अमेरिका में ऋण-सीमा बढ़ाने का मुद्दा अब इतिहास बन चुका है। मूडीज ने बिना रेटिंग बदले अमेरिका को डाउनग्रेड कर दिया है। नतीजतन अमेरिकी बाजार कल धड़ाम हो गए। यह सब तो निपट गया। अब आगे क्या? अब आप अमेरिकी बाजार को लेकर क्या बहस करेंगे? क्या आप अब भी भारत में बेचते रहेंगे क्योंकि कौन जानता है कि अमेरिका का अगला डाउनग्रेड तीन महीने बाद ही हो जाए? ध्यान रखें कि अमेरिकी बाजार में भरपूर लोचऔरऔर भी

वि‍त्‍त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि‍ मुद्रास्फीति को स्वीकार्य स्तर पर लाना जरूरी है और रि‍जर्व बैंक द्वारा ब्याज दर आधा फीसदी बढ़ाने से मुद्रास्फीति की अपेक्षा को थामने में मदद मिलेगी। उन्होंने मौद्रिक नीति की पहली तिमाही समीक्षा की पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रिजर्व बैंक ने रेपो दर को 7.50 फीसदी से 8 फीसदी कर मंहगाई में और कमी लाने का ठोस संकेत दि‍या है। वि‍त्‍त मंत्री ने कहा कि ‍इसऔरऔर भी

मुद्रास्फीति के बढ़ते जाने की चिंता रिजर्व बैंक पर लगता है कि कुछ ज्यादा ही भारी पड़ गई है। इसको थामने के लिए उसने ब्याज दरों में सीधे 50 आधार अंक या 0.50 फीसदी की वृद्धि कर दी है। इतनी उम्मीद किसी को भी नहीं थी। आम राय यही थी कि रिजर्व बैंक ब्याज दरें 0.25 फीसदी बढ़ा सकता है। कुछ लोग तो यहां तक कह रहे थे कि औद्योगिक धीमेपन को देखते हुए शायद इस बारऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने इस साल की मौद्रिक नीति में कहा था कि दूसरी छमाही यानी सितंबर 2011 के बाद से मुद्रास्फीति में कमी आनी शुरू हो जाएगी। लेकिन अब वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी कह रहे हैं कि यह दिसंबर के अंत तक ऊंची ही बनी रहेगी। वित्त मंत्री ने चुनिंदा अखबारों के संवाददाताओं को भेजे गए बयान में कहा है कि मुद्रास्फीति के ज्यादा रहने से निजी निवेश पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उनका कहना है,औरऔर भी

भगवान ने इंसान को बनाया या इंसान ने भगवान को – यह बात मैं दावे के साथ नहीं कह सकता। लेकिन इतना दावे के साथ जरूर कह सकता हूं कि दस के चक्र/क्रम में चलनेवाली गिनतियों को इंसान ने ही बनाया है। इंसान की दस उंगलियां है तो यह चक्र दस का है। उन्नीस होतीं तो यह चक्र उन्नीस का होता। ज्योतिष और अंकों में दिलचस्पी रखनेवाले इस पर सोचें। हम तो फिलहाल यह देखते हैं किऔरऔर भी

ग्लोबीकरण का शोर ज्यादा, सच्चाई कम है। अपना देश छोड़कर बाहर पढ़ने जानेवाले छात्रों की संख्या मात्र दो फीसदी है। अपनी मातृभूमि से अलग रहनेवाले लोगों की संख्या मात्र तीन फीसदी है। सीमाओं से बाहर व्यापार के लिए जानेवाले चावल की मात्रा केवल 7 फीसदी है। एस एंड पी 500 सूचकांक में शामिल कंपनियों के निदेशकों में विदेशियों की संख्या महज 7 फीसदी है। दुनिया के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का केवल 20 फीसदी हिस्सा निर्यात सेऔरऔर भी

शेयर बाजार की महत्ता हम लोग नहीं समझते। लेकिन पिछले आठ सालों में शेयर बाजार में सौदों की मात्रा में जबरदस्त इजाफा हुआ है। 2002-03 में यहां साल भर में हुई कुल ट्रेडिंग देश के सकल घेरलू उत्पाद (जीडीपी) का 57.28% थी। लेकिन 2010-11 में यह आंकड़ा 517.30% का हो गया। यानी, हमारी अर्थव्यवस्था का जो आकार है, उसकी पांच गुना से ज्यादा ट्रेडिंग शेयर बाजार में होने लगी है। वैसे इसमें से 445.91% ट्रेडिंग ऑप्शंस वऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने बड़े साफ शब्दों में कह दिया है कि नए वित्त वर्ष 2011-12 के बजट में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सब्सिडी के लिए जो प्रावधान किया है, वह वास्तविकता के अनुरूप नहीं है। सोमवार को नए साल की मौद्रिक नीति जारी करने से पहले अर्थव्यवस्था की समग्र स्थिति के आकलन में रिजर्व बैंक ने यह बात कही है। रिजर्व बैंक के दस्तावेज में कहा गया है कि बजट में सब्सिडी की गिनती यह मानकरऔरऔर भी