रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव का कहना है कि रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था को बढ़ने में मदद देने के लिए ब्याज दरें घटाने की जरूरत को समझता है। वे बुधवार को जयपुर में एक समारोह के दौरान बोल रहे थे। इसी समारोह में रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने पहले कहा था कि अगर मुद्रास्फीति नीचे आती है तो केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति पर अपना रवैया बदल सकता है। गोकर्ण का कहना था कि आगेऔरऔर भी

चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से सितंबर तक की छमाही में देश से हुआ निर्यात 160 अरब डॉलर रहा है। यह पिछले साल की समान अवधि से 52 फीसदी ज्यादा है। वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर ने राजधानी दिल्ली में बुधवार को मीडिया से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। हालांकि उन्होंने कहा कि ये मोटामोटी आंकड़े हैं। इसलिए अंतिम आंकड़े थोड़ा इधर-उधर हो सकते हैं। खुल्लर ने बताया कि अप्रैल-सितंबर 2011 के दौरान देश में हुआ आयातऔरऔर भी

टीम अण्णा की प्रमुख सदस्य किरण बेदी ने लोकपाल को संवैधानिक दर्जा दिए जाने की सरकारी पेशकश पर सवाल खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि यह लोकपाल विधेयक के पारित होने में देरी करने या उससे बचने और लोगों को मूर्ख बनाने का एक सोचा-समझा तरीका है। बुधवार को किरण बेदी ने कहा कि संवैधानिक दर्जा इसे (लोकपाल विधेयक को) खत्म करने का तरीका है क्योंकि इसके लिए संसद के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होतीऔरऔर भी

अगस्त में औद्योगिक उत्पादन के बढ़ने की दर जुलाई जैसी ही निराशाजनक रही है। बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) महज 4.1 फीसदी बढ़ा है, जबकि उम्मीद 5 फीसदी की थी। यह पिछले महीने जुलाई में आईआईपी के बढ़ने की संशोधित दर 3.84 फीसदी से थोड़ा ही ज्यादा है। इसका सारा दोष रिजर्व बैंक पर मढ़ा जा रहा है क्योंकि उसने पिछले डेढ़ साल में ब्याज दरें 12 बार बढ़ाई हैं।औरऔर भी

इनफोसिस ने अपेक्षा से बेहतर नतीजे घोषित किए। लेकिन बाकी साल के अनुमान घटा दिए। फिर भी इसके शेयरों में उछाल गया। इसका कारण यह है कि बाजार में हर कोई शॉर्ट हुआ पड़ा है जबकि डाउनग्रेड का दौर अब खत्म हो चुका है और अपग्रेड का क्रम शुरू हो गया है। इससे आपका साबका भले ही न पड़ा हो, लेकिन ऐसा होना आम नियम और व्यवहार है। रुपए का अवमूल्यन सॉफ्टवेयर निर्यात करनेवाली कंपनियों की मददऔरऔर भी

देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी इनफोसिस ने उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए तो दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद निवेशकों के चेहरे खिल गए और उसके शेयर एकबारगी 6.17 फीसदी उछल गए। लेकिन इसके साथ ही थोड़ी बिकवाली भी शुरू हो गई तो शेयर बाद में थोड़ा नीचे आ गए। इनफोसिस ने चालू वित्त वर्ष 2011-12 की सितंबर तिमाही में समेकित रूप से 8099 करोड़ रुपए की आय पर 1906 करोड़ रुपएऔरऔर भी

एक मोटी-सी बात गांठ बांध लें कि शेयरों का धंधा दुनिया का इकलौता धंधा है जो अकेले किया जाता है। दूसरों के चक्कर में पड़े तो समझिए कि खटिया खड़ी, बिस्तरा गोल। आप इस बात की भी तस्दीक करेंगे कि चैनलों या अखबारों में दी गई एनालिस्टों की दस में आठ सलाहें गलत होती हैं। इसलिए हमारी कोशिश आपको ‘चुटकी भर टिप्स, मुठ्ठी भर मंत्र’ देने की है ताकि आप अपने फैसले खुद कर सकें। हमारी सलाहऔरऔर भी

हम सभी के अंदर एक चुम्बक है जो माफिक चीजों को खींचकर लगातार एक पैटर्न बनाता रहता है। इसी पैटर्न से हमारा व्यक्तित्व बनता है, जबकि इसका एक अंश शब्दों का आकार पाकर विचार बन जाता है।और भीऔर भी

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कनफेडरेशन (आइबॉक) के आरोपों का ऐसा जबरदस्त असर हुआ कि मंगलवार को निजी क्षेत्र के धनलक्ष्मी बैंक के शेयर खाक में मिल गए। दोपहर सवा बजे के आसपास उसके शेयर कल के बंद भाव 71.60 रुपए से 24.23 फीसदी गिरकर 54.25 रुपए पर पहुंच गए, जो पिछले 52 हफ्तों का ही नहीं, मई 2009 के बाद का उसका नया न्यूनतम स्तर है। हालांकि बाद में बैंक प्रबंधन की साफ-सफाई के बाद शेयर थोड़ाऔरऔर भी

मारुति सुज़ुकी के मानेसर संयंत्र में कर्मचारियों और प्रबंधन में तनातनी जारी है। प्रबंधन का आरोप है कि कर्मचारियों ने पूरे संयंत्र पर कब्जा कर लिया है। वहीं कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन पहले मान चुकी बातों से पीछे हट रहा है और उनकी एकता को तोड़ने में लगा है। कर्मचारियों का आरोप है कि मारुति प्रबंधन 1500 अस्थायी कर्मचारियों को काम पर वापस नहीं ले रहा है और जब तक ये नहीं होगा, तब तकऔरऔर भी