सरकार अंतरराष्ट्रीय एजेंसी मूडीज़ को पटाने में जुट गई है कि वह भारत की संप्रभु रेटिंग बढ़ा दे या न भी बढ़ाए तो उसे कम से कम घटाए नहीं। इस सिलसिले में राजधानी दिल्ली में वित्त मंत्रालय के कई बड़े अधिकारी सोमवार को मूडीज़ इनवेस्टर सर्विस की टीम से मिले। मुलाकात व प्रजेंटेशन का क्रम मंगलवार को भी जारी रहेगा। हालांकि मूडीज़ का कहना कि भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मिलना एक रूटीन काऔरऔर भी

पिछले कुछ दिनों से भारतीय शेयर बाजार में तेजी का क्रम जमने लगा तो मंदी के खिलाड़ियों ने अपनी पकड़ बनाने के लिए रिसर्च रिपोर्टों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। भारत में सक्रिय जर्मन बैंक, डॉयचे बैंक ने एक ताजा रिपोर्ट जारी कर कहा है कि अगर अगले वित्त वर्ष 2012-13 में भारत के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) या अर्थव्यवस्था की विकास दर 7 फीसदी पर आ गई तो बीएसई सेंसेक्स गिरकर 14,500 अंक परऔरऔर भी

तकरीबन सारे अर्थशास्त्री, बैंकर व जानकार यही मानते हैं कि मंगलवार, 25 अक्टूबर को रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की दूसरी तिमाही समीक्षा में ब्याज दरों को चौथाई फीसदी और बढ़ा देगा। रेपो दर को 8.50 फीसदी, रिवर्स रेपो दर को 7.50 फीसदी और तदनुसार एमएसएफ की दर को 9.50 फीसदी कर देगा। लेकिन वित्त मंत्रालय के कुछ सूत्रों का कहना है कि इस बार माहौल को खुशगवार बनाने के लिए रिजर्व बैंक ब्याज दरें बढ़ाने से बाजऔरऔर भी

निर्यात में नरमी और बढ़ती महंगाई के चलते व्यापार अधिशेष में तगड़ी कमी की वजह से चीन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर तीसरी तिमाही में घटकर 9.1 फीसदी पर आ गई। यह 2010 की चौथी तिमाही के बाद से सबसे निचला स्तर है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) ने मंगलवार को कहा कि साल की तीसरी तिमाही में चीन की जीडीपी वृद्धि दर घटकर 9.1 फीसदी पर आ गई जो दूसरी तिमाही मेंऔरऔर भी

सोमवार को आपने यह खबर शायद देखी होगी कि बीएसई-500 में शामिल देश की 500 बड़ी कंपनियों के पास मार्च 2011 के अंत तक 4.7 लाख करोड़ रुपए का कैश था। लेकिन अगर सभी लिस्टेड कंपनियों को मिला दें तो यह आंकड़ा 11.6 लाख करोड़ रुपए का हो जाता है। यह वित्त वर्ष 2010-11 में रहे देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 48.78 लाख करोड़ रुपए का 23.78 फीसदी है। प्रमुख ब्रोकरेज फर्म एसएमसी ग्लोबल की एकऔरऔर भी

शेयर बाजार में चल रही मायूसी ने पूंजी बाजार के दूसरे हिस्से प्राइमरी बाजार में भी सन्नाटा फैला दिया है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में पूंजी बाजार में उतरनेवाली 22 कंपनियों ने आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) लाने का इरादा ही छोड़ दिया है। इसके साथ ही बड़े निवेशकों को सीधे खींचनेवाले क्यूआईपी (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) बाजार में भी एकदम मुर्दनी छा गई है। ब्रोकरेज फर्म एसएमसी ग्लोबल सिक्यूरिटीज के ताजा अध्ययन के मुताबिक जिन 22 कंपनियों नेऔरऔर भी

यूरोप का ऋण संकट इस वक्त सबके जेहन पर छाया हुआ है। अमेरिकी सरकार की रेटिंग घटने के बाद उसके भी ऋण पर चिंता जताई जा रही है। लेकिन आईएमएफ के ताजा अध्ययन के मुताबिक दुनिया में सबसे ज्यादा कर्ज का बोझ जापान सरकार पर है। साल 2011 में उसका कर्ज सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 230% रहेगा। ग्रीस सरकार का कर्ज इससे कम, जीडीपी का 165% रहेगा। इसके बाद क्रम से इटली, आयरलैंड, पुर्तगाल औरऔरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था विकास के रास्ते पर है और 2008 की मंदी के बाद पिछले दो वर्षों में अर्थव्यवस्था की औसत विकास दर आठ फीसदी रही है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बुधवार को न्यूयॉर्क में इंडिया इनवेस्टमेंट फोरम को संबोधित करते हुए भरोसा जताया कि इस साल भी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की विकास दर 8 फीसदी रहेगी। अगले साल मार्च से शुरू हो रही 12वीं पंचवर्षीय योजना में जीडीपी में विकास का सालाना लक्ष्य नौ फीसदीऔरऔर भी

बाजार के गिरकर दुरुस्त होने का सिलसिला पूरा हुआ हो या न हो, सबसे पहले देशी-विदेशी फंडों, एचएनआई और ऑपरेटरों ने आगे बढ़कर मूल्यवान शेयरों की खरीद शुरू कर दी है। यह अलग बात है कि हफ्ते के अंत तक मंदड़ियों की मुराद पूरी गई। निफ्टी आज, शुक्रवार को 4800 से नीचे 4796.10 तक चला गया और बंद हुआ है कल से 1.99 फीसदी की गिरावट के साथ 4845.65 पर। सेंसेक्स भी 328.12 अंकों की तगड़ी चोटऔरऔर भी