33 लाख कॉल ऑप्शंस को निकालना और 30 लाख पुट ऑप्शंस की ट्रेडिंग ने कल ही साफ कर दिया था कि बाजार आज कमजोर रहेगा। इसलिए निफ्टी के 5330 तक गिरने का पूरा अंदेशा था। लेकिन एक बार फिर डेरिवेटिव सौदों में फिजिकल सेटलमेंट के अभाव ने बाजार को निपटा दिया। बाजार के उस्तादों ने मौका ताड़कर एक बजकर 57 मिनट पर निर्णायक हमला बोल दिया। अफवाहों के दम पर निफ्टी को 2.54 फीसदी तोड़कर 5228.45 औरऔरऔर भी

स्वीडन से निकले और ब्रिटेन में जमे ईसाब समूह की भारतीय सब्सडियरी ईसाब इंडिया के बारे में हमने सबसे पहले यहां करीब तेरह महीने 16 फरवरी 2011 को लिखा था। तब इसका दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर 480.30 रुपए तक चल रहा था। करीब सात महीने बाद 14 सितंबर 2011 को यह 591.30 रुपए तक चला गया। सात महीने में 23 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न। लेकिन उसके बाद गिरते-गिरते 20 दिसंबर 2011 को 422 रुपएऔरऔर भी

हमने परसों ही कहा था कि बाजार 300 से 350 अंक बढ़ सकता है, जिसकी वजह और कुछ नहीं, बल्कि रोलओवर का दौर होगा। बाजार ने बजट पर बुरी तरह प्रतिक्रिया दिखाई और लोग शॉर्ट करने के चक्कर में पड़ गए। इसलिए बाजार को वापस उठना ही था। निफ्टी आज 90 अंक से ज्यादा बढ़कर 5364.95 पर बंद हुआ है, जबकि निफ्टी फ्यूचर्स का आखिरी भाव 5403.75 रहा है। मुझे अब कोई आश्चर्य नहीं होगा जो निफ्टीऔरऔर भी

गिरते हैं घुड़सवार ही मैदाने जंग में। किरण मजूमदार-शॉ की कंपनी बायोकॉन को करीब हफ्ते भर पहले तगड़ा झटका लगा, जब फाइज़र ने उसके बनाए इंसूलिन उत्पादों को अमेरिका में बेचने का करार रद्द कर दिया। दोनों की तरफ से जारी साझा बयान में कहा गया, “बायोसिमिलर बिजनेस में अपनी अलग प्राथमिकताओं के चलते कंपनियां इस नतीजे पर पहुंची हैं कि स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने में ही उनका सर्वोपरि हित है।” धंधे में रिश्ते बनते हैं,औरऔर भी

धीरे-धीरे बजट की कलई उतर रही है और सारी दुनिया को समझ में आ रहा है कि वो कितना और क्यों बुरा है। बजट में सबसे खतरनाक प्रावधान जीएएआर (जनरल एंटी एवॉयडेंस रूल) का है जो कहीं न कहीं मानकर चलता है कि हर करदाता करचोर है और इसलिए उसे सज़ा दी जानी चाहिए। आयकर विभाग को फिलहाल जिस तरह की अंधाधुंध सत्ता मिली हुई है, उसमें लोगों को खामखां परेशान करने और भ्रष्टाचार के मामले इससेऔरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए हम ऐसे स्टॉक्स चुनते हैं जो खरीद-फरोख्त के असर से घट-बढ़ सकते हैं, जबकि निवेश में हम ऐसी कंपनियों को चुनते हैं जिनका धंधा पुख्ता आधार पर खड़ा हो और जिसमें बढ़ने की भरपूर गुंजाइश हो। दिक्कत है कि हममें से 99 फीसदी लोग ट्रेडिंग की मानसिकता रखते हैं। छाया के पीछे भागते हैं और माया गंवाते रहते हैं। यह रुख न तो देश की अर्थव्यवस्था और न ही हमारे दीर्घकालिक आर्थिक स्वास्थ्य केऔरऔर भी

जब सारा बाजार शुक्रवार को लांग सौदे करने में लगा था, तब हमने कहा कि बजट बुरा है और निफ्टी को बेचो। निफ्टी धराशाई हो गया। आज प्री-ओपन सत्र में निफ्टी 5340.70 तक पहुंच गया और शुक्रवार से 0.37 फीसदी ऊपर था। लेकिन बाद में बाजार को बजट के बुरा होने का अहसास हुआ और निफ्टी लगातार गिरने लगा। अंत में 1.14 फीसदी की गिरावट के साथ 5257.05 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी फ्यूचर्स का आखिरीऔरऔर भी

हमें इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि सेल मार्केटिंग की एक बाजीगरी है जिसके चलिए उपभोक्ताओं की मानसिकता को भुनाया जाता है। शेयर बाजार में भी हर साल इस तरह की ‘क्लियरेंस’ सेल तीन बार लगती है, जिसमें बेचनेवाले अपना माल निकालते हैं। पहली बजट के आसपास, दूसरी दीवाली पर और तीसरी नई साल की शुरुआत पर। सेल में लोगबाग टूटकर भाग लेते हैं। जब उन्हें कोई रोक नहीं सकता तो आपको कोईऔरऔर भी

बाजार की चाल निराली है। वित्त मंत्री के बजट भाषण शुरू करने के आधे घंटे में इसकी दशा-दिशा दिखाने वाला सूचकांक निफ्टी 5445.65 की ऊंचाई तक जा पहुंचा। फिर गिरने-उठने लगा और आखिर में कल से 1.16 फीसदी की गिरावट के साथ 5317.90 पर बंद हुआ। मुझे भी लगता है कि बजट में ऐसा कुछ नहीं, जिसे खास माना जाए। निजी आयकर में छूट की सीमा को 20,000 रुपए बढ़ा देने से लोगों की खर्च करने कीऔरऔर भी

मैंने कहा था कि ब्याज दर में कटौती नहीं होगी और कटौती वाकई नहीं हुई। असल में रेपो दर में 0.25 फीसदी और एसएलआर में एक फीसदी कमी की बात जानबूझकर फैलाई जा रही थी। एक विदेशी मीडिया तक ने ऐसी खबर चलाई थी। ब्याज नहीं घटी तो बाजार में स्वाभाविक रूप से निराशा छा गई। और, तब बाजार को गिरना ही था। निफ्टी आखिरकार 1.53 फीसदी की गिरावट के साथ 5380.50 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टीऔरऔर भी