह दावा किया है। अमेरिका स्थित संस्था ‘एएमआई इंटरनेशनल’ के उपाध्यक्ष और नौसेना विशेषज्ञ बॉब नुगेंट ने कहा, ‘‘इतने बड़े पैमाने पर निवेश को देखते हुए भारत परिष्कृत विध्वंसक, नयी पीढ़ी और नये रेडार से युक्त पोत, परमाणु पनडुब्बियां और तेज गति वाले पोत चाहेगा।’’ नुगेंटऔरऔर भी

भारत के लोगों में भले ही अमेरिका के दुग्ध उत्पादों को लेकर तमाम सांस्कृतिक और धार्मिक आपत्तियां हों, लेकिन अमेरिका ने भारत के भारत के डेयरी बाजार में घुसने का इराद नहीं छोड़ा है। वॉशिंगटन से जारी समाचार के अनुसार, अमेरिका के कृषि के मंत्री टोम विलसाक ने मुक्त व्यापार व्यवस्था पर एक संसदीय समिति के समक्ष सुनवाई के दौरान कहा कि भारतीय दुग्ध उत्पाद बाजार को खुलवाने का मुद्दा को पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामाऔरऔर भी

भारत ने भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र समझौते या कनवेंशन का अनुमोदन कर दिया है। अनुमोदन की यह प्रक्रिया सितंबर 2010 से ही चल रही थी और अब इसे मंत्रियों के एक समूह की देखरेख में पूरा कर दिया गया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को काबुल यात्रा पर रवाना होने से पहले जारी एक बयान में यह जानकारी दी है। बयान में कहा गया है, “भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र समझौते को लागू करने सेऔरऔर भी

बाजार का जो भी खेल है, यहां अपग्रेड और डाउनग्रेड गलत वक्त पर होते हैं। हमने एसकेएस माइक्रो फाइनेंस को 800 रुपए पर डाउगग्रेड किया था और अब देखिए उसका हश्र क्या है। हमने एसबीआई को 3500 रुपए पर डाउनग्रेड किया था, बाजार अब कर रहा है। हमने मुथूत फाइनेंस के बारे में नकारात्मक राय रखी और लिस्टिंग पर उसका हाल-बेहाल सामने आ गया. है। हमें यकीन है कि यह स्टॉक घटकर 123 रुपए तक आ जाएगाऔरऔर भी

विश्व अर्थव्यवस्था में एशिया की स्थिति 16वीं व 17वीं सदी जैसी होने जा रही है। तब विश्व अर्थव्यवस्था में एशिया का योगदान 60 फीसदी के आसपास था। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने अब भारत, चीन और जापान के बीच आर्थिक सहयोग में मजबूती की उम्मीद करते हुए अनुमान जताया है कि वर्ष 2050 तक दुनिया के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में एशिया का योगदान 50 फीसदी से अधिक हो जाएगा। एडीबी ने कहा कि बेहतर परिदृश्य मेंऔरऔर भी

स्टील बनाने का मुख्य कच्चा माल आइरन ओर है। लेकिन देश में स्टील का उत्पादन मांग से कम होने के बावजूद हम आइरन ओर का जमकर निर्यात करते हैं। यहां तक कि भारत दुनिया में आइरन ओर का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। इस्पात मंत्रालय की तरफ से दी गई अद्यतन जानकारी के अनुसार अप्रैल-दिसम्‍बर 2010 के दौरान देश में 464.40 लाख टन स्टील घरेलू इस्‍तेमाल के लिए उपलब्‍ध था, जबकि इसकी मांग 518 लाख टनऔरऔर भी

आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका (ब्रिक्स) एक दूसरे को अपनी स्थानीय मुद्रा में कर्ज और अनुदान के लेनदेन पर सहमत हो गए हैं। ब्रिक्स देशों के बीच इस आशय के एक समझौते में चीन के शहर सान्या में हस्ताक्षर किए गए। इस पहल को अमेरिकी मुद्रा डॉलर पर निर्भरता और उसके वर्चस्व को घटाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। समझौतेऔरऔर भी