नए वित्त वर्ष 2012-13 का आम बजट 16 मार्च को पेश किया जाएगा। रेल बजट 14 मार्च को पेश होगा, जबकि आर्थिक समीक्षा 15 मार्च को संसद में पेश की जाएगी। मंगलवार को राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति में यह तय किया गया। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने मीडिया को बताया कि बजट सत्र 12 मार्च को राष्ट्रपतिऔरऔर भी

रिजर्व बैंक भले ही मानता हो कि चालू वित्त वर्ष 2011-12 में देश की आर्थिक विकास दर 7 फीसदी रहेगी, लेकिन वित्त मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु का कहना है कि यह 7 फीसदी से थोड़ी ज्यादा रहेगी। उन्होंने मंगलवार को यह आशा जताई। उनकी राय असल में पूरे वित्त मंत्रालय की राय है जिसका मानना है कि मार्च 2012 के अंत तक मुद्रास्फीति घटकर 6 से 7 फीसदी पर आ जाएगी। इस बीच सरकार नेऔरऔर भी

टेक्सटाइल देश में कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोज़गार देनेवाला क्षेत्र है। यह 3 करोड़ 50 लाख से ज्‍यादा लोगों को सीधे रोज़गार देता है। देश के कुल औद्योगिक उत्‍पादन में इसका योगदान 14 फीसदी, सकल घरेलू उत्‍पादन में 4 फीसदी और निर्यात से होने वाली आय में इसका योगदान 10.63 फीसदी है। 11वीं पंचवर्षीय योजना में 40 एकीकृत टेक्‍सटाइल पार्को को मंजूरी दी गई और इसके लिए 1400 करोड़ रुपए की राशि दी गई। राष्‍ट्रीय वस्‍त्रऔरऔर भी

हमारी बचत दर भले ही लगभग 32 फीसदी है, लेकिन इसका केवल एक तिहाई हिस्सा ही बैंकों तक पहुंच पाता है। बैंकों और वित्‍तीय संस्‍थानों के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के साथ बजट-पूर्व बैठक में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उन कमियों को दूर करने की जरूरत है, जिनका सामना बैंकों को जमा राशि जुटाने के लिए करना पड़ता है। आकड़ों के मुताबिक 2008-09 भारतीय घरों की बचत का 52.8 फीसदी हिस्साऔरऔर भी

कॉरपोरेट क्षेत्र में बहस छिड़ी है कि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह देश के लिए वरदान हैं या अभिशाप। देश की सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी, एचडीएफसी के प्रमुख दीपक पारेख जैसे दिग्गज कहते हैं कि डॉ. सिंह के रूप में हमें अब तक के सबसे अच्छे प्रधानमंत्री मिले हैं। वे एकदम बेदाग राजनेता हैं। इसलिए देश के वरदान हैं। वहीं दूसरा पक्ष कहता है कि डॉ. सिंह भले ही स्वच्छतम छवि के नेता हों, लेकिन उन्होंने जिसऔरऔर भी

चीन अपने 6980 अरब डॉलर के जीडीपी का करीब 2.5% हिस्सा, 174.5 अरब डॉलर वैज्ञानिक शोध पर खर्च करता है। भारत इस मद में 1843 अरब डॉलर के जीडीपी का मात्र 0.9% हिस्सा, 16.5 अरब डॉलर खर्च करता है। चीन ने 2020 तक खर्च बढ़ाकर जीडीपी का 3% करने का लक्ष्य रखा है, जबकि भारत का लक्ष्य 2017 तक 2% पर पहुंचने का है। चीन ने 2010 में वैज्ञानिक शोध से जुड़े 9,69,315 पेपर प्रकाशित किए, जबकिऔरऔर भी

सरकार के सबसे बड़े योजनाकार और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने अनुमान जताया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था या जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में अगले बीस सालों तक औसतन 8 से 9 फीसदी की दर से विकास होता रहेगा। आपको याद ही होगा कि जुलाई-सितंबर 2011 की तिमाही में हमारा जीडीपी मात्र 6.9 फीसदी बढ़ा है। पूरे साल का अनुमान 7.25 से 7.50 फीसदी का है। मोटेंक ने शुक्रवार को भुवनेश्वर विश्वविद्यालय में एक भाषणऔरऔर भी

सरकार ने अपने अनुमानों को जमीनी हकीकत से मिलाने की कोशिश की है। उसने अर्थव्यवस्था की छमाही समीक्षा में चालू वित्त वर्ष 2011-12 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के बढ़ने का अनुमान 7.25 फीसदी से 7.50 फीसदी कर दिया है। फरवरी में बजट पेश करते वक्त इसके 9 फीसदी बढ़ने का अनुमान लगाया गया था। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को संसद में देश के आर्थिक हालात की मध्य-वार्षिक समीक्षा पेश की। इस समीक्षा रिपोर्ट मेंऔरऔर भी

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान से कम से कम एक फीसदी ज्यादा रहेगा। इस साल के बजट में अनुमान लगाया गया है कि राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.6 फीसदी रहेगा। लेकिन मोंटेक की मानें तो यह कम से कम 5.6 फीसदी रहेगा। उन्होंने शुक्रवार को दिल्ली में कहा कि देश के आर्थिक विकास में छाती सुस्ती को दूर करने केऔरऔर भी