कंपनियों के नतीजों का मौसम खत्म होने को है। अब तक तस्वीर यह बनी है कि जहां इनफोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी तमाम बड़े स्तर की कंपनियां बाजार की अपेक्षाओं को पूरा करने में नाकाम रही हैं, वहीं पोलारिस, एचसीएल टेक्नो व हिंदुस्तान जिंक जैसे मध्यम स्तर की कंपनियों ने उम्मीद के बेहतर नतीजे हासिल किए हैं। कुल मिलाकर कॉरपोरेट क्षेत्र का लाभार्जन बीते वित्त वर्ष 2010-11 में पहले से 20 फीसदी ज्यादा रहेगा। लेकिन चालू वित्तऔरऔर भी

विश्व अर्थव्यवस्था में एशिया की स्थिति 16वीं व 17वीं सदी जैसी होने जा रही है। तब विश्व अर्थव्यवस्था में एशिया का योगदान 60 फीसदी के आसपास था। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने अब भारत, चीन और जापान के बीच आर्थिक सहयोग में मजबूती की उम्मीद करते हुए अनुमान जताया है कि वर्ष 2050 तक दुनिया के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में एशिया का योगदान 50 फीसदी से अधिक हो जाएगा। एडीबी ने कहा कि बेहतर परिदृश्य मेंऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने महीने पर पहले ही मौद्रिक नीति की समीक्षा में कहा था कि मार्च 2011 में मुद्रास्फीति की दर 8 फीसदी रहेगी। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से लेकर मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु तक कहते रहे थे कि मार्च अंत तक मुद्रास्फीति पर काबू पा लिया जाएगा और यह 7 फीसदी पर आ जाएगी। लेकिन शुक्रवार को आए असली आंकड़ों के मुताबिक मार्च में मुद्रास्फीति की दर 8.98 फीसदी रही है। यह फरवरी महीने केऔरऔर भी

चीन का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2010 में विश्व के कुल जीडीपी का 9.5 फीसदी था और वह इस मामले में दूसरे नंबर पर रहा। लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में वह दुनिया के 124 देशों से पीछे है। नेशनल ब्यूरो आफ स्टैटिक्स (एनबीएस) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक जीडीपी के मामले में 2005 में विश्व के अन्य देशों के मुकाबले चीन जहां पांचवें स्थान पर था, वहीं 2010 में वह दूसरे स्थान पर आ गया।औरऔर भी

अर्थ और वित्त की दुनिया बड़ी निर्मम है। यहां भावना और भावुकता से ऊपर उठकर सीधा-सीधा हिसाब चलता है। जापान में त्राहि-त्राहि मची है। लेकिन चूंकि जापान दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा ग्राहक है और वहां तमाम रिफानरियां आग की चपेट में आ गई हैं तो वे बंद रहेंगी जिससे तेल की मांग तात्कालिक रूप से घट जाएगी। सो, कच्चे तेल के दाम खटाक से 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए। लेकिनऔरऔर भी

बीएसई सेंसेक्स 623 अंक उठा था तो हिचकी का आना लाजिमी था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम की चिंता में बाजार 128 अंक गिरकर खुला। फिर 157 अंक ऊपर चढ़ गया। और, फिर चौरस हो गया। इस बीच बाजार के स्वघोषित वित्त मंत्री (एनालिस्ट) बजट की मीनमेख निकालने में जुटे हैं। खासकर राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के बारे में उनका कहना है कि इसे हासिल नहीं किया जा सकता। ऐसी ही गलती सीएलएसए ने 2003औरऔर भी

आलोचकों की आलोचनाओं को धता बताते हुए बाजार में बजट का उत्साह कायम है। मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी साढ़े तीन फीसदी बढ़ गए। वैसे, सच कहूं तो हमें इस बात की कतई परवाह नहीं करनी चाहिए कि कोई बजट के बारे में क्या कह रहा है क्योंकि हकीकत यही है कि इस बार का बजट पिछले साल से बेहतर है और ऐसे सुधारों से भरा हुआ है जो शेयर बाजार को नई ऊंचाई पर ले जाऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2011-12 के लिए देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का बजट अनुमान है 89,80,860 करोड़ रुपए, जबकि वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने राजकोषीय घाटे का अनुमान रखा है 4,12,817 करोड़ रुपए। इस तरह नए वित्त वर्ष में वित्त मंत्री ने राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.6 फीसदी तक सीमित रखने का मसूंबा बांधा है। लेकिन बहुतेरे जानकार व अर्थशास्त्री वित्त मंत्री के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को शक की नजर से देखते हैं। हालांकि एनम सिक्यूरिटीजऔरऔर भी

साल भर पहले जब सरकार ने घोषित किया था कि वह राजकोषीय घाटे को जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के 5.5 फीसदी तक सीमित रखेगी, तब उसका यह लक्ष्य और दावा बड़ा अतार्किक लग रहा था। लेकिन 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से मिले अतिरिक्त धन की बदौलत सरकार राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.1 फीसदी तक लाने में कामयाब रही है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की यह एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि आस्तियों को बेचना घाटे को पूराऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2011-12 का बजट देश और देश की अर्थव्यवस्था के हित में है। शेयर बाजार अभी इसे अपने हित में मानता है या नहीं, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्योंकि आखिरकार अर्थव्यवस्था ही बाजार की भी मजबूती का आधार बनती है। फिर आज अगर बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंक उछला है तो जरूर बाजार ने भी इसका अहसास किया है। हालांकि सेंसेक्स बाद में केवल 122.49 अंकों या 0.69 फीसदी की बढ़त के साथ 17,823.40 परऔरऔर भी